
ईरान पर अमेरिका की बमबारी के बाद अमेरिकी संसद युद्ध शुरू करने की राष्ट्रपति की शक्तियों पर चर्चा कर सकती है।
संसद के दोनों सदनों प्रतिनिधि सभा और सीनेट ने इस सप्ताह युद्ध से जुड़ी शक्तियों को लेकर प्रस्ताव तैयार किए हैं, जिनपर बहस के बाद मतदान होना है।
इन हमलों में अमेरिकी करदाताओं का बेहिसाब पैसा खर्च हो रहा है। ये हमले हफ्तों तक जारी रहने की आशंका है, जिसका कोई स्पष्ट लक्ष्य और परिणाम नहीं है।
ग्यारह सितंबर 2001 के हमलों के बाद साल 2003 में इराक युद्ध से पहले अमेरिकी संसद में लंबी बहस हुई थीं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। इसके अलावा हाल ही में वेनेजुएला में अमेरिका ने सीमित सैन्य हमले किए थे। लेकिन ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम से शुरू किए गए इस अभियान का निकट भविष्य में अंत होता प्रतीत नहीं हो रहा है।
ईरान के जवाबी हमलों में अमेरिका के कम से कम तीन सैन्य कर्मियों की मौत हो चुकी है। ट्रंप ने रविवार को आगाह किया था कि जान गंवाने वाले अमेरिकियों की संख्या बढ़ सकती है।
यह समय संसद के लिए महत्वपूर्ण है। अमेरिकी संविधान के तहत केवल संसद के पास युद्ध की घोषणा करने का अधिकार होता है।
निगरानी संगठन ‘प्रोजेक्ट ऑन गवर्नमेंट ओवरसाइट’ में द कंस्टीट्यूशन प्रोजेक्ट के कार्यकारी निदेशक डेविड जानोव्स्की ने कहा, "संविधान का उद्देश्य किसी एक सरकारी संस्था या व्यक्ति को सर्वशक्तिशाली होने से रोकना है।”
उन्होंने कहा, "वास्तविक जन प्रतिनिधि संसद सदस्य होते हैं, राष्ट्रपति नहीं। हालांकि, हम आम तौर पर राष्ट्रपति पर ही सबका ध्यान रहता है। हमें ऐसे जन प्रतिनिधियों की जरूरत है, जो यह तय करें कि यु्द्ध में शामिल होना है या नहीं।”
अमेरिका में युद्ध की घोषणा, युद्ध की मंजूरी या सैन्य बल के उपयोग के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होती है। लेकिन ऐसा कभी कभार ही होता है। राष्ट्रपति और संसद इन मुद्दों पर आपस में टकराते रहते हैं, लेकिन संसद के पास एक खास ताकत है, क्योंकि वह सरकारी खर्चों को नियंत्रित करती है।
उन्होंने कहा, "संसद जानती है कि अगर वह चाहे तो इसे रोक सकती है।”
यू ने यह भी बताया कि जब वियतनाम युद्ध खत्म हुआ था, तो संसद ने ही फंडिंग रोक दी थी।
लेकिन संसद में रिपब्लिकन पार्टी के पास बहुमत है, जो ईरान के खिलाफ सैन्य शक्ति का इस्तेमाल करने के ट्रंप के विचार से सहमत है। हाल ही में, उन्होंने पेंटागन के लिए बड़े पैमाने पर नए फंड को मंजूरी दी थी।
यू के अनुसार चूंकि संसद में रिपब्लिकन पार्टी के पास बहुमत है, इसलिए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि पार्टी के सांसद ट्रंप के फैसलों का विरोध नहीं करेंगे, बल्कि उनसे सहमति जताएंगे।
Published: undefined
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के शहर इस्फहान में फंसे भारतीय छात्रों के बीच भय और अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है। छात्रों ने भारत सरकार से अपील की है कि स्थिति सामान्य होने तक उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए या स्वदेश वापस लाने की व्यवस्था की जाए।
इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज की छात्रा फातिमा ने वीडियो जारी कर बताया कि वर्तमान में लगभग 25 से 30 भारतीय छात्र इस क्षेत्र में मौजूद हैं और लगातार चिंता में जी रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हम सरकार से विनम्रतापूर्वक अनुरोध करते हैं कि हालात स्थिर होने तक हमें किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए या हमारे माता-पिता के पास भारत भेजा जाए।”
फातिमा ने स्पष्ट किया कि छात्र पहले इसलिए नहीं लौट सके, क्योंकि उनकी शैक्षणिक प्रतिबद्धताएं बाधा बनीं। उन्होंने बताया, “हम नहीं रुकना चाहते थे, लेकिन कक्षाओं, परीक्षाओं, अस्पताल की शिफ्टों और शैक्षणिक दौरों के कारण यहां रुकना अपरिहार्य था।”
