
देश में कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन के ऐलान के बाद राशन और खाने-पीने की वस्तुओं की दुकानों पर भीड़ है और अफरातफरी का माहौल है। ये अकारण नहीं है। दरअसल लोग जरूरत की चीजों की पर्याप्त मात्रा जमा कर लेना चाहते हैं। लोगों का मानना है कि आज जो सामान मिल रहा है उसे ले लो, पता नहीं कल आए, ना आए। लोगों का ये डर गैरवाजिब नहीं है। क्योंकि कोरोना के इस संकट में कई देशों की सरकारों ने एक्सपोर्ट रोककर राशन जमा करना शुरू कर दिया है।
दरअसल कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन के हालात लगभग सभी देशों में हैं और ये कब खत्म होगा, कोई साफ तौर पर कुछ भी नहीं बता पा रहा है। ऐसे में लंबे समय तक अपने नागरिकों, खासकर गरीबों को राशन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई देशों की सरकारों ने निर्यात बंद कर दिया है और राशन जुटाने में लग गई हैं। गेहूं, गाजर, चीनी और आलू जैसी जरूरी खाद्य वस्तुओं के अग्रणी निर्यातक देश कजाखिस्तान ने निर्यात पर पूरी तरह से रोक लगा दिया है।
खबरों के मुताबिक इसी तरह एक अन्य देश सर्बिया ने भी सूरजमुखी के तेल और अन्य आव्श्यक वस्तुओं के निर्यात को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया है। वहीं एक और बड़ा देश रूस हालात की समीक्षा के लिए लगाता मीटिंग कर रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही रूस भी अपने यहां से निर्यात पर रोक लगा देगा। आर्थिक जानकार इस हालत को एक तरह का फूड नेशनलिज्म बता रहे हैं।
गौरतलब है कि बीती रात पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा देश भर में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा के बाद बड़ी संख्या में लोग राशन की दुकानों पर उमड़ पड़े और बड़े पैमाने पर जरूरी सामानों की खरीद कर जमा करने की होड़ में दिखे। हालांकि सरकार बार-बार दावा कर रही है कि ऐसा करना गलत है, देश में किसी भी चीज की आपूर्ति प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।
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