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मणिपुर सरकार ने इंफाल समेत 9 जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवा बहाल की, 16 नवंबर से जारी था प्रतिबंध

आदेश में सभी मोबाइल इंटरनेट उपयोगकर्ताओं से ‘‘ऐसी किसी भी गतिविधि से दूर रहने का अनुरोध किया गया है जो राज्य में कानून-व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकती है जिसके लिए भविष्य में इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध की आवश्यकता हो सकती है।

मणिपुर सरकार ने इंफाल समेत 9 जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवा बहाल की, 16 नवंबर से जारी था प्रतिबंध
मणिपुर सरकार ने इंफाल समेत 9 जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवा बहाल की, 16 नवंबर से जारी था प्रतिबंध फोटोः सोशल मीडिया

मणिपुर सरकार ने नौ जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर लगे अस्थायी प्रतिबंध को सोमवार को हटा लिया। राज्य के गृह विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। आदेश में कहा गया कि इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, विष्णुपुर, थौबल, काकचिंग, जिरीबाम, चुराचांदपुर, कांगपोकपी और फेरजावल जिलों में मौजूदा कानून-व्यवस्था के हालात और इंटरनेट सेवाओं से जुड़े प्रभाव की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया।

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आयुक्त (गृह) एन अशोक कुमार द्वारा जारी आदेश में कहा गया, ‘‘राज्य सरकार ने राज्य में मौजूदा कानून-व्यवस्था के हालात और इंटरनेट सेवाओं के संचालन से जुड़े इसके संभावित प्रभावों की समीक्षा के बाद मणिपुर के इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, विष्णुपुर, थौबल, काकचिंग, जिरीबाम, चुराचांदपुर, कांगपोकपी और फेरजावल में इंटरनेट और डेटा सेवाओं पर लगे सभी प्रकार के अस्थायी प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से हटाने का फैसला किया है।’’

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जिरी और बराक नदियों में तीन महिलाओं और तीन बच्चों के शव बरामद होने के बाद राज्य में भड़की हिंसा के बाद 16 नवंबर को इन जिलों में इंटरनेट सेवाएं प्रतिबंधित कर दी गई थीं। तब से, मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध कई बार बढ़ाया गया। सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं, शैक्षणिक संस्थानों और विभिन्न कार्यालयों में संभावित समस्याओं को देखते हुए 19 नवंबर को ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध को हटा लिया था।

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हालांकि, वाईफाई या हॉटस्पॉट साझा करने की अनुमति नहीं थी। आज 9 दिसंबर के आदेश में सभी मोबाइल इंटरनेट उपयोगकर्ताओं से ‘‘ऐसी किसी भी गतिविधि से दूर रहने का अनुरोध किया गया है जो राज्य में कानून-व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकती है जिसके लिए भविष्य में इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध की आवश्यकता हो सकती है।’’

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मणिपुर में तीन मई 2023 को पहली बार जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 250 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। बहुसंख्यक मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ का आयोजन किया गया था, जिसके बाद वहां जातीय हिंसा भड़क उठी थी।

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