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बहुचर्चित कृष्णानंद राय हत्याकांड: मुख्तार अंसारी समेत सभी आरोपी बरी, करीब 500 राउंड फायरिंग कर हुई थी हत्या

बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के मामले में दिल्ली की विशेष सीबीईआई कोर्ट ने बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। 2005 में कृष्णानंद राय की हत्या हुई थी।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

बहुचर्चित बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड मामले में सीबीआई कोर्ट से बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी बरी हो गया है। विशेष सीबीईआई कोर्ट ने बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। गौरतलब है कि 2005 में कृष्णानंद राय की हुई हत्या के आरोप में बीएसपी विधायक मुख्तार अंसारी, मुन्ना बजरंगी समेत कई आरोपी थे। इनमें मुन्ना बजरंगी का भी नाम शामिल था, जिसकी बीते दिनों जेल में हत्या कर दी गई थी।

Published: 03 Jul 2019, 6:06 PM IST

गौरतलब है कि 29 नवम्बर 2005 को करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र गोडउर गांव निवासी बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय क्षेत्र के सोनाड़ी गांव में क्रिकेट मैच का उद्घाटन करने के बाद वापस अपने गांव लौट रहे थे। शाम करीब चार बजे बसनियां चट्टी पर उनके काफिले को घेरकर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी। इस हत्याकांड में एके-47 और कई ऑटोमैटिक हथियार का उपयोग किया गया था। एके 47 की गोलियों की बौछार से बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय समेत 7 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। बताया जाता है कि इस हमले के दौरान करीब 5 सौ से अधिक गोलियों का प्रयोग किया गया था।

Published: 03 Jul 2019, 6:06 PM IST

विधायक कृष्णानंद राय समेत सात लोगों की एक साथ हत्या से तब गाजीपुर ही नहीं बल्कि पूरे यूपी और बिहार में भी हड़कंप मच गया था। हत्याकांड के विरोध में लगभग एक हफ्ते तक गाजीपुर, बलिया, आजमगढ़, वाराणसी में आगजनी, तोड़फोड़ और आंदोलन चलते रहे थे।

Published: 03 Jul 2019, 6:06 PM IST

इस हत्याकांड के बाद बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी इस मामले की निष्पक्ष सुनवाई के लिए सीबीआई से जांच करवाई जाए। जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी।

Published: 03 Jul 2019, 6:06 PM IST

इसके बाद में अलका राय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर केस की सुनवाई उत्तर प्रदेश से बाहर ट्रांसफर करने की मांग की। अलका राय कि याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई उत्तर प्रदेश से दिल्ली में ट्रांसफर कर दी थी। लेकिन घटना के 14 साल बाद जब अदालत का फैसला आया तो अदालत ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

Published: 03 Jul 2019, 6:06 PM IST

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Published: 03 Jul 2019, 6:06 PM IST