
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने चीन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि वह उसे ईरान से तेल खरीदने की अनुमति नहीं देगा। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि प्रस्तावित नाकाबंदी के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी चीनी या अन्य जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर न सके। उन्होंने कहा, “वे तेल ले सकते हैं, लेकिन ईरानी तेल नहीं।”
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रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बेसेंट ने मंगलवार को चीन को “अविश्वसनीय वैश्विक भागीदार” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मिडिल ईस्ट जंग के दौरान चीन ने तेल की आपूर्ति को जमा किया और कुछ वस्तुओं के निर्यात को सीमित कर दिया। बेसेंट ने इसकी तुलना कोरोना महामारी के दौरान मेडिकल उत्पादों के स्टोरेज से की, जब चीन ने सप्लाई को नियंत्रित किया था।
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बेसेंट ने अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के दौरान चीन की भूमिका की आलोचना करते हुए कहा कि इस संघर्ष की वजह से तेल की कीमतें 50 प्रतिशत तक बढ़ गईं और वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो गई। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में चीन तीन बार ऐसे मौके पर अविश्वसनीय साझेदार साबित हुआ। कोविड के दौरान मेडिकल सप्लाई, अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर प्रतिबंध की धमकी, और अब तेल के मामले में।
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बेसेंट के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई गुजरती है। उनका आरोप है कि इस अहम मार्ग के बंद होने से पैदा हुई वैश्विक मांग की कमी को संतुलित करने के बजाय चीन लगातार तेल का भंडार जमा कर रहा है। उन्होंने कहा कि चीन के पास पहले से ही इतना रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार है जो 32 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के कुल भंडार के बराबर है, इसके बावजूद वह खरीद जारी रखे हुए है।
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बेसेंट ने दावा किया कि चीन ईरानी तेल का 90 प्रतिशत से अधिक खरीदता रहा है, जो उसकी कुल वार्षिक खरीद का करीब 8 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर चीनी अधिकारियों से बातचीत भी हुई है। हालांकि, उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या यह विवाद डोनाल्ड ट्रंप की मई के मध्य में प्रस्तावित बीजिंग यात्रा को प्रभावित करेगा। उन्होंने इतना जरूर कहा कि ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच अच्छे कामकाजी संबंध हैं।
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