
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान और अमेरिका में तनातनी के बीच बड़ी खबर सामने आ रही है। तेहरान की ओर से एक सिस्टम की बात चल रही है। चर्चा है ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए एक नया सिस्टम तैयार कर लिया है, जिसे जल्द लागू किया जाएगा। इस तंत्र के तहत विशिष्ट सेवाओं के लिए आवश्यक शुल्क भी लिया जाएगा। ईरान के अनुसार, उनका ये सिस्टम फ्रीडम प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों के लिए उपलब्ध नहीं होगा।
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होर्मुज को लेकर वैश्विक तनाव बढ़ने के बीच ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए अपनी योजना साझा की। उनका कहना है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए एक नया सिस्टम तैयार कर लिया है, जिसे जल्द लागू किया जाएगा।
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उन्होंने एक्स पर लिखा, "ईरान ने अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुरक्षा की गारंटी के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में यातायात प्रबंधन के लिए एक पेशेवर तंत्र तैयार किया है, जिसे जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा। इस प्रक्रिया में केवल वाणिज्यिक जहाज और ईरान के साथ सहयोग करने वाले पक्ष ही लाभान्वित होंगे।" अजीजी के अनुसार, इस तंत्र के तहत विशिष्ट सेवाओं के लिए आवश्यक शुल्क भी लिया जाएगा।
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वहीं, यह मार्ग तथाकथित “फ्रीडम प्रोजेक्ट” के संचालनकर्ताओं के लिए बंद रहेगा। स्पष्ट है कि इस सिस्टम के तहत एक तय रास्ते से जहाजों को निकलने की अनुमति दी जाएगी, खास सेवाओं के लिए शुल्क भी लिया जाएगा और व्यवस्था का लाभ केवल उन्हीं व्यावसायिक जहाजों को मिलेगा जो ईरान के साथ सहयोग करेंगे।
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इस बीच, ईरानी सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के सलाहकार मोहम्मद मोखबर की ओर से कुवैत और यूएई को दी गई कड़ी चेतावनी भी सुर्खियों में है, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान ने अब तक संयम बरता है, लेकिन यह हमेशा नहीं चलेगा। मोखबर ने कहा कि इन देशों ने अपने इलाके को ईरान के दुश्मनों के इस्तेमाल के लिए खुला छोड़ दिया है।
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उन्होंने कहा, "ईरान ने लंबे समय तक उन्हें दोस्त और भाई माना, लेकिन अब उन्होंने अपनी आजादी तक बेच दी है और अपने देश की जमीन दुश्मनों को इस्तेमाल करने दी है।" उन्होंने हालिया युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान ने जिन ठिकानों को निशाना बनाया, वे अमेरिकी ठिकाने थे और ईरान ने पूरी ताकत से जवाब नहीं दिया था। उनका कहना था कि यह संयम स्थायी नहीं है और आगे हालात बदल सकते हैं। इसे कुवैत और यूएई के लिए धमकी माना जा रहा है।
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