एनआरसी पर लिखी कविता को लेकर 10 के खिलाफ एफआईआर- क्या आपको पता है इस कविता की प्रेरणा कहां से मिली!
असम में बोलने की आज़ादी पर लगाम लगाने का नया मामला सामने आया है। एनआरसी मुद्दे पर लिखी गई एक कविता को लेकर 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। हम आपके लिए असम में ‘मियां बोली’ में लिखी कविता के साथ ही, वह कविता भी पेश कर रहे हैं जिससे यह कविता प्रेरित है।
By नवजीवन डेस्क
नवंबर 2016 में दिल्ली हुए ‘मियां कविता’ के आयोजन की तस्वीर (फोटो सौजन्य : फर्स्टपोस्ट)
असम पुलिस ने एनआरसी विवाद पर कविता लिखने वाले 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इन 10 लोगं में से ज्यादातर बंगाली मूल के मुस्लिम कवि और कार्यकर्ता हैं। इन लोगों ने इस कविता को मियां बोली में लिखा है। मियां बोली असमिया और बंग्ला भाषा का मिश्रण है जिसक अपनी लिपि भी है। मियां बोली में लिखी इस कविता का अंग्रेजी अनुवाद वायरल हो रहा है। इसी कविता का हिंदी अनुवाद हम आपके सामने पेश कर रहे हैं।
लिखो
लिख डालो,
मैं एक मियां हूं...
NRC में मेरा सीरियल नंबर 200543 है
मेरे दो बच्चे हैं
अगली गर्मी तक एक और आ जाएगा,
क्या तुम उससे भी नफरत करोगे
जैसे मुझसे करते हो?
लिखो
मैं एक मियां हूं
तुम्हारे धान के खेतों में हूं
ताकि तुम्हारा पेट भर सके
मैं सिर पर ईंटे उठाता हूं
ताकि तुम्हारी इमारत बन सके
मैं तुम्हारी कार चलाता हूं
ताकि तुम्हें आराम मिले
मैं तुम्हारी नाली साफ करता हूं
ताकि तुम तंदुरुस्त रहो।
मैं तो हमेशा से
तुम्हारी सेवा करता रहा हूं
फिर भी तुम खुश नहीं हो !
लिखो
मैं एक मियां हूं
एक लोकतांत्रिक, सेक्युलर, गणतंत्र का
ऐसा नागरिक हूं
जिसके पास कोई अधिकार नहीं,
मेरी मां को डी वोटर बना दिया है तुमने,
जबकि उसके माता-पिता तो भारतीय हैं,
क्या तुम्हें चाहते हो
मुझे मार डालना,
मेरे अपने गांव से भगा देना,
मेरे खेतों को छीन लेना,
मेरे ऊपर रोलर चढ़ा देना,
तुम्हारी गोलियां चीर सकती हैं मेरी छाती
बिना किसी सजा के।
लिखो मैं एक मियां हूं
ब्रह्मपुत्र के किनारे बसा हूं
तुम्हारे जुल्म सह रहा हूं
काला पड़ गया है मेरा जिस्म
आग से लाल हो चुकी हैं मेरी आंखें।
खबरदार!
मेरे पास अब सिर्फ गुस्सा बचा है
दूर रहना
भस्म हो जाओगे तुम इसमें।
इसी कविता को लेकर मामला दर्ज किया गया है। इस सिलसिले में गुवाहाटी सेंट्रल के पुलिस उपायुक्त धर्मेंद्र कुमार दास ने कहा, ‘हां, आज एक एफआईआर दर्ज की गई है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। उन पर आईपीसी की धारा 420 और 406 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके साथ ही कॉपीराइट अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया है।’
खबरों के मुताबिक, गुवाहाटी के रहने वाले पत्रकार प्रणवजीत डोलोई ने 10 लोगों पर एनआरसी की प्रक्रिया में बाधा डालने, असमिया लोगों को दुनिया भर में ‘जेनोफोबिक’ यानी विदेशियों से नफरत करने वालों के रूप में बदनाम करने और सांप्रदायिक गड़बड़ी फैलाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है।
इसके अलावा कामरूप जिले में बीजेपी नेता तबीबुर रहमान ने भी केस दर्ज कराया है। उनकी शिकायत पर पुलिस ने आईटी ऐक्ट, 2000 की धारा सेक्शन 66 के तहत आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। हालांकि, मामले में किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
दरअसल पिछले दिनों एक टीवी चैनल पर एक कविता संग्रह का वीडियो दिखाया गया, जिसमें चार-चपोरी साहित्य परिषद के प्रमुख हाफिज अहमद की उपरोक्त कविता भी थी।
बताया जाता है कि जिस मियां कविता को लेकर विवाद है, वह दरअसल फिलिस्तीन के राष्ट्रीय कवि महमूद दरवेश की रचना पर आधारित है। हाफिज अहमद का कहना है कि यह कविता को 2016 में लिखी गई थी और इसका एनआरसी प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस कविता से किसी को एतराज़ है तो वे माफी मांगते हैं।
महमूद दरवेश की कविता हम आपके लिए नीचे लिख रहे हैं। यह मूल कविता का हिंदी अनुवाद है, जिसे अंग्रेजी से अनुदित किया गया है।
लिखो — मैं एक अरब हूँ कार्ड नम्बर — पचास हज़ार आठ बच्चों का बाप हूँ नौवाँ अगली गर्मियों में आएगा क्या तुम नाराज़ हो?
लिखो — एक अरब हूँ मैं पत्थर तोड़ता हूँ अपने साथी मज़दूरों के साथ
हाँ, मैं तोड़ता हूँ पत्थर अपने बच्चों को देने के लिए एक टुकड़ा रोटी और एक क़िताब
अपने आठ बच्चों के लिए मैं तुमसे भीख नहीं माँगता घिघियाता-रिरियाता नहीं तुम्हारे सामने तुम नाराज़ हो क्या?
लिखो — अरब हूँ मैं एक उपाधि-रहित एक नाम इस उन्मत्त विश्व में अटल हूँ
मेरी जड़ें गहरी हैं युगों के पार समय के पार तक मैं धरती का पुत्र हूँ विनीत किसानों में से एक
सरकण्डे और मिट्टी के बने झोंपड़े में रहता हूँ बाल — काले हैं आँखे — भूरी मेरी अरबी पगड़ी जिसमें हाथ डालकर खुजलाता हूँ पसन्द करता हूँ सिर पर लगाना चूल्लू भर तेल
इन सब बातों के ऊपर कृपा करके यह भी लिखो — मैं किसी से घृणा नहीं करता लूटता नहीं किसी को लेकिन जब भूखा होता हूँ मैं खाना चाहता हूँ गोश्त अपने लुटेरों का
सावधान सावधान मेरी भूख से सावधान मेरे क्रोध से सावधान
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