
कोलकाता भगदड़ में मृतक संख्या अब तक 18 पहुंची
बारिश, वीआईपी के लिए बंद रास्ता और लाउडस्पीकर पर घोषणा से बिगड़े हालात
आयोजन समिति की कमान अब बीजेपी नेताओं के हाथ में, लोगों में गुस्सा
मई 2026 में विधानसभा चुनाव के बाद आयोजन समिति की कमान बीजेपी नेताओं के हाथों में आना, अचानक बारिश होना, भक्तों की भारी भीड़, वीआईपी लोगों के लिए एक रास्ते का बंद होना, लोहे के ढांचे का एक हिस्सा गिरना और लाउडस्पीकर पर की गई घोषणा - इन सभी कारणों को उस भगदड़ के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है, जिसमें आधिकारिक तौर पर अब तक 18 लोगों की जान जा चुकी है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने चोरबागन पूजा पंडाल का उद्घाटन किया था। उनके एक रिश्तेदार - जो कथित तौर पर उनके भतीजे हैं - उस नई आयोजन समिति का हिस्सा हैं, जिसे जुलाई 2026 में गठित किया गया था। पुरानी समिति के सदस्यों ने कथित तौर पर राजनीतिक दबाव के चलते इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा, शनिवार शाम को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता पहुंचे। बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को वीआईपी ड्यूटी पर लगा दिया गया, और साथ ही उन्हें वामपंथी दलों - खासकर सीपीएम - द्वारा अलग-अलग पूजा पंडालों के पास लगाए गए किताबों के स्टॉल हटाने के काम में भी लगाया गया था।
इन सारी बातों के मद्देनजर शनिवार शाम हुई भगदड़ में 18 लोगों की जान जाने के बाद बंगाल में एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है।
याद दिला दें कि 2021 में, कोलकाता के श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब की दुर्गा पूजा को तब बंद कर दिया गया, जब भगदड़ जैसी स्थिति में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अलावा 2015 में, दक्षिण कोलकाता के देशप्रिय पार्क की पूजा को भी भगदड़ जैसी स्थिति में 11 लोगों के घायल होने के बाद बंद कर दिया गया था।
चोरबागान की घटना के बाद कोलकाता पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है। आज (रविवार) सुबह की रिपोर्टों में बताया गया है कि अलग-अलग पूजा पंडालों में पुलिस का आपसी तालमेल बेहद खराब था और पुलिस की मौजूदगी भी बहुत कम थी। आरोप है कि चूंकि ज्यादातर प्रमुख पूजा पंडालों के आयोजन की कमान बीजेपी नेताओं के हाथों में है, इसलिए पुलिस वहां दखल देने से कतरा रही थी। ऐसी भी खबरें हैं कि पूजा पंडालों में वामपंथी दलों द्वारा लगाए गए बुक स्टॉलों को हटाने के लिए सीआरपीएफ और आरएएफ के जवानों का इस्तेमाल किया गया। शनिवार शाम को जादवपुर में ऐसे ही एक स्टॉल को हटाने के लिए बुलडोजर भेजे गए थे, लेकिन लोगों और वामपंथी समर्थकों के विरोध के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अचानक हुई बारिश के बीच ही कोलकाता पहुंचे थे। उनका आगवानी के लिए भारी पुलिस बल तैनात था और गृह मंत्री के स्वागत के लिए एक भव्य कार्यक्रम की तैयारी की गई थी। बारिश के बावजूद, पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकार गृह मंत्री का स्वागत कर रहे थे, जबकि लोग वीआईपी लोगों को बारिश से बचाने के लिए उनके ऊपर छाते लगाए तैनात थे। उन्होंने इस घटना के बाद रविवार के लिए बंगाल में तय अपने कार्यक्रमों को रद्द कर दिया है। कहा है कि इसके बजाय वे घायलों से मिलने अस्पताल जाएंगे।
'द टेलीग्राफ' ने हादसे के वक्त मौके पर मौजूद एक व्यक्ति के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है, "भीड़ को संभालने के लिए बस कुछ ही स्वयंसेवक (वॉलंटियर) मौजूद थे। एक रास्ता शायद वीआईपी लोगों की आवाजाही के लिए आरक्षित था। आम जनता के लिए बना दूसरा निकास मार्ग भी सीधा नहीं था—कहीं यह 10 फीट चौड़ा था, तो कहीं 30 फीट। जो लोग सीढ़ियां चढ़कर निकास द्वार तक पहुंच भी गए, वे बाहर नहीं निकल पाए... क्योंकि बगल वाला रास्ता बंद था। एम्बुलेंस को अंदर आने की अनुमति नहीं थी। पुलिस वहां से भाग गई थी। ऐसे में, स्थानीय लोग अंदर फंसे लोगों को बचाने के लिए दौड़ पड़े," पंडाल में आए एक व्यक्ति ने बताया।
अखबारों में छपी खबरों के अनुसार, 17 जुलाई 2026 को—यानी 'खुटी पूजा' से कुछ ही दिन पहले—चोर बागान सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति के पदाधिकारियों ने अचानक इस्तीफा दे दिया था और एक नई समिति ने कामकाज संभाल लिया। इस नई समिति में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के करीबी रिश्तेदार देबदीप अधिकारी के साथ-साथ बीजेपी विधायक विजय ओझा और अन्य नेता शामिल हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में मची भगदड़ पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है। पीएम की इस घोषणा पर कुछ लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए और मोदी के उस ट्वीट को याद किया, जो उन्होंने शहर में एक फ्लाईओवर का कुछ हिस्सा गिरने के बाद किया था। उस समय प्रधानमंत्री ने इसे राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार से छुटकारा पाने के लिए 'ईश्वर का संदेश' बताया था।
इस हादसे के बाद पुलिस ने सुरुचि संघ और चेतला अग्रानी सहित कई प्रमुख पूजा पंडालों को बंद करा दिया है। ताला प्रत्यय ने भी घोषणा की है कि उनका पंडाल अगली सूचना तक बंद रहेगा।
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