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इजरायल चुनाव में नेतन्याहू को बड़ा झटका! 53 सीटों पर सिमटा गठबंधन, आगे क्या होगा?

इजरायल चुनाव में नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं और वह बहुमत से पीछे रह गया है। अब सरकार गठन के लिए विपक्ष और अरब पार्टियों की भूमिका अहम होगी।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया 

  • नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जो बहुमत के आंकड़े से आठ कम हैं।

  • गादी आइजेनकोट के विपक्षी खेमे को 48 और अरब पार्टियों को 19 सीटें मिली हैं।

  • विपक्ष और अरब पार्टियों की सीटें मिलाकर 67 होती हैं, लेकिन गठबंधन पर सहमति बनना आसान नहीं है।

इजरायल के आम चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का बड़ा झटका लगा है। उनका गठबंधन बहुमत हासिल करने से पीछे रह गया है। 120 सदस्यीय संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत है, लेकिन ताजा मतगणना में नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं। विपक्षी खेमे को 48 सीटें मिली हैं, जबकि अरब पार्टियों ने संयुक्त रूप से 19 सीटों पर बढ़त बनाई है। इससे सरकार गठन का समीकरण उलझ गया है और नेतन्याहू के सामने सत्ता में बने रहने की चुनौती खड़ी हो गई है।

'द टाइम्स ऑफ इजरायल' और 'जेरूसलम पोस्ट' की 29 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक, गुरुवार तड़के तक करीब 90.4 फीसदी मतों की गिनती हो गई थी। सीटों का यह बंटवारा उस समय तक के आंकड़ों पर आधारित था और अंतिम आधिकारिक नतीजे आना बाकी थे। नेतन्याहू के गठबंधन को पिछली संसद में 68 सीटें हासिल थीं। इस बार 53 सीटों पर सिमटने का मतलब है कि उसके समर्थन में 15 सीटों की कमी आई है।

विपक्ष के पास बहुमत का गणित, लेकिन समर्थन की चुनौती

आंकड़ों के लिहाज से विपक्ष के लिए सरकार बनाने का रास्ता मौजूद है। गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे की 48 सीटों में अरब पार्टियों की 19 सीटें जोड़ दी जाएं, तो कुल संख्या 67 पहुंचती है। यह बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों से अधिक है। हालांकि, केवल सीटें जोड़ लेने से सरकार बनना तय नहीं होता, क्योंकि इसके लिए दलों के बीच राजनीतिक सहमति और समर्थन जरूरी है।

आइजेनकोट चुनाव से पहले अरब नेतृत्व वाली पार्टियों के साथ अल्पमत सरकार बनाने से इनकार कर चुके थे। वहीं, संयुक्त सूची के नेता यूसुफ जबरीन ने संकेत दिया था कि उनकी पार्टी नेतन्याहू को सत्ता से बाहर रखने वाली सरकार को बाहर से समर्थन दे सकती है, लेकिन सरकार में शामिल नहीं होगी। ऐसे में विपक्ष के सामने चुनौती है कि वह अरब पार्टियों के समर्थन के स्वरूप और सरकार की संभावित संरचना पर सहमति कैसे बनाता है।

नेतन्याहू के लिए गठबंधन बचाना आसान नहीं

चुनाव प्रचार के दौरान नेतन्याहू ने अरब पार्टियों के खिलाफ रुख अपनाया था। उनकी लिकुड पार्टी ने अरब बहुल मतदान केंद्रों पर कथित गड़बड़ियों और चुनाव में धांधली के आरोप भी लगाए। इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। राजनीतिक रूप से यह रुख नेतन्याहू के लिए अरब पार्टियों का समर्थन हासिल करना और मुश्किल बना सकता है।

सरकार गठन के लिए एक व्यापक गठबंधन की संभावना पर भी चर्चा है। इसमें नेतन्याहू और विपक्षी खेमे के बीच एकता सरकार का विकल्प शामिल है। लेकिन दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक मतभेद ऐसे समझौते को कठिन बना सकते हैं। यदि कोई भी पक्ष 61 सांसदों का समर्थन जुटाने में सफल नहीं होता, तो राजनीतिक गतिरोध लंबा खिंच सकता है और नए चुनाव की नौबत भी आ सकती है।

अंतिम नतीजों और गठबंधन वार्ता पर नजर

नेतन्याहू फिलहाल कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे। आधिकारिक नतीजे आने के बाद राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग विभिन्न दलों के नेताओं से विचार-विमर्श करेंगे और सरकार गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अंतिम सीट बंटवारा और दलों के बीच बातचीत ही तय करेगी कि अगली सरकार किसके नेतृत्व में बनेगी।

चुनाव के नतीजे नेतन्याहू के लिए स्पष्ट राजनीतिक झटका हैं, लेकिन इससे उनकी सत्ता तत्काल समाप्त नहीं होती। विपक्ष के पास अरब पार्टियों के साथ बहुमत का गणित जरूर है, पर राजनीतिक सहमति बनाना उसकी सबसे बड़ी परीक्षा होगी। इसलिए फिलहाल इजरायल में न तो किसी नए प्रधानमंत्री का रास्ता साफ है और न ही सरकार गठन का अंतिम फैसला हुआ है।

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