
अमेरिका 2024 और 2025 के बीच जिस खामोशी से अपनी जमीन पर खून बहते देखता रहा, वह दुनिया को हैरान करता है। पिछले दो सालों में चार या उससे ज्यादा मौतों वाली गोलीबारी की घटनाएं यह दिखाती हैं कि दुनिया की सबसे विकसित मानी जाने वाली यह सुपरपावर अपनी ही सड़कों पर फैलते हथियारों के जंगल को काबू नहीं कर पा रही।
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आंकड़े चौंकाते नहीं, डराते हैं। गन वाइलेंस आर्काइव के रिकॉर्ड के मुताबिक 2025 के दस महीनों (जनवरी से अक्टूबर तक, आंकड़े 3 नवंबर तक के जारी किए गए) में ही ऐसी 367 मास शूटिंग्स हो चुकी थीं जिनमें कुल 366 लोगों की मौत हुई और 1,600 से अधिक लोग घायल हुए। 2024 में भी हालात इससे बेहतर नहीं रहे जब साल की शुरुआत से अंत तक सैकड़ों गोलियों ने स्कूलों, घरों, सड़कों, बार, चर्च तक किसी जगह को सुरक्षित नहीं छोड़ा।
2024 की शुरुआत ही खून से हुई। 21 जनवरी को इलिनॉय के जोलिएट में एक व्यक्ति ने अलग-अलग स्थानों पर फायरिंग कर आठ लोगों को मौत के घाट उतार दिया। पुलिस इन घटनाओं को 'आइसोलेटेड' कहकर आगे बढ़ जाती है।
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साल 2024 का एक और काला दिन सितंबर में आया जब जॉर्जिया के एक हाई स्कूल में छात्र ने ही अपने सहपाठियों और शिक्षकों पर गोलियां चला दीं। चार लोग मारे गए, नौ घायल हुए, और एक बार फिर स्कूल सुरक्षा पर सवाल उठ खड़े हुए। यह विडंबना है कि जिस देश ने दुनिया को आधुनिक शिक्षा, उच्च तकनीक, और डिजिटल सुरक्षा के मॉडल दिए, वही देश अपने बच्चों को कक्षा में सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष करता दिख रहा है। अमेरिका में स्कूल शूटिंग अब किसी अनहोनी की तरह नहीं आती; यह एक पैटर्न सा बनता जा रहा है।
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और फिर 2025 के खत्म होते-होते कैलिफोर्निया के स्टॉकटन शहर ने उसी पैटर्न को दोहराया है। ब्लैक फ्राइडे पर एक बैंक्वेट हॉल की रोशनियों और संगीत के बीच अचानक चीखें गूंज उठीं। चार लोग वहीं ढेर हो गए, और दस घायल होकर अस्पताल पहुंचे।
इन घटनाओं का सबसे डरावना पहलू यह है कि आंकड़े हर बार घटना से बड़े हो गए हैं। मौतें बढ़ रही हैं, हमले बढ़ रहे हैं, हथियारों की उपलब्धता अनियंत्रित है, और राजनीतिक बहसें इतनी ध्रुवीकृत हैं कि गोली भी वोट बैंक के चश्मे से देखी जाने लगी है। सीडीसी ने 2023 में बताया था कि 46,000 से ज्यादा अमेरिकी नागरिक बंदूक से संबंधित हिंसा में मारे गए—जो दुनिया में किसी भी विकसित देश से कई गुना अधिक है। 2024–2025 में यह रुझान बदला नहीं, बस आंकड़ों ने नए चेहरे धारण कर लिए।
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अमेरिका दुनिया को हमेशा लोकतंत्र, स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का पाठ पढ़ाता है, लेकिन यह भी सच है कि उसका अपना समाज हथियारों की बाढ़ में डूब रहा है। वह देश जो दुनिया की सबसे सुरक्षित सीमाएं बनाने का दावा करता है, वही अपने ही नागरिकों को रोजमर्रा की सुरक्षा नहीं दे पा रहा।
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