
मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए सैन्य कार्रवाई की अनुमति देने वाले अहम प्रस्ताव पर बड़ा गतिरोध पैदा हो गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस, चीन और फ्रांस ने इस प्रस्ताव को समर्थन देने से इनकार कर दिया, जिसके चलते बहरीन और अन्य खाड़ी देशों द्वारा समर्थित यह पहल फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है।
Published: undefined
बहरीन द्वारा तैयार इस प्रस्ताव में सदस्य देशों और बहुराष्ट्रीय नौसैनिक बलों को ‘सभी आवश्यक साधनों’ के उपयोग की अनुमति देने की मांग की गई थी, ताकि समुद्री मार्गों पर अंतरराष्ट्रीय आवाजाही बाधित न हो। हालांकि, सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य रूस, चीन और फ्रांस ने स्पष्ट कर दिया कि वे सैन्य बल के इस्तेमाल की इजाजत देने वाली भाषा के पक्ष में नहीं हैं। इस प्रस्ताव पर शुक्रवार को वोटिंग की संभावना है, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर सहमति बनना अभी मुश्किल दिख रहा है।
Published: undefined
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सैन्य कार्रवाई को ‘अवास्तविक’ बताते हुए चेतावनी दी कि इससे तट पर तैनात ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और उनकी बैलिस्टिक मिसाइलों का खतरा और बढ़ सकता है। कई हफ्तों की बंद कमरे में चली बातचीत के बावजूद प्रस्ताव में सिर्फ चार संशोधन ही हो सके हैं, जबकि ‘सभी आवश्यक साधनों’ वाली धारा पर अब भी सहमति नहीं बन पाई है।
Published: undefined
दरअसल, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को बंद कर दिया था। दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गहरा असर पड़ा है—तेल, शिपिंग और बीमा की लागत बढ़ गई है, जबकि कतर जैसे देशों को अपना उत्पादन रोकना पड़ा, जिससे उन्हें सालाना 20 अरब डॉलर का नुकसान हो रहा है।
Published: undefined
इस नाकेबंदी के बीच ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों और बुनियादी ढांचों पर हजारों जवाबी हमले किए, जिनमें कम से कम 18 नागरिकों की मौत हुई है। बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल ज़यानी ने ईरान पर ‘आक्रामक’ और ‘पूर्व नियोजित’ हमलों का आरोप लगाया है, जिसमें नागरिक ढांचों को निशाना बनाया गया। वहीं, ईरान ने संकेत दिया है कि वह जंग के बीच होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी जारी रखेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस युद्ध ने ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच सुधरते रिश्तों को झटका दिया है, जबकि अब मध्यस्थता की भूमिका ओमान और कतर के बजाय पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र निभा रहे हैं।
Published: undefined
सऊदी अरब स्थित थिंक टैंक गल्फ रिसर्च सेंटर के अध्यक्ष अब्दुलअजीज सागर ने कहा कि किसी भी संभावित युद्धविराम समझौते में ईरान की खाड़ी देशों पर हमले की क्षमता और होर्मुज के समुद्री यातायात पर उसके नियंत्रण को शामिल करना जरूरी होगा। उन्होंने साफ कहा कि “जो हुआ है, उसे भुलाया नहीं जा सकता।”
Published: undefined
Google न्यूज़, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia
Published: undefined