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हम हैं कामयाब-6: आशिक की मेहनत रंग लाई, आर्थिक समस्या में फंसे लोगों का मार्गदर्शक बना ‘एआई फाइनेंशियल सर्विसेज’

आशिक इमाम बताते हैं कि आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे हजारों लोगों की मुश्किलें वह आसान कर चुके हैं और यह सिर्फ बिजनेस नहीं है, बल्कि सेवा का भाव भी है।

‘एआई फाइनेंशियल सर्विसेज’ के संस्थापक मोहम्मद आशिक इमाम
‘एआई फाइनेंशियल सर्विसेज’ के संस्थापक मोहम्मद आशिक इमाम 

बड़े शहरों में जब हम अपने आस-पास देखते हैं तो कई ऐसी सच्ची कहानियां मिल जाती हैं, जो प्रेरक और प्रशंसा योग्य होती हैं। हमें कई ऐसी हस्तियों का पता चलता है जिन्होंने छोटे और पिछड़े इलाकों में अपनी आंखें खोलीं और फिर अपनी कड़ी मेहनत व संघर्ष से बड़े शहरों में एक अलग पहचान बनाने में सफल हुए। लेकिन ऐसे लोग बहुत कम हैं जो ‘व्यक्तिगत सफलता’ से ऊपर उठकर एक बड़े वर्ग के लिए काम करते हुए रोज़गार पैदा करते हैं। आज हम ऐसे ही एक व्यक्ति की कड़ी मेहनत और संघर्ष से परिचित होंगे। इस व्यक्ति का नाम है मोहम्मद आशिक इमाम, जिन्होंने आर्थिक समस्याओं में फंसे लोगों की मदद के लिए एक संस्था बनायी। संस्था का नाम है ‘एआई फाइनेंशियल सर्विसेज’। यहां ‘एआई’ का अर्थ ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ नहीं है, बल्कि यह ‘आशिक इमाम’ का संक्षेप है।

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35 वर्ष के आशिक इमाम की मेहनत और संघर्ष को जानने से पहले हम उनकी कंपनी ‘एआई फाइनेंशियल सर्विसेज’ के बारे में जान लेते हैं। इसका कार्यालय नोएडा (सी ब्लॉक, सेक्टर 2) में मौजूद है जो दिल्ली-एनसीआर का मशहूर इलाका है। यहां कई बड़ी व छोटी कंपनियों के कार्यालय मौजूद हैं। 2024 में रजिस्टर्ड हुई यह कंपनी लाइफ इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस, होम लोन, प्रॉपर्टी लोन, गोल्ड लोन, कैश बैक क्रेडिट कार्ड्स, रिवार्ड क्रेडिट कार्ड्स, फ्यूल क्रेडिट कार्ड्स, शॉपिंग कार्ड्स जैसी दर्जनों सेवाओं के बारे में लोगों को बताती है और उनकी जरूरतों को सामने रखते हुए उचित मार्गदर्शन करती है। यह सभी प्लान अग्रणी बैंकों से जुड़े होते हैं, लेकिन आम नागरिकों को इनके बारे में पूरी जानकारी नहीं होती।

दरअसल किसी के लिए भी यह समझना बहुत जरूरी होता है कि अगर उन्हें हेल्थ इंश्योरेंस कराना है तो उनकी आर्थिक स्थिति के मुताबिक कौन सा प्लान उचित है। इसी तरह घर बनाने के लिए कर्ज लेना है तो किस बैंक से और कितनी रकम ली जाए कि कर्ज भी आसानी से चुकाया जा सके और जीवन-यापन भी कठिन न हो।

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आशिक इमाम बताते हैं कि आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे हजारों लोगों की मुश्किलें वह आसान कर चुके हैं और यह सिर्फ बिजनेस नहीं है, बल्कि सेवा का भाव भी है। उन्होंने एक परेशान व्यक्ति की कहानी भी बयान की, जो ‘एआई फाइनेंशियल सर्विसेज’ के मार्गदर्शन से अब सुखी जीवन बिता रहा है। वह कहते हैं कि “एक व्यक्ति ने मुझे फोन किया। उसके पास एक स्थिर नौकरी थी, लेकिन वह कई तरह की ईएमआई, व्यक्तिगत देनदारी, क्रेडिट कार्ड्स और अन्य जरूरतों के कारण भारी दबाव में था। उसके वेतन का लगभग 60-70 प्रतिशत ईएमआई में खर्च हो रहा था। वह अपनी प्रतिदिन की आवश्यकताएँ पूरी करने में कठिनाइयों का सामना कर रहा था और उसे कोई बचत भी नहीं हो रही थी।“ वह आगे बताते हैं कि “जब उसने मुझसे संपर्क किया तो बहुत परेशान था और उसने पूछा—क्या मैं इस स्थिति से बाहर निकल सकता हूं? पहले हमने उसकी पूरी आर्थिक स्थिति को समझा। उसकी आय, खर्च और जरूरतों के बारे में जानकारी प्राप्त की। हमने जल्दबाजी में कुछ भी बेचने की कोशिश नहीं की, बल्कि हमने उसे कदम दर कदम मार्गदर्शन प्रदान किया। हमने उसे बताया कि वह अपने कर्जों को एक संगठित ईएमआई में एकजुट करे, और फिर बेहतर वित्तीय योजना के बारे में सलाह दी।

