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हिमाचल: हाईवे के लिए पहाड़ों की बुनियाद कर दी गई खोखली, कई गांव लगभग तबाह, कई के अस्तित्व पर खतरा

हिमाचल प्रदेश में हाईवे चौड़ा करने के नाम पर पहाड़ों से अनावश्यक छेड़छाड़ और पेड़ों को काटने के कारण एक साथ कई गांवों पर अस्तित्व खत्म होने का खतरा मंडराने लगा है। लेकिन सरकार और प्रशासन को न तो लोगों की चिंता है और न ही प्रकृति की।

 फोटो : भारत डोगरा
फोटो : भारत डोगरा 

एक समय मंगोटी नंदे के थाड़ा गांव की पहचान एक बहुत सुंदर गांव के रूप में थी, पर आज यह गांव भू-स्खलन और धंसते पहाड़ की वजह से एक बहुत गंभीर संकट में फंसे गांव के रूप में जाना जाता है। लेकिन फिर भी यहां की कोई सुनवाई नहीं हो रही है, और गांववालों के आवेदन पत्रों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया जा रहाहै।

यह गांव हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के धर्मपुर ब्लाक में स्थित हैं। यह कसौली-गढ़खल पंचायत में आता है। यहां की आबादी एक सौ से अधिक है। बहुत मेहनत से तैयार किए खेतों पर यहां कुछ समय पहले तक अपने गुजारे का अनाज और सब्जी काफी हद तक पैदा हो जाते थे। साथ में आस-पास कुछ मजदूरी कर यहां के लोग अमन-चैन की जिंदगी गुजार रहे थे।

पर हाईवे चौड़ा करने के अनुचित तौर-तरीके अपनाने के कारण और कच्चे, संवेदनशील पहाड़ों से अनावश्यक व अत्यधिक छेड़छाड़ के कारण इस गांव के आसपास के क्षेत्र भू-स्खलन से तबाह हो गए हैं। खेत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। तमाम पेड़ गिर गए। दो गौशालाएं ध्वस्त हो गईं। कुछ आवास इतने अधिक क्षतिग्रस्त हो गए कि उन्हें खाली करना पड़ा। वर्षों से आजीविका का स्रोत रहीं कुछ दुकानें भी क्षतिग्रस्त हो गईं। बच्चों के स्कूल जाने के रास्ते दुर्गम हो गए।

सबसे बड़ा संकट तो यह उत्पन्न हुआ कि गांववासियों पर किसी बड़ी दुर्घटना का खतरा मंडराने लगा। अनुभवी गांववासियों ने बताया कि वर्षा के दिनों में उन्हें रातें जाग कर गुजारनी पड़ीं. ताकि सोते समय अचानक होने वाले हादसे से बचा जा सके। यहां के निवासी अनिल कुमार का घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। उन्होंने बताया कि घर में बड़ी दरारें देख प्रशासन ने घर खाली करने का आदेश तो थमा दिया है, पर कोई राहत नहीं दी है। अनिल कुमार के परिवार के अन्य सदस्यों ने अपने भाई के घर में शरण ली, पर पड़ोस के घर में भी यह खतरनाक स्थितियां पहुंचने की संभावना अभी से नजर आ रही है।

इस गांव की बड़ी चिंता यही है कि उनका गांव किसी बड़ी दुर्घटना का शिकार न हो जाए। जब हाईवे चौड़ा करने के लिए गांव की कुछ भूमि का अधिग्रहण किया गया तो उसका मुआवजा ठीक-ठाक ढंग से दे दिया गया। उससे तो लोग संतुष्ट थे। पर उसके बाद पहाड़ से अत्याधिक छेड़छाड़ और पेड़ों के कटान से जो तबाही व भूस्खलन शुरू हुआ उससे कभी लोगों के घर, तो कभी खेत, तो कभी दुकानें नष्ट होने लगे। इसकी कोई क्षतिपूर्ति अभी तक नहीं मिली है।

गांववासियों की मांग है कि उनकी क्षतिपूर्ति की जाए व उनकी खतरनाक स्थितियों का सर्वे करवा कर सरकार उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करे या किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर भूमि देकर उनका पुनर्वास करे।

यह स्थिति केवल इस गांव की नहीं है। बल्कि परवाणू से सोलन तक यहां हाईवे चौड़ा करने का काम किया जा रहा है। वहां के अनेक अन्य गांवों की स्थिति चिंताजनक हो रही है। पास के सनावरा गांव की स्थिति भी चिंताजनक है।

धर्मपुर के पास बातचीत करने पर लोगों ने बताया कि यहां अस्पताल के साथ हार्डिंग बस्ती के पास स्थिति बहुत चिंताजनक है और यहां भविष्य में किसी हादसे की आशंका है। यहां की सुरक्षा के उपाय अपनाना बहुत जरूरी है।

यहां हाईवे चौड़ा करने के लिए जिन अनेक छोटे दुकानदारों को हटाया गया, उनकी स्थिति अभी तक चिंताजनक बनी हुई हैं और उनका रोजगार नए सिरे से ठीक से जम नहीं सका है। जो दुकानदार किराएदार के रूप में कार्य कर रहे थे उनकी रोजी-रोटी लगभग खत्म हो गई है।

लेकिन सबसे बड़ी चिंता है कि पहाड़ों से अनावश्यक छेड़छाड़ और पेड़ों को काटने के कारण एक साथ कई गांवों पर अस्तित्व खत्म होने का खतरा मंडराने लगा है। लेकिन सरकार और प्रशासन को न तो लोगों की चिंता है और न ही प्रकृति की।

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