
जयराम रमेश ने चीन के साथ सीमा पर तनाव और बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा।
ITBP प्रमुख शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर आमना-सामना होने और स्थिति जारी रहने की बात कही।
ITBP प्रमुख ने कहा कि अरुणाचल में शौर्य कमांडो टीमों ने असाधारण भूमिका निभाई।
कांग्रेस नेता ने चीन के साथ 2025-26 में व्यापार घाटा बढ़कर 112 अरब डॉलर से अधिक होने और भारतीय उद्योगों पर इसके असर का मुद्दा उठाया।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने चीन के साथ सीमा पर तनाव, अरुणाचल प्रदेश में गश्त से जुड़े दावों और बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि चीन के प्रति सरकार का रुख नरम है, जबकि सीमा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिए जा रहे हैं।
जयराम रमेश की पोस्ट ऐसे समय आई है, जब भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर कई जगहों पर आमना-सामना होने और स्थिति अब भी जारी रहने की बात कही है।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, ITBP महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने राजस्थान के अलवर में बल के वार्षिक सम्मान समारोह के दौरान अरुणाचल प्रदेश की स्थिति पर बात की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में राज्य में कई जगहों पर आमना-सामना हुआ और स्थिति अब भी जारी है।
कपूर ने ITBP की नवगठित शौर्य कमांडो टीमों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में असाधारण भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी कहा कि ITBP को 2004 में चीन सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी और बल को अपने मूल दायित्व पर ध्यान बनाए रखना चाहिए।
इससे पहले 6 सितंबर को अरुणाचल प्रदेश के वाचा-दमाई सीमा बैठक स्थल पर भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, इन बैठकों का उद्देश्य वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर क्षेत्र में जारी मुद्दों को सुलझाना था। भारतीय सैनिकों की बड़ी संख्या अब भी इलाके में तैनात है, ताकि तनाव और न बढ़े।
जयराम रमेश ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को भी राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा से जोड़ते हुए सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा करीब 112.16 अरब डॉलर रहा, जबकि 2024-25 में यह लगभग 99.21 अरब डॉलर था।
कांग्रेस नेता का आरोप है कि चीन से आयात पर बढ़ती निर्भरता का असर कई उद्योगों, खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) पर पड़ रहा है। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह ‘चीन से आयात’ में बदलता दिख रहा है। उन्होंने सरकार से पूछा कि चीन पर आर्थिक निर्भरता कम करने के लिए स्पष्ट रणनीति क्या है।
जयराम रमेश ने अपने बयान में लद्दाख में 2020 के सीमा विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के 19 जून 2020 के उस बयान को लेकर सवाल उठाए, जिसमें कहा गया था कि सीमा में कोई नहीं घुसा और न ही किसी ने भारतीय चौकियों पर कब्जा किया। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि देश अब भी उस बयान की कीमत चुका रहा है। उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के उस कथित खुलासे का भी उल्लेख किया, जिसके मुताबिक, लद्दाख में चीनी घुसपैठ के दौरान उन्हें निर्देश मिला था कि वह उचित समझकर कार्रवाई करें।
कांग्रेस महासचिव ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की ओर से स्थानों के नाम बदलने और ब्रह्मपुत्र नदी पर 60,000 मेगावाट की क्षमता वाला बांध बनाने की योजना पर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, इससे पूर्वोत्तर की जल सुरक्षा और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन की सैन्य सहायता की भूमिका पर भी सवाल उठाए। जराम रमेश ने 4 जुलाई 2025 को उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह के बयान और 25 अगस्त 2026 को पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान की टिप्पणी के बीच अंतर का मुद्दा उठाया।
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री से पूछा कि सीमा पर तनाव और चीन के साथ बढ़ती आर्थिक निर्भरता के बीच सरकार की नीति क्या है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में सिर्फ दावे नहीं, बल्कि स्पष्ट जवाब और ठोस रणनीति की जरूरत है।