
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘नीट-यूजी-2026’ परीक्षा के पेपर लीक मामले पर निशाना साधते हुए कहा कि साफ है कि पीएम मोदी और बीजेपी युवाओं के भविष्य की चोरी में खुद साझेदार हैं। जिस बाजार में आपकी मेहनत, आपके सपने नीलाम हो रहे हैं, उसका एक ही उसूल है, जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम।
राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘देश के युवाओं के सामने एक गंभीर बात रखना चाहता हूं। एक काम कीजिए, खुद गूगल कीजिए कि नीट 2024 की भयंकर चोरी के दौरान एनटीए का महानिदेशक कौन था, और मोदी सरकार ने उसे आज कहां बैठाया है? देखा? समझ आया?"
राहुल गांधी ने आगे कहा, बीजेपी इसी तरह आप जैसे लाखों मेहनती विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को इनाम देती है- उनकी रक्षा करती है, ऊपर से उन्हें तरक्की देती है। साफ़ है- मोदी जी और बीजेपी आपके भविष्य की चोरी में ख़ुद साझेदार हैं। जिस बाज़ार में आपकी मेहनत, आपके सपने नीलाम हो रहे हैं, उसका एक ही उसूल है - जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम।
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इससे पहले राहुल गांधी ने पेपर लीक के आरोपों के चलते मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी-2026’ को रद्द किए जाने के बाद आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का तथाकथित अमृतकाल अब ‘विषकाल’ बन गया है। उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘नीट 2026 की परीक्षा रद्द हो गई। 22 लाख से ज़्यादा छात्रों की मेहनत, त्याग और सपनों को इस भ्रष्ट भाजपाई व्यवस्था ने कुचल दिया। किसी पिता ने कर्ज़ लिया, किसी मां ने गहने बेचे, लाखों बच्चों ने रात-रात भर जागकर पढ़ाई की और बदले में मिला- पेपर लीक, सरकारी लापरवाही और शिक्षा में संगठित भ्रष्टाचार।’’
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि यह सिर्फ़ नाकामी नहीं, युवाओं के भविष्य के साथ अपराध है। उन्होंने कहा, ‘‘हर बार पेपर माफिया बच निकलते हैं और ईमानदार छात्र सज़ा भुगतते हैं। अब लाखों छात्र फिर से वही मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और अनिश्चितता झेलेंगे।’’ राहुल गांधी ने कहा, ‘‘अगर तकदीर परिश्रम से नहीं, पैसे और पहुंच से तय होगी तो फिर शिक्षा का मतलब क्या रह जाएगा?’’ उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का तथाकथित अमृतकाल, देश के लिए विषकाल बन गया है।
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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसद की स्थायी समिति की 371वीं रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि केवल 2024 में ही एनटीए द्वारा आयोजित 14 राष्ट्रीय परीक्षाओं में से 5 में पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले सामने आए। उन्होंने कहा, ‘‘16 जून 2024 को शिक्षा मंत्री (धर्मेंद्र प्रधान) ने स्वीकार किया था कि एनटीए को 'बहुत सुधार की जरूरत' है। दो साल बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इस स्वीकारोक्ति के बाद आखिर क्या कार्रवाई हुई।’’ उन्होंने कहा कि अब यह लगातार स्पष्ट होता जा रहा है कि केवल सुधार नहीं, बल्कि उससे जुड़े पूरे तंत्र के बुनियादी पुनर्गठन की जरूरत है, ताकि इसे मोदी सरकार के भ्रष्ट हाथों से बाहर रखा जा सके।
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नीट-यूजी 2026 एग्जाम कैंसिल होने पर बिहार के चर्चित शिक्षक खान सर ने कहा, "एनटीए के लिए, यह सिर्फ़ एक एग्जाम पेपर हो सकता है, लेकिन इन स्टूडेंट्स के लिए, यह उनकी पूरी ज़िंदगी है। एनटीए (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) का नाम बदलकर 'नेवर ट्र्स्टेड एजेंसी' कर देना चाहिए। उनका एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम बहुत खराब है। वे जांच किसे सौंपेंगे? सीबीआई को। क्या सीबीआई कभी किसी पक्के नतीजे पर पहुंची है? अगर यह मामला सीबीआई को सौंप दिया जाता है, तो शायद उनकी जांच तब भी खिंचती रहेगी जब तक ये स्टूडेंट्स अपनी पूरी मेडिकल डिग्री पूरी नहीं कर लेते। इस केस के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज को ऑब्ज़र्वर बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा, ज़िम्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए एक सख़्त टाइमलाइन तय की जानी चाहिए और उन्हें कड़ी सज़ा दी जानी चाहिए... प्रधानमंत्री को इस मामले में पर्सनली शामिल होना चाहिए और यह पक्का करना चाहिए कि ज़िम्मेदार लोगों को सख़्त से सख़्त सज़ा दी जाए। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट को भी दखल देने के लिए आगे आना चाहिए।"
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गौरतलब है कि इसी महीने तीन मई को आयोजित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी-2026’ का बड़े पैमाने पर प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के मद्देनजर मंगलवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने परीक्षा रद्द करने की घोषणा की। इसी के साथ सरकार ने सीबीआई को इन ‘अनियमितताओं’ की विस्तृत जांच करने का आदेश दिया। एनटीए ने कहा कि यह परीक्षा अलग से अधिसूचित तिथियों पर पुनः आयोजित की जायेगी।
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