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गोवा चुनाव: उम्मीदवारों के नाम फाइनल करने में बीजेपी के छूट रहे पसीने, पर्रिकर के पुत्र कर सकते हैं खेल खराब

गोवा विधानसभा के लिए 14 फरवरी को मतदान होना है, लेकिन अभी तक सत्तारूढ़ बीजेपी उम्मीदवारों के नाम फाइनल नहीं कर पाई है। कारण है कि पार्टी में हर सीट पर कई-कई दावेदार हैं और इनकी नाराजगी से पार्टी को बड़े पैमाने पर पलायन का सामना करना पड़ सकता है।

प्रतीकात्मक फोटो
प्रतीकात्मक फोटो 

गोवा विधानसभा के लिए मतदान 14 फरवरी को होना है लेकिन अभी तक बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों के नाम तय नहीं किए हैं। कारण साफ है कि गोवा में सत्तारूढ़ बीजेपी को ऐसे तमाम नेताओं से जूझना पड़ रहा है जो टिकट के दावेदार हैं, और अगर उन्हें टिकट नहीं मिला तो वे पाला बदल सकते हैं। इसीके चलते बीजेपी को हर सीट पर गुप्त मतदान के जरिए पता लगाने की कोशिश करनी पड़ रही है कि माहौल कैसा है।

दोबारा सत्ता में आने के सपने संजोए बीजेपी को जिन सवालों का सामना करना पड़ रहा है उनमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि पार्टी पुराने चेहरों को रिपीट करे या फिर नए चेहरों को मैदान में उतारे। यह समस्या खासतौर से उन सीटों पर है जहां से प्रमोद सावंत सरकार के कई विधायक और मंत्री मौजूदा विधायक तो हैं लेकिन कार्यकर्ता बदलाव चाहते हैं।

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अक्टूबर 2021 में बीजेपी ने सबसे पहले अपने प्रचार का शंख बजाते हुए सरकार तुमच्या दारी यानी सरकार तुम्हारे द्वार योजना शुरु की थी। इसका मकसद सरकारी सेवाओं को नागरिकों तक सीधे उनके घर पहुंचाना था। इस योजना के लिए सरकार ने अपने सोशल मीडिया अभियान में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी और इस दौरान अपने 5 साल की कथित उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर लोगों के सामने पेश किया। इनमें मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास के कामों को गिनाया गया था। लेकिन चुनावी पंडितों का कहना है कि बीजेपी घर-घर जाकर प्रचार शुरु नहीं कर पाई है और न ही सरकारी सेवाएं डोरस्टेप पर पहुंच रही है, इसके चलते उसके संभावित उम्मीदवार वोटरों से सीधा संवाद स्थापित कर ही नहीं पाए हैं।

माइकल लोबो के पार्टी छोड़ने के बाद जहां कलंगूट में बीजेपी को नया चेहरा तलाशने में मशक्कत करनी पड़ रही है, वहीं राजधानी पणजी में भी स्थिति ऐसी ही है। इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के पुत्र ने घर-घर प्रचार करना शुरु कर टिकट के लिए अपनी दावेदारी ठोक दी है , वहीं मौजूदा विधायक अटांसियो बाबुश मॉन्सिराते ने अपना प्रचार अभी तक शुरु ही नहीं किया है। उनका कहना है कि एक बार अधिकारिक तौर पर टिकट फाइनल हो जाए उसके बाद ही वे प्रचार शुरु करेंगे।

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पर्रिकर के पुत्र उत्पल पर्रिकर के इस बयान से हालात को समझा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा है कि, “मौजूदा राजनीति मुझे स्वीकार नहीं है। क्या जीतने की संभावना, वफादारी और चरित्र कोई मायने नहीं रखता? आप आपराधिक पृष्ठभूमि के एक नेता को उस सीट से मैदान में उतार रहे हैं जहां से मनोहर पर्रिकर चुनाव लड़ते रहे हैं?”

पर्रिकर जूनियर का मानना है कि ये सब बदलना पड़ेगा और वह बदलाव की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “जिन भी वरिष्ठ नेताओं ने मेरे पिता के साथ काम किया है, आज मेरे साथ हैं। मैं खुलेआम लोगों के बीच जा रहा हूं और वह सभी कार्यकर्ता मेरे साथ हैं जिन्होंने पार्टी को स्थापित किया है।” पर्रिकर के इस बयान से बीजेपी की स्थिति स्पष्ट तौर पर सामने आ जाती है।

गोवा चूंकि एक छोटा राज्य है इसलिए यहां के वर्तमान विधायकों का असर आसपास की सीटों पर भी पड़ता है। पणजी से सटे सांताक्रूज सीट पर टोनी फर्नांडिज बीजेपी विधायक हैं। लेकिन उन्हें अभी तक कोई संकेत नहीं मिला है कि पार्टी उन्हें फइर से मैदान में उतारेगी या नहीं। उन्होंने कहा, “जल्द ही पता चल जाएगा...”। हालांकि स्थानीय अखबारों ने खबर दी है कि मॉन्सेराते ने नजदीकी गांव तालीगाव के एंजेलो डी कुन्हा का इस सीट के लिए समर्थन किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक बीजेपी को बड़ी संख्या में ऐसे नेताओं का सामना करना पड़ रहा है जो टिकट की दावेदारी पेश कर रहे हैं।

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सावंत सरकार में पीडब्ल्यूडी ममंत्री दीपक पॉस्कर सैनवर्डम से टिकट के दावेदार हैं। इस सीट से बीजेपी के गणेश गांवकर विधायक थे लेकिन उन्होंने पार्टी छोड़ दी। सैंक्वेम में भी डिप्टी सीएम चंद्रकांत बाबू कावलेकर की पत्नी सावित्री टिकट की दावेदार हैं, जबकि 2017 में निर्दलीय के तौर पर सिर्फ एक हजार वोटों से हारने वाले बीजेपी के सुभाष फलदेसाई भी यहीं से टिकट चाहते हैं।

ऐसी ही स्थइति केनाकोना में भी है। कर्नाटक सीमा से लगी दक्षिण गोवा की इस सीट पर 2017 जैसे हालात हैं। बीजेपी के डिप्टी स्पीकर इसिडोर फर्नांडिज यहां से विधायक हैं। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था, लेकिन पाला बदल लिया था। यहां से बीजेपी की स्थानीय इकाई से पूर्व मंत्री रमेश तावडकर और विजय पाई खोट भी दावेदार हैं। तावडकर ने पार्टी छोड़ दी थी और निर्दलीय चुनाव लड़ा था और तीसरे नंबर पर रहे थे।

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बीजेपी के गोवा इंचार्ज सी टी रवि का कहना है कि, “हमने उम्मीदवारों के नाम शॉर्टलिस्ट कर अपनी सिफारिशें बीजेपी संसदीय बोर्ड को दे दिए हैं। इनमें से कुछ नामों पर जल्द ही फैसला हो जाएगा। इसके बाद और चर्चा करेंगे।”

इस बीच सत्तारूढ़ बीजेपी ने ऐलान किया है कि वह बेनॉलिम और नूवेम में अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी। ये दोनों सीटें ईसाई बहुल सालसेटे तालुका के तहत आती हैं।

वैसे उम्मीवारों के नाम पर अंतिम निर्णय लेने के लिए बीजेपी कोर कमेटी की लगभग रोज बैठकें हो रही हैं। इनमें महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणविस, पार्टी के गोवा अध्यक्ष सदानंद शेत तनावेडे, मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और अन्य सदस्य मौजूद रहते हैं।

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