
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई को लेकर ईरान पर हमले की उनकी चेतावनी के बाद तेहरान वाशिंगटन के साथ बातचीत करना चाहता है।
ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब अधिकार कार्यकर्ताओं ने सोमवार को कहा कि महंगाई और मुद्रा अवमूल्यन को लेकर देशव्यापी प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 544 हो गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “मुझे लगता है कि वे अमेरिका से मार खा-खाकर थक चुके हैं। ईरान बातचीत करना चाहता है।”
हालांकि, ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणी पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त की है। उनकी यह टिप्पणी ओमान के विदेश मंत्री की सप्ताहांत में हुई ईरान यात्रा के बाद आई है, जो लंबे समय से वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका में रहे हैं।
यह भी स्पष्ट नहीं है कि ईरान क्या पेशकश कर सकता है, खासकर तब जब ट्रंप ने उसके परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल बेड़े को लेकर कड़ी शर्तें रखी हैं, जिसे तेहरान अपनी राष्ट्रीय रक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानता है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान में विदेशी राजनयिकों से बातचीत के दौरान तल्ख लहजे में कहा, “स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।” उन्होंने हिंसा के लिए इजराइल और अमेरिका को दोषी ठहराया।
उन्होंने कहा, “बैठक की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन इससे पहले जो कुछ हो रहा है, उसे देखते हुए हमें कार्रवाई करनी पड़ सकती है। लेकिन बैठक की व्यवस्था की जा रही है। ईरान ने फोन किया है, वे बातचीत करना चाहते हैं।”
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न्यूयॉर्क शहर के तीन अस्पताल प्रणालियों में कार्यरत हजारों नर्स सोमवार को हड़ताल पर चली गईं, क्योंकि सप्ताहांत भर चली बातचीत से उनके अनुबंध विवादों में कोई सफलता नहीं मिली।
माउंट सिनाई अस्पताल और इसके दो सहायक परिसरों में नर्सों को सुबह छह बजे से काम छोड़कर हड़ताल पर जाना था। इसके अलावा न्यूयॉर्क–प्रेस्बिटेरियन और ब्रॉन्क्स स्थित मॉन्टेफियोर मेडिकल सेंटर के अस्पताल भी इससे प्रभावित हैं। न्यूयॉर्क स्टेट नर्सेज एसोसिएशन के अनुसार, लगभग 15,000 नर्स हड़ताल में शामिल हैं।
यह हड़ताल अस्पतालों को मरीजों को स्थानांतरित करने, प्रक्रियाओं को रद्द करने या एम्बुलेंस को दूसरे मार्ग पर भेजने के लिए मजबूर कर सकती है। इससे उन शहरी अस्पतालों पर भी दबाव पड़ सकता है, जो अनुबंध विवाद में शामिल नहीं हैं, क्योंकि मरीज हड़ताल से प्रभावित चिकित्सा केंद्रों में जाने से बचेंगे। यह हड़ताल फ्लू के गंभीर मौसम के दौरान हो रही है।
हड़ताल के दौरान कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए संबंधित अस्पतालों ने अस्थायी नर्सों को काम पर रखा है और बातचीत के दौरान एक बयान में कहा है कि वे "बाधाओं को कम करने के लिए जो भी आवश्यक होगा, वह करेंगे।"
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ईरान में सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन को चुनौती देने वाले राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद सोमवार को सरकार के समर्थन में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया।
ईरानी सरकारी टेलीविजन ने राजधानी तेहरान के एंघेलाब चौक की ओर जा रहे सरकार समर्थक प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें दिखाईं। इस चौक को ‘इस्लामिक क्रांति’ चौक के नाम से भी जाना जाता है।
सरकारी टेलीविजन ने सरकार के समर्थन में प्रदर्शन को ‘‘अमेरिकी-यहूदी आतंकवाद के खिलाफ ईरानियों का विद्रोह’’ करार दिया।
देश की खराब अर्थव्यवस्था को लेकर लोगों में व्याप्त आक्रोश विरोध प्रदर्शनों में तब्दील हो गया था।
सरकारी टेलीविजन ने देश भर में ऐसे प्रदर्शनों की तस्वीरें प्रसारित कीं, जिससे यह संकेत देने की कोशिश की गई कि देश ने विरोध प्रदर्शनों पर काबू पा लिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दिन में पहले ऐसा ही दावा किया था।
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ईरान में तनावपूर्ण हालात के बीच बीते 15 दिनों से लोग सड़कों पर बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी को लेकर खामेनेई सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन सबके बीच ईरानी राजदूत ने फेक न्यूज फैलाने की आलोचना की है। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विरोध प्रदर्शन के दौरान छह भारतीयों और 10 अफगानिस्तानियों की गिरफ्तारी की खबरों को सिरे से खारिज किया है।
मोहम्मद थहाली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर खबर को झूठा बताते हुए लिखा, "ईरान के डेवलपमेंट के बारे में कुछ विदेशी एक्स अकाउंट पर जो खबर चल रही है, वह पूरी तरह से झूठी है। मैं सभी दिलचस्पी रखने वाले लोगों से रिक्वेस्ट करता हूं कि वे अपनी खबरें भरोसेमंद सोर्स से लें।"
ईरानी राजदूत ने जिस एक्स अकाउंट की खबर को टैग कर फेक न्यूज बताया है, वह पाकिस्तान का है। वैसे पाकिस्तान झूठी खबरों का पोषक है ये कहना गलत नहीं होगा। इससे पहले रूस ने भी झूठी खबर फैलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी आलोचना की है।
हाल ही में भारत ने फेक न्यूज फैलाने के लिए पाकिस्तानी आउटलेट एशियावन को ब्लॉक किया है।
ईरान में दो हफ्ते से ज्यादा समय से लोगों का प्रदर्शन जारी है। खामेनेई सरकार के खिलाफ जनता सड़कों पर उतरी हुई है। 84 घंटे से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी ईरान में इंटरनेट सेवा बंद है और लोग फोन पर भी एक-दूसरे से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।
इस बीच अमेरिकी मीडिया ने दावा किया है कि ईरान में विरोध प्रदर्शन के दौरान अब तक 544 लोग मारे जा चुके हैं। वहीं गिरफ्तार होने वाले लोगों का आंकड़ा 10 हजार के पार जा चुका है।
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