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जीएसटी परिषद ने कर अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म की, केस चलाने की सीमा को बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए किया

अब रिफंड क्लेम को स्वीकार करने की अवधि को 15 दिनों से घटाकर 10 दिन कर दिया गया है। अगर इस समय-सीमा के अंदर न तो कोई रिफंड क्लेम स्वीकार होता है और न ही इसमें किसी कमी के बारे में सूचना जारी की जाती है, तो क्लेम को स्वीकार किया हुआ माना जाएगा।

जीएसटी परिषद ने कर अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म की, केस चलाने की सीमा को बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए किया
जीएसटी परिषद ने कर अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म की, केस चलाने की सीमा को बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए किया फोटोः @PIB_India

कर अधिकारियों की गिरफ्तार करने की शक्ति खत्म

केस चलाने की सीमा बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए किया

रिफंड क्लेम स्वीकार करने की अवधि 10 दिन हुई

जीएसटी दरों में बदलाव अब साल में एक ही बार

जीएसटी परिषद ने गुरुवार को हुई 57वीं बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए कर अधिकारियों की गिरफ्तार करने की शक्ति को खत्म कर दिया है। साथ ही, परिषद ने मुकदमा चलाने की सीमा को 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए कर दिया है। यह जानकारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से जीएसटी परिषद की बैठक के बाद दी गई।

रिफंड क्लेम मंजूर करने की अवधि घटी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस वार्ता में कहा कि पिछले साल सरकार ने जीएसटी की दरों को कम किया था। इस साल हमने प्रक्रिया को आसान बनाने पर फोकस किया है। सीतारमण ने कहा, "पंजीकरण में सामान्य बदलावों को अपने-आप अनुमति देने को मंजूरी जीएसटी परिषद ने दे दी है। अब रिफंड तेजी से जारी होंगे और स्वीकृति की अवधि 15 दिन से घटकर 10 दिन हो जाएगी। साथ ही, 90 प्रतिशत रिफंड 3 कामकाजी दिनों के भीतर जारी कर दिए जाएंगे।"

किसी अधिकारी के दखल की जरूरत नहीं होगी

रिफंड प्रोसेस को तेज बनाने के प्रस्ताव के तहत अब रिफंड क्लेम को स्वीकार करने की अवधि को 15 दिनों से घटाकर 10 दिन कर दिया गया है। अगर इस समय-सीमा के अंदर न तो कोई रिफंड क्लेम स्वीकार होता है और न ही इसमें किसी कमी के बारे में सूचना जारी की जाती है, तो क्लेम को स्वीकार किया हुआ माना जाएगा। इसमें किसी अधिकारी के बजाय, सिस्टम रिस्क असेसमेंट के आधार पर क्लेम का 90 प्रतिशत हिस्सा मंजूर करेगा। अभी रिफंड ऑर्डर मिलने के सात दिनों के भीतर जारी किया जाता है, लेकिन अब यह तीन कार्यदिवस दिनों के भीतर जारी कर दिया जाएगा। इससे कैश लेजर में मौजूद अतिरिक्त बैलेंस का रिफंड पूरी तरह से ऑटोमैटिक हो जाएगा, जिसमें किसी अधिकारी के दखल की जरूरत नहीं होगी।

इनपुट टैक्स क्रेडिट का भी विस्तार किया

इसके अलावा, जीएसटी परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का भी विस्तार किया है। अब कर्मचारियों के लिए गए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस और फैक्ट्रियों के बाहर लगाए गए टेलीकम्युनिकेशन टावर और पाइपलाइन पर आईटीसी मिलेगा। फ्री सैंपल और एक्सपायरी की वजह से राइट-ऑफ किए गए स्टॉक पर भी आईटीसी मिलेगा, बशर्ते कानून के तहत उन सामानों को नष्ट करना जरूरी हो। सरकार ने कुछ बी2बी (बिजनेस-टू-बिजनेस) सर्विस चेन में दो बार टैक्स लगने से रोकने के लिए भी कदम उठाए हैं। एजेंट के जरिए बुक की गई 7,500 रुपए प्रति रात तक की होटल बुकिंग, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सर्विस और पैसेंजर ट्रांसपोर्ट जैसी सर्विस पर अब दो बार के बजाय सिर्फ एक बार टैक्स लगेगा।

यूपीआई एमडीआर पर जीएसटी 5 प्रतिशत करने पर भी विचार

ई-कॉमर्स कारोबारियों के लिए पंजीकरण को आसान बनाने पर उन्होंने कहा, "ई-कॉमर्स ऑपरेटर्स के प्लेटफॉर्म पर छोटे ब्रिकेताओं के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन की आसान प्रक्रिया से छोटे बिजनेस को हर राज्य में बिजनेस की जगह बनाए बिना सामान बेचने में मदद मिलेगी।" इसके अलावा, जीएसटी परिषद ने यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) पर जीएसटी को मौजूदा 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया। ज्यादातर राज्यों ने यूपीआई एमडीआर पर 18 प्रतिशत जीएसटी को लेकर चिंता जताई। नए यूपीआई एमडीआर फ्रेमवर्क के तहत ज्यादा वैल्यू वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने की योजना है।

कारोबारियों में चिंता बढ़ी, लगातार विरोध कर रहे हैं

जीएसटी दर को घटाकर 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए एक अहम समय पर आया है। नए यूपीआई फ्रेमवर्क में, कुछ शर्तों और छूट के साथ, 2,000 रुपए से ज्यादा के खास 'पर्सन-टू-मर्चेंट' ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत का एमडीआर तय किया गया है। सरकार के मुताबिक, 'पर्सन-टू-मर्चेंट' यूपीआई ट्रांजैक्शन में से लगभग 96 प्रतिशत पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, इसे लेकर कारोबारियों में चिंता बढ़ती जा रही है और वे लगातार विरोध कर रहे हैं।

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