
विपक्ष के लगातार हंगामों के बीच आज पीएम मोदी ने लोकसभा में अपना भाषण स्थगित कर दिया। स्पीकर ने सदन की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इस पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने निशाना साधते हुए कहा कि जैसा मैंने कहा, पीएम मोदी संसद में नहीं आएंगे क्योंकि वह डरे हुए हैं और सच्चाई का सामना नहीं करना चाहते हैं।
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दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आज शाम 5 बजे धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देना था। इससे पहले सदन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को नहीं बोलने देने और विपक्षी सांसदों के निलंबन पर विपक्ष का जोरदार हंगामा जारी रहा। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सदन की कार्यवाही पहले 12 बजे, फिर 2 बजे, और इसके बाद शाम पांच बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। और इसी के साथ पीएम मोदी का भाषण भी स्थगित हो गया।
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इससे पहले, राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण की एक प्रति लेकर संसद पहुंचे थे और कहा था कि यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सदन में आते हैं तो वह यह पुस्तक उन्हें भेंट करेंगे। उन्होंने कहा था कि अगर पीएम मोदी सदन में आते हैं तो मैं खुद व्यक्तिगत तौर पर उनसे मिलूंगा और पूर्व सेना प्रमुख की यह किताब उन्हें भेंट करूंगा।
उन्होंने इस अप्रकाशित पुस्तक के एक अंश का हवाला देते हुए दावा किया कि जब चीन के टैंक भारत की सीमा की तरफ बढ़ रहे थे, उस वक्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन नहीं किया था। उन्होंने पुस्तक दिखाते हुए कहा, ‘‘वे (सरकार) कहते हैं कि यह किताब अस्तित्व में नहीं है, लेकिन यह रही किताब। भारत के हर युवा को यह देखना चाहिए कि यह किताब मौजूद है। यह नरवणे जी की किताब है, लेकिन मुझे कहा गया है कि मैं इसके अंश उद्धृत नहीं कर सकता।’’
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राहुल गांधी ने दावा किया कि इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कही एक लाइन है कि ‘‘जो उचित समझो, वो करो।’’ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘नरवणे जी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी को फोन कर बताया कि सीमा पर चीन के टैंक आ गए हैं, हमें क्या करना है? लेकिन तब राजनाथ सिंह जी का कोई उत्तर नहीं आया। नरवणे जी ने उन्हें फिर फोन किया, जिस पर रक्षा मंत्री ने कहा- मैं 'ऊपर' से पूछता हूं। 'ऊपर' से आदेश आया कि जब चीन की सेना हमारी सीमा के अंदर आए तो बिना हमसे पूछे फायर नहीं करें।’’
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उनका कहना था, ‘‘हमारी सेना चीन के टैंकों पर हमला करना चाहती थी, क्योंकि वो भारत की सीमा में घुस आए थे। लेकिन इस मुश्किल समय में नरेन्द्र मोदी जी ने संदेश दिया- "जो उचित समझो, वो करो।’’ मतलब प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की और सेना से कहा कि आपको जो करना है करो, मेरे बस की नहीं है।’’ राहुल गांधी के मुताबिक, तत्कालीन सेना प्रमुख नरवणे ने अपनी किताब में साफ लिखा है, ‘‘मुझे बहुत अकेलापन महसूस हुआ, पूरे सिस्टम ने मुझे छोड़ दिया था।’’
राहुल गांधी निचले सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की किताब के इस संस्मरण के कुछ अंश उद्धृत करना चाहते थे, लेकिन आसन से इसकी अनुमति नहीं मिली। इसे लेकर बीते सोमवार से लोकसभा में गतिरोध बना हुआ है।
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