
पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को झटकों का सिलसिला जारी है, जिसमें गुरुवार को एक और बड़ा झटका लगा। पार्टी की राज्यसभा सदस्य और लोकप्रिय बंगाली अभिनेत्री रुक्मिणी मलिक (कोयल मलिक) ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के बाद कोयल मलिक ने बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव से मुलाकात की है, जिससे पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
कोयल मलिक ने गुरुवार को राज्यसभा के सभापति से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने अपने इस्तीफा पत्र में कहा, ‘‘मैं राज्यसभा की सदस्यता से अपना इस्तीफा देती हूं, जिसे कृपया तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं राज्यसभा की सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उपसभापति और राज्यसभा सचिवालय के सभी अधिकारियों द्वारा दिए गए सहयोग और मदद के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं।’’
कोयल मलिक ने 6 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी। उन्हें तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए नामित किया था, हालांकि अब उनके अचानक इस्तीफे को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के सत्ता से बाहर होने के बाद इस्तीफा देने वाली मलिक तृणमूल कांग्रेस की चौथी सांसद हैं। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक भी राज्यसभा से इस्तीफा दे चुके हैं।
अगर उनके पारिवारिक जीवन की बात करें तो वह बंगाली सिनेमा के दिग्गज अभिनेता रंजीत मलिक और दीपा मलिक की बेटी हैं। राजनीति में आने से पहले कोयल मलिक बंगाली फिल्म उद्योग का एक बेहद चर्चित और लोकप्रिय चेहरा रही हैं। उन्हें टॉलीवुड की 'टॉली-क्वीन' भी कहा जाता है। पिछले दो दशकों से वह बंगाली सिनेमा की सबसे सफल अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत साल 2003 में सुपरहिट फिल्म 'नेटर गुरु' से की थी।
इसके बाद 'बंधन' (2004), 'शुभदृष्टि' (2005), 'पागलू' (2011), 'हेमलॉक सोसाइटी' (2012) और 'मितिन माशी' थ्रिलर सीरीज (2019) जैसी कई सफल फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाकर दर्शकों के दिलों में खास पहचान बनाई। कोयल मलिक को अपने शानदार अभिनय के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुके हैं। उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड बांग्ला, दो बीएफजेए अवॉर्ड और साल 2023 में पश्चिम बंगाल सरकार का प्रतिष्ठित 'महानायक सम्मान' प्रदान किया गया था।
फिलहाल उनके इस फैसले ने टीएमसी की राजनीति और पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। इससे पहले भी लगातार टीएमसी में अंदरूनी कलह बढ़ती दिख रही है। 'असली टीएमसी' का मामला ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल गुट और रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के बीच पार्टी के नाम, सिंबल और राजनीतिक नियंत्रण को लेकर चल रहा एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक विवाद बना हुआ है।