कुछ महीनों बाद उसका ईएमआई बोझ कम हो गया, उसका नकदी प्रवाह बेहतर हो गया और उसे बचत भी होने लगी।” बाद में उस शख्स ने आशिक इमाम से कहा “अब मैं खुद को शांत और अपने भविष्य के बारे में आत्मविश्वासी महसूस करता हूं।” ये शब्द आशिक इमाम के लिए बेहद भावुक थे। वह बताते हैं “उस व्यक्ति की बात सुनकर मुझे यकीन हो गया कि हम सिर्फ कारोबार नहीं कर रहे, बल्कि लोगों की परेशानी कम करने और उनका जीवन बेहतर बनाने में मदद कर रहे हैं।”

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अब थोड़ा मोहम्मद आशिक इमाम के बारे में जान लेते हैं। उनका संबंध बिहार के मऊ क़ाज़ी मोहल्ला से है। बिहार के समस्तीपुर जिला का यह इलाका आज भी बुनियादी सुविधाओं से दूर है। कुछ साल पहले तक यहां लोग सवारी के लिए घोड़ा गाड़ी का इस्तेमाल करते थे और बिजली का आना-जाना तो आज भी आम बात है। इस गांव में उच्च शिक्षा की सुविधा भी नहीं है, जिसकी वजह से बच्चों की बड़ी संख्या हाई स्कूल के बाद ही पढ़ाई छोड़कर खेती, पारिवारिक व्यवसाय या जीविका के लिए मजदूरी आदि में लग जाती है। लेकिन आशिक इमाम ने बचपन में ही इस इलाके से निकलकर अपनी अलग पहचान बनाने का निश्चय कर लिया था। वह जानते थे कि पिंजरे में रहकर उड़ान भरना संभव नहीं है, इसलिए विद्यापति नगर स्थित ‘विद्यापति हाई स्कूल’ से 2007 में दसवीं पूरी करने के बाद दलसिंहसराय के ‘आर.बी. कॉलेज’ से बारहवीं की परीक्षा पास की, और फिर बिहार को अलविदा कह दिया।

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ग्रेजुएशन के लिए आशिक इमाम ने हरियाणा का रुख किया जो कि मुश्किल भरा फैसला था। यहां से उनका असली संघर्ष शुरू हुआ, क्योंकि घर में रहकर मेहनत करने में और बाहर निकलकर मेहनत करने में बहुत फर्क होता है। उन्हें यह फैसला करने में बहुत कठिनाई हुई कि ग्रेजुएशन का विषय क्या रखा जाए। आधुनिक तकनीक में दिलचस्पी के कारण आशिक इमाम ने हरियाणा स्थित ‘एमडीयू रोहतक’ से बीटेक (मैकेनिकल) करने का फैसला किया ताकि इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकें।

हालांकि ग्रामीण इलाकों में लोगों की गरीबी और उनके आर्थिक हालात देखकर कुछ अलग करने का इरादा भी था, लेकिन कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था। एमडीयू रोहतक में नियमित कक्षाएं करते समय उनकी मुलाकात कई ऐसे लोगों से हुई जो आधुनिक तकनीक के साथ-साथ अर्थव्यवस्था की गहरी समझ भी रखते थे। कुछ दोस्तों से गंभीर चर्चाएं हुईं, और फिर 2015 में बीटेक पूरा करने के बाद उन्होंने मशीनों, मैन्युफैक्चरिंग व डिजाइन से जुड़े उद्योगों में भाग्य आज़माने के बजाय बैंकिंग सेक्टर को समझने का इरादा किया। दिमाग में यही चल रहा था कि आर्थिक समझ से वंचित गांव के लोगों का अगर मार्गदर्शन किया जाए तो उनके लिए कर्ज और ईएमआई चुकाना आसान हो सकतय है। शहरों में भी मध्यम वर्ग को आर्थिक व स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, ऐसे में उन्हें मेडिकल इंश्योरेंस, प्रॉपर्टी लोन, क्रेडिट कार्ड्स के महत्व के साथ-साथ अन्य सुविधाओं की जानकारी देकर जिंदगी आसान बनाई जा सकती है।

