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दिल्ली हिंसा के लिए बीजेपी पर खुलकर बरस रहे हैं बादल, पीएम मोदी को दी राजधर्म निभाने की नसीहत

प्रकाश सिंह बादल सहित शिरोमणि अकाली दल के अन्य नेताओं के ताजा रुख से बीजेपी नेताओं की पेशानी पर बल हैं। शिरोमणि अकाली दल के कई नेता दिल्ली दंगों के बाद खुलकर कहने लगे हैं कि अब अकाली दल को बीजेपी से अलग हो जाना चाहिए यानी गठबंधन तोड़ लेना चाहिए।

फोटोः @Akali_Dal_
फोटोः @Akali_Dal_ 

सिख राजनीति के 'चाणक्य' प्रकाश सिंह बादल अब भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मुखर होकर बोल रहे हैं। रविवार और सोमवार को बादल ने बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार को फिर नसीहत दी और खुलकर कहा कि मोदी सरकार के लिए अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतना बेहद जरूरी है। बादल ने दो टूक कहा कि धर्मनिरपेक्षता और सर्वनिरपेक्षता ही भारत की ताकत रही है। उन्होंने दिल्ली दंगों पर एक बार फिर सवाल उठाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नसीहत दी कि उन्हें 'राज्यधर्म' निभाना ही चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने यह भी कहा कि आज देश जिन हालात से गुजर रहा है, वे बेहद नासाज हैं।

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गौरतलब है कि प्रकाश सिंह बादल और शिरोमणि अकाली दल बीते 5 दिन से दिल्ली दंगों के साथ-साथ सीएए के मसले पर भी केंद्र सरकार को लगातार घेर रहे हैं। अब भारतीय जनता पार्टी की पंजाब इकाई, शिरोमणि अकाली दल की रैलियों और उसके नेताओं की बयानबाजी से स्पष्ट दूरी बनाकर चल रही है। इसके संकेत साफ हैं।

प्रकाश सिंह बादल सहित शिरोमणि अकाली दल के अन्य नेताओं के ताजा रुख से पंजाब बीजेपी नेताओं की पेशानी पर बल हैं। शिरोमणि अकाली दल के कतिपय नेता दिल्ली दंगों के बाद खुलकर कह रहे हैं कि अब अकाली दल को बीजेपी से अलग हो जाना चाहिए यानी गठबंधन तोड़ लेना चाहिए।

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हालांकि, खास बात ये है कि प्रकाश सिंह बादल की अगुवाई में इन दिनों शिरोमणि अकाली दल जितनी भी रैलियां कर रहा है, उनमें दिल्ली दंगों की बात होती है और सीएए पर सवाल खड़े किए जाते हैं, लेकिन इन रैलियों में उनकी बहू हरसिमरत कौर बादल गायब रहती हैं। हरसिमरत कौर केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री हैं। उनके भाई बिक्रमजीत सिंह मजीठिया भी अकाली दल की रैलियों में नजर नहीं आ रहे।

हालांकि मजीठिया केंद्रीय एजेंसियों के निशाने पर जरूर हैं, लेकिन पंजाब में चौतरफा चर्चा है कि दोनों भाई-बहन को सिख सियासत के चाणक्य प्रकाश सिंह बादल ने सोच-समझ कर शिरोमणि अकाली दल की आम रैलियों से दूर रहने की हिदायत दी है। संभवत केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने के कारण प्रोटोकॉल के चलते भी हरसिमरत कौर बादल केंद्र सरकार के खिलाफ होने वाली रैलियों से दूर हों, लेकिन उनकी इस भूमिका से चर्चा जरूर छिड़ गई है।

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उधर, कांग्रेस ने साफ शब्दों में कहा है कि बादल भारतीय जनता पार्टी पर बरसने की बजाय हरसिमरत कौर बादल का इस्तीफा दिलाएं। पंजाब सरकार के मंत्रियों सुखजिंदर सिंह रंधावा, गुरप्रीत सिंह कांगड़ और भारत भूषण आशू ने प्रकाश सिंह बादल को दिल्ली हिंसा पर मोदी सरकार पर बरसने की बजाए कोई ठोस कदम उठाने के लिए कहा है।

इन मंत्रियों का साफ कहना है कि अगर बड़े बादल सचमुच अल्पसंख्यकों के प्रति चिंतित हैं तो पहले सत्ता का आनंद ले रही अपनी बहू हरसिमरत कौर बादल से इस्तीफा दिलाएं और गठबंधन तोड़ें। उन्होंने कहा कि महज बयानबाजी करके मगरमच्छ के आंसू बहाने की बजाए हरसिमरत कौर बादल का इस्तीफा यकीनी बनाया जाए और दिल्ली दंगों के मामले में शिरोमणि अकाली दल भी बीजेपी के बराबर गुनाहगार है।

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