
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान पर हमले की धमकी दी। यह अब भी स्पष्ट नहीं है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने के बारे में ट्रंप क्या निर्णय लेंगे, क्योंकि उन्होंने दो स्पष्ट लक्ष्मण रेखाएं निर्धारित की हैं- एक, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या और दूसरी, हिरासत में लिये गए लोगों को बड़े पैमाने पर फांसी दिए जाने की आशंका।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बुधवार को बताया कि ईरान में प्रदर्शनकारियों पर की गई हिंसक कार्रवाई में कम से कम 6,221 लोग मारे गए हैं तथा कई और लोगों के मारे जाने की आशंका है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, ‘‘उम्मीद है कि ईरान जल्द ही बातचीत के लिए आगे आएगा और एक निष्पक्ष एवं न्यायसंगत समझौता करेगा, एक ऐसा समझौता जो सभी पक्षों के लिए अच्छा हो।’’
उन्होंने कहा, ‘‘समय तेजी से बीत रहा है और यह वाकई बेहद महत्वपूर्ण है।’’ ईरान पर जून में हुए हमलों का जिक्र करते हुए ट्रंप ने लिखा, ‘‘अगला हमला इससे कहीं ज्यादा खतरनाक होगा।"
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ईरान में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू होने के लगभग एक महीने बाद बुधवार को तेहरान के अधिकारियों ने देश पर अमेरिकी हमले के खतरे को लेकर पश्चिमी एशिया के कई देशों से संपर्क साधा।
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने संकेत दिया है कि वे अपने हवाई क्षेत्र को किसी भी हमले के लिए इस्तेमाल नहीं होने देंगे।
हालांकि, अमेरिका ने विमान वाहक युद्धपोत ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ और कई निर्देशित मिसाइल विध्वंसक जहाजों को इस क्षेत्र में तैनात किया है, जिनका उपयोग समुद्र से हमले शुरू करने के लिए किया जा सकता है।
मिस्र के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसके शीर्ष राजनयिक बदर अब्देलट्टी ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और पश्चिमी एशिया के लिए अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ से अलग-अलग बातचीत की ताकि ‘‘क्षेत्र को अस्थिरता के नए दौर में जाने से बचाने के लिए शांति स्थापित करने की दिशा में काम किया जा सके।’’
इस बीच, सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से फोन पर बात की और कहा कि सऊदी अरब ‘‘ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई या किसी भी पक्ष द्वारा किए गए किसी भी हमले के लिए अपने हवाई क्षेत्र या भूभाग का उपयोग नहीं होने देगा।’’
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भी ईरान को इसी तरह का भरोसा दिलाया है। वहीं, ईरान में सख्त दमन के बाद प्रदर्शन कई सप्ताह से थम गए हैं, लेकिन वहां से स्टारलिंक सैटेलाइट डिश के माध्यम से धीरे-धीरे जानकारी कार्यकर्ताओं तक पहुंच रही है, जो हत्याओं और प्रभावितों की संख्या गिनने की कोशिश कर रहे हैं।
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उत्तर-पश्चिमी नेपाल के विभिन्न हिस्सों में हुए भारी हिमपात से कई इलाकों में दो-दो फुट तक बर्फ जम गई और कुछ स्थानों पर सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं।
एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि मंगलवार रात हुई बर्फबारी से पहाड़ियां और पर्वत बर्फ से ढक गए, जबकि अधिकांश स्थानों पर बारिश भी हुई। भारी हिमपात के कारण कागबेनी-कोराला मार्ग अवरुद्ध हो गया है।
घोरापझोंग ग्रामीण नगरपालिका के कृषि अनुभाग के प्रमुख रोशन ठाकाली के अनुसार, कुछ जगहों पर दो-दो फुट तक बर्फ जमा हो गयी है। इसी तरह करनाली प्रांत के हुम्ला, मुगु, डोल्पा, जुमला और कालीकोट जिले में भी हिमपात हुआ।
जिला पुलिस कार्यालय के प्रमुख शंकर खड़का के अनुसार, एक फुट तक जमा बर्फ के कारण लिमी, न्यालू, यारी और हिल्सा क्षेत्रों में सड़क अवरुद्ध हो गयी। अधिकारियों के अनुसार, इसी तरह सुदूर पश्चिम प्रांत के बैतादी और बाजुरा जिलों के विभिन्न हिस्से भी भारी हिमपात की चपेट में हैं।
जिले के कृषि ज्ञान केंद्र के एक अधिकारी के अनुसार, प्रतिकूल मौसम की स्थिति से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, हालांकि यहां की आलू, सेब, कुट्टू और जौ जैसी शीतकालीन फसलों के लिए हिमपात अच्छा माना जाता है।
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विशेषज्ञों ने भारत के खिलाफ पाकिस्तान से जुड़े और भी खतरनाक साइबर हमलों का खुलासा किया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान से संचालित एक थ्रेट एक्टर ने भारतीय सरकारी संस्थानों को निशाना बनाते हुए दो बड़े साइबर अभियान चलाए, जिनमें अब तक दर्ज न किए गए नए और उन्नत तरीकों का इस्तेमाल किया गया।
साइबर सुरक्षा फर्म ज़स्केलर थ्रेटलैब्स ने इन अभियानों की पहचान सितंबर 2025 में की थी। साइबर सुरक्षा से जुड़ी प्रमुख न्यूज वेबसाइट ‘द हैकर न्यूज’ ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि इन अभियानों को ‘गोफर स्ट्राइक’ और ‘शीट अटैक’ नाम दिया गया है।
शोधकर्ताओं सुदीप सिंह और यिन होंग चांग के अनुसार, “हालांकि इन अभियानों में पाकिस्तान से जुड़े एडवांस्ड पर्सिस्टेंट थ्रेट (एपीटी) ग्रुप एपीटी36 से मिलती-जुलती कुछ गतिविधियां दिखती हैं, लेकिन मध्यम स्तर के भरोसे के साथ यह आकलन किया गया है कि यह गतिविधि किसी नए उपसमूह या समानांतर रूप से काम कर रहे किसी अन्य पाकिस्तान-समर्थित समूह से जुड़ी हो सकती है।”
रिपोर्ट में बताया गया कि शीट अटैक का नाम इसलिए रखा गया क्योंकि इसमें गूगल शीट, फायरबेस और ईमेल जैसी वैध सेवाओं का इस्तेमाल कमांड एंड कंट्रोल (सी2) के लिए किया गया।
वहीं, गोफर स्ट्राइक अभियान में फिशिंग ईमेल के जरिए हमले किए गए। इसके तहत पीड़ितों को ऐसे पीडीएफ दस्तावेज भेजे गए, जिनमें धुंधली तस्वीर होती है और ऊपर से एक साधारण-सा पॉप-अप दिखाई देता है, जो उपयोगकर्ता को एडोब एक्रोबैट रीडर डीसी का अपडेट डाउनलोड करने के लिए कहता है।
‘द हैकर न्यूज’ के अनुसार, उपयोगकर्ताओं से दस्तावेज देखने के लिए “आवश्यक अपडेट” इंस्टॉल करने को कहा जाता है। जैसे ही यूजर फर्जी “डाउनलोड और इंस्टॉल” बटन पर क्लिक करता है, एक आईएसओ इमेज फाइल डाउनलोड हो जाती है, लेकिन यह केवल तभी होता है जब अनुरोध भारत स्थित आईपी एड्रेस से आए और विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम का यूज़र-एजेंट हो।
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