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उत्तराखंड की बेटी ने CM धामी के सामने खोल दी भ्रष्टाचार की पोल! कांग्रेस बोली- युवाओं के सपनों को रौंद रही है BJP

कांग्रेस ने लिखा है कि उत्तराखंड में एक बहादुर बेटी ने CM पुष्कर सिंह धामी के सामने खड़े होकर BJP सरकार के भ्रष्टाचार की पोल खोल दी। बच्ची ने बताया मैंने ताईक्वांडो में नेशनल लेवल पर गोल्ड मेडल जीता था, लेकिन मैं इंटरनेशनल खेलने नहीं जा सकी, क्योंकि मुझसे 1.5 लाख रुपए की घूस मांगी गई।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने एक छात्र संवाद कार्यक्रम में नेशनल ताइक्वांडो गोल्ड मेडलिस्ट छात्रा ने घुसखोरी का मुद्दा उठाया है, जिसके बाॉद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर गरमा गया है। कांग्रेस और सोशल मीडिया यूज़र्स इस घटना को लेकर सरकार पर भ्रष्टाचार को दबाने और युवाओं के सपनों को कुचलने का आरोप लगा रहे हैं।

कांग्रेस ने लिखा है कि उत्तराखंड में एक बहादुर बेटी ने CM पुष्कर सिंह धामी के सामने खड़े होकर BJP सरकार के भ्रष्टाचार की पोल खोल दी। बच्ची ने बताया मैंने ताईक्वांडो में नेशनल लेवल पर गोल्ड मेडल जीता था, लेकिन मैं इंटरनेशनल खेलने नहीं जा सकी, क्योंकि मुझसे 1.5 लाख रुपए की घूस मांगी गई। CM धामी ने ये सुनते ही बच्ची से कहा- "अच्छा, बैठ जाओ.. कोई बात नहीं" इसके बाद इस कार्यक्रम का लाइव सरकार के हर प्लेटफॉर्म से डिलीट कर दिया गया, इसमें CM और BJP का सोशल मीडिया शामिल है। BJP सरकार में घूसखोरी और घपलेबाजी युवाओं के सपनों को रौंद रही है। और शिकायत करने पर खुद मुख्यमंत्री इस भ्रष्टाचार को दबाने में लगे हैं। शर्म आनी चाहिए!

चलिए बताते हैं आपको पूरा मामला...देहरादून में आयोजित 'मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन' कार्यक्रम के दौरान 12वीं की एक छात्रा (ताइक्वांडो खिलाड़ी) ने खड़े होकर मुख्यमंत्री के सामने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। उसने कहा कि सर, मैंने जम्मू में आयोजित नेशनल ताइक्वांडो में गोल्ड मेडल जीता था और मेरा चयन इंटरनेशनल प्रतियोगिता के लिए हुआ था, लेकिन मुझसे इसके लिए ₹1.5 लाख मांगे गए, जिसके कारण मैं खेलने नहीं जा सकी।

छात्रा की बात सुनकर हॉल में सन्नाटा पसर गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के अनुसार, मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अच्छा... चलो चलो बेटा अभी बैठ जाओ, बैठ जाओ कोई बात नहीं। विपक्ष का आरोप है कि सीएम ने मामले की गंभीरता को समझने या जांच का तुरंत भरोसा देने के बजाय छात्रा को चुप कराकर बैठा दिया।