छात्रा के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों को सूचित किया है कि अगला सेमेस्टर ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा, जिससे उन्हें ईरान में रहने या घर लौटने का विकल्प मिलेगा और वे अप्रैल में परीक्षा देने वापस आ सकते हैं, हालांकि अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए अस्पताल में प्रतिदिन ड्यूटी पर उपस्थित रहना अनिवार्य कर दिया गया है।
छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से उन्हें केवल छात्रावास में रहने और बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। उन्होंने दावा किया,“हम पर मौजूदा छात्रावास खाली कर दूसरे छात्रावास में जाने का दबाव डाला जा रहा है। दिन-रात हमसे कमरा खाली करने को कहा जा रहा है।”
फातिमा ने बताया कि कई छात्र इस समय परिसर से बाहर किराए के आवासों में रह रहे हैं और सीमित संसाधनों के सहारे गुजारा कर रहे हैं।
Published: undefined
पाकिस्तान के हालात सामान्य नहीं हैं। देश के भीतर और बाहर चुनौतियां कम नहीं हैं। अफगानिस्तान से संघर्ष जारी है तो ईरान को लेकर उसका रुख साफ न होने से भी समस्याएं खड़ी हो रही हैं। यही वजह है कि सोमवार को जब देश के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी संसद को संबोधित करने पहुंचे तो उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा। वे अपनी असफलता का ठीकरा एक बार फिर भारत पर फोड़ रहे थे, गीदड़भभकी दे रहे थे, लेकिन उनके ही सांसदों ने बगलें झांकने पर मजबूर कर दिया।
संयुक्त बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी घरेलू या विदेशी ताकत को अपनी शांति भंग करने के लिए पड़ोसी इलाके का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दे सकते।”
बतौर राष्ट्रपति जरदारी नौवीं बार नेशनल असेंबली के संयुक्त सत्र को संबोधित करने पहुंचे थे। शांति का राग अलापते हुए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सोमवार को युद्ध को आखिरी रास्ता बताते हुए भारत को आंखें दिखाने की कोशिश की। अपनी झूठी तारीफ करते हुए आगे कहा कि पाकिस्तान ने पहले ही भारत और अफगानिस्तान दोनों को अपनी काबिलियत का बस एक छोटा सा हिस्सा ही दिखाया है।
इसके साथ ही दंभ भरा। परमाणु शक्ति होने का एहसास कराते हुए गीदड़भभकी की। बोले, “पाकिस्तान एक जिम्मेदार परमाणु संपन्न देश है और उस जिम्मेदारी का वजन समझता है। साथ ही, हम एक ऐसा देश हैं जो जरूरत पड़ने पर अपना बचाव करना भी जानता है।”
गौर करने वाली बात ये रही कि जरदारी अपनी भड़ास निकालते रहे और उधर विपक्ष उनके खिलाफ नारे लगाता रहा। 'गो जरदारी गो' और 'खान को रिहा करो' के नारे से संसद गूंजती रही। पीटीआई की अगुवाई में विपक्षी गठबंधन पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग कर रहा था।
Published: undefined
अफगानिस्तान की सीमा से लगे जिलों में स्थित 50 से अधिक शिक्षण संस्थान सोमवार को बंद रहे। पाकिस्तान के अशांत पश्चिमोत्तर प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में एक स्कूल पर ड्रोन हमले के बाद यह कदम उठाया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
यह घटना मोहमंद जिले की गलानाई तहसील में उस समय घटी, जब एक मानवरहित विमान (यूएवी) गवर्नर मॉडल हाई स्कूल की इमारत से टकरा गया।
मोहमंद के उपायुक्त (डीसी) यासिर हसन ने घटना की पुष्टि की और कहा कि सुरक्षा बल हवाई क्षेत्र में देखे गए एक अन्य ड्रोन को “मार गिराने का प्रयास” कर रहे थे।
स्कूल के बरामदे में यूएवी का मलबा भी मिला; किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और इस घटना से कोई महत्वपूर्ण संरचनात्मक क्षति नहीं हुई है।
परिसर के अंदर और आसपास सुरक्षा तुरंत कड़ी कर दी गई और निरीक्षण के लिए इलाके की घेराबंदी की गयी। इनमें गलानाई में एक स्कूल, बैजई में 33, सफ़ी में 10 और ख्वेज़ई में दो स्कूल शामिल थे।
Published: undefined
Google न्यूज़, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia
Published: undefined