
अमेरिका ने रूस पर यूक्रेन में लगभग चार साल से जारी युद्ध को ऐसे वक्त में ‘‘खतरनाक और अविवेकपूर्ण तरीके से लंबा खींचने’’ का आरोप लगाया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन शांति की दिशा में बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की उप राजदूत टैमी ब्रूस ने नाटो सहयोगी पोलैंड के साथ यूक्रेन की सीमा के करीब पिछले सप्ताह रूस द्वारा परमाणु क्षमता वाली ओरेश्निक बैलिस्टिक मिसाइल के प्रक्षेपण का सोमवार को विशेष रूप से जिक्र किया।
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उन्होंने सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में कहा कि अमेरिका इस संघर्ष में ‘‘अनगिनत लोगों की मौत’’ पर खेद व्यक्त करता है और ऊर्जा एवं अन्य बुनियादी ढांचे पर रूस के बढ़ते हमलों की निंदा करता है।
गत सप्ताह बृहस्पतिवार रात रूस ने सैकड़ों ड्रोन और दर्जनों मिसाइलों से हमले किए थे जिसके बाद यूक्रेन ने बैठक का अनुरोध किया था। रूस ने नयी हाइपरसोनिक ओरेश्निक मिसाइलों से भी हमले किए थे।
इसका उपयोग रूस ने दूसरी बार किया था, जिसे यूक्रेन के नाटो सहयोगियों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।
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यूरोप के नेताओं ने हमले में ओरेश्निक के इस्तेमाल की निंदा करते हुए इसे ‘‘युद्ध को भड़काने वाला और अस्वीकार्य’’ कदम बताया तथा अमेरिकी दूत ब्रूस ने भी सोमवार को इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप की विश्वव्यापी शांति के प्रति अभूतपूर्व प्रतिबद्धता के कारण अपार संभावनाओं से भरे इस समय में दोनों पक्षों को तनाव कम करने के रास्ते तलाशने चाहिए लेकिन रूस की कार्रवाई से युद्ध बढ़ने तथा इसके और तेज होने का खतरा है।’’
ब्रूस ने याद दिलाया कि रूस ने लगभग एक साल पहले यूक्रेन में संघर्ष को समाप्त करने का आह्वान करने वाले सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था।
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उन्होंने कहा, ‘‘अगर रूस अपनी बातों को अमल में लाए तो बहुत अच्छा होगा। उस प्रस्ताव की भावना के अनुरूप रूस, यूक्रेन और यूरोप को शांति के लिए गंभीरता से प्रयास करने चाहिए और इस दुःस्वप्न का अंत करना चाहिए।’’
वहीं संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत वासिली नेबेंजिया ने सुरक्षा परिषद को बताया कि जब तक यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ‘‘होश में नहीं आते और बातचीत के लिए यथार्थवादी शर्तों पर सहमत नहीं होते, तब तक हम समस्या का समाधान सैन्य तरीकों से करते रहेंगे।’’
संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन के राजदूत एंड्री मेलनिक ने इसके जवाब में कहा कि रूस अब पहले की तुलना में अधिक कमजोर स्थिति में है, उसकी अर्थव्यवस्था धीमी हो रही है और राजस्व में गिरावट आई है।
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