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2017 की बात है जब आशिक इमाम ने ‘पैसा बाज़ार मार्केटिंग एंड कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड’ में नौकरी की। मकसद था बाजार को समझना और मार्केटिंग की बारीकियों से परिचित होना। अगले 4-5 वर्षों तक तीन-चार अलग-अलग कंपनियों में काम करके कई तरह के अनुभव प्राप्त किए, और फिर व्यक्तिगत रूप से वित्तीय सेवाएं देना शुरू कर दिया। आशिक इमाम ने बताया कि “कंपनी शुरू करना बहुत मुश्किल भरा फैसला था। पहले मैंने दलसिंहसराय में एक कार्यालय की व्यवस्था की और एक दर्जन कर्मचारियों को रखकर उन्हें फाइनेंशियल सर्विसेज की ट्रेनिंग दी। इरादा था कि पहले अपने गांव के लोगों की मदद की जाए, जिन्हें मैंने हमेशा कर्ज में डूबा देखा है। उनका जीवन बेहतर बनाने की कोशिशें शुरू हुईं, लेकिन इलाके का माहौल और कर्मचारियों का स्वभाव रास्ते का रोड़ा साबित हुआ। परिणाम यह हुआ कि एक साल में ही कार्यालय बंद करना पड़ा।” इस नाकामी ने आशिक इमाम को एक बड़ा झटका दिया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वह समझ गए कि गांव में छोटे स्तर से फाइनेंशियल सर्विसेज शुरू करना गलत फैसला था। इसलिए राजधानी दिल्ली का रुख किया और एनसीआर स्थित नोएडा में किराए पर एक जगह लेकर ‘एआई फाइनेंशियल सर्विसेज’ की नींव रखी। इसके बारे में वह कहते हैं कि “मैंने लगभग 2 साल पहले इस कंपनी की शुरुआत इस विजन के साथ की कि लोगों को आसान, भरोसेमंद और ईमानदार तरीके से वित्तीय समस्याओं के समाधान प्रदान किए जाएं। हमारा प्रयास यह होतय है कि हम ग्राहकों की आवश्यकताओं को समझें और उन्हें उचित फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स/प्लान के बारे में सही मार्गदर्शन दें।”

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अपने संघर्ष और कंपनी के शुरुआती दिनों को आशिक इमाम कभी नहीं भूल सकते। वह कहते हैं कि “शुरुआत में चीजें आसान नहीं थीं। मैंने सीमित संसाधनों के साथ शून्य से शुरुआत की। मेरा बैकग्राउंड सेल्स में था, जिसने मुझे ग्राहकों के व्यवहार और बाजार की जरूरतों को समझने में मदद दी। शुरुआत में मुझे खुद ही ग्राहकों तक पहुंचना पड़ता था, अपनी सेवाओं के बारे में बताना होता था और भरोसा बनाना पड़ता था। कई ऐसे दिन देखने पड़े जब कोई कारोबार नहीं हुआ, लेकिन मैं दृढ़ संकल्पित रहा।” वह यह भी बताते हैं कि हर स्टार्टअप की तरह उन्हें भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सही टीम का चयन मुश्किल था और ऑपरेशंस को संभालना भी आसान नहीं था। उतार-चढ़ाव आते रहे, कभी कारोबार धीमा हो जाता था और कभी ग्राहकों को संतुष्ट नहीं कर पाते थे। हर चुनौती उनके लिए सीखने का अवसर बन गया। धीरे-धीरे हालात बेहतर होने लगे। ईमानदारी और लगन ने ग्राहकों के साथ मजबूत भरोसा स्थापित करने में मदद की। अब हालात ऐसे हैं कि कंपनी के लोग ग्राहकों तक नहीं जाते बल्कि ग्राहक खुद अपनी जरूरतों के साथ कंपनी से संपर्क करते हैं। कंपनी उन्हें सही मार्गदर्शन के साथ उचित संभव समाधान प्रदान करती है। दिलचस्प बात यह है कि ‘एआई फाइनेंशियल सर्विसेज’ अब गरीब व मध्यम वर्ग के साथ-साथ अमीर वर्ग को भी वित्तीय सलाह दे रही है। आशिक इमाम अपने अनुभव के आधार पर बताते हैं कि गरीबों के मुकाबले अमीरों की जिंदगी वित्तीय जटिलताओं में ज्यादा उलझी हुई नजर आती है। कई ऐसे लोगों से उनका संपर्क हो चुका है जो 5 से 6 लाख रुपये मासिक कमाते हैं, फिर भी ईएमआई और कर्जों के कारण भारी मानसिक दबाव में जीवन गुजारते हैं। उन्हें पता ही नहीं होता कि पैसों का इस्तेमाल कैसे करना है। आशिक इमाम की कंपनी ऐसे लोगों को बेहतर मार्गदर्शन के साथ सुकून के पल देती है।

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बहरहाल, आशिक इमाम को जो नाकामी दलसिंहसराय में मिली थी, दिल्ली-एनसीआर ने उसे बहुत पीछे छोड़ दिया है। पहली नाकामी को देखकर उन्हें भरोसा नहीं था कि 2 सालों में सफलता की इतनी सीढ़ियां चढ़ जाएंगे। आज उनके पास लगभग 2 दर्जन कर्मचारियों पर आधारित एक मजबूत टीम है, जिसमें टीम लीडर्स और मैनेजर्स शामिल हैं। कंपनी अपने कर्मचारियों पर वेतन के रूप में मासिक लगभग 6 लाख रुपये खर्च करती है और इंसेंटिव के रूप में भी मासिक लगभग 3 लाख रुपये का भुगतान होता है। इस कंपनी ने सफलता की राह पर कदम रख दिया है और अब लगातार विकास की ओर अग्रसर है।

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