
राजस्थान के कोटा शहर में आयोजित REET Mains 2025 परीक्षा के दौरान एक परीक्षा केंद्र पर हिजाब पहनकर पहुंची एक छात्रा को परीक्षा में बैठने से रोके जाने का आरोप लगा है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन को सफाई देनी पड़ी है।
मामला धर्म, अधिकार और परीक्षा नियमों के टकराव से जुड़ा होने के कारण लगातार बहस के केंद्र में बना हुआ है।
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इस पूरे मामले की केंद्र में हैं अलीशा, जो राजस्थान के बूंदी जिले के सावतगढ़, हिंडोली क्षेत्र की रहने वाली हैं। अलीशा रविवार, 18 जनवरी को अपने पिता के साथ रीट मेन्स परीक्षा देने कोटा पहुंची थीं।
उनका परीक्षा केंद्र कोटा के महावीर नगर एक्सटेंशन स्थित तिलक स्कूल में निर्धारित था। परीक्षा का समय दोपहर 3 बजे से 5:30 बजे तक था। अलीशा समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंच गई थीं, लेकिन यहीं से विवाद की शुरुआत हो गई।
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अलीशा हिजाब पहनकर परीक्षा केंद्र पहुंची थीं। उनके अनुसार, केंद्र पर मौजूद महिला सुरक्षा कर्मियों ने उनकी पूरी तलाशी ली, यहां तक कि हिजाब हटाकर जांच भी की गई। इसके बावजूद स्कूल की सेंटर सुपरिंटेंडेंट ने उन्हें परीक्षा कक्ष में प्रवेश की अनुमति नहीं दी।
अलीशा का कहना है कि उनसे दोबारा हिजाब हटाने के लिए कहा गया, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया।
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एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, अलीशा ने कहा, “मुझसे कहा गया कि मैं हिजाब हटाकर परीक्षा दूं। इतने छात्रों के सामने सिर खोलना मेरे लिए अपमानजनक था। यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं थी, बल्कि मेरे मान-सम्मान और आत्मसम्मान का सवाल था।”
अलीशा का आरोप है कि परीक्षा बोर्ड की गाइडलाइंस में कहीं भी हिजाब पर रोक नहीं है। उन्होंने कहा कि नियमों में दुपट्टा या चुन्नी पहनकर परीक्षा देने की अनुमति दी गई है, लेकिन लिखित नियमों को दरकिनार कर मौखिक आदेश थोपे गए।
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छात्रा ने यह भी बताया कि उनके एडमिट कार्ड में लगी फोटो में भी वह हिजाब में ही हैं। इसके अलावा वह इससे पहले भी RPSC और कर्मचारी चयन बोर्ड की कई परीक्षाएं दे चुकी हैं, जहां उन्हें कभी नहीं रोका गया।
अलीशा का दावा है कि यह मामला नियमों का नहीं, बल्कि परीक्षा केंद्र पर मौजूद अधिकारियों की मनमानी का है।
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इस पूरे विवाद पर कोटा के अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADM) वीरेंद्र यादव ने प्रशासन का पक्ष रखा। उन्होंने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि छात्रा को कर्मचारी चयन आयोग की गाइडलाइंस के तहत ही रोका गया।
ADM वीरेंद्र यादव के अनुसार, “कर्मचारी चयन आयोग की गाइडलाइन में ऐसे स्कार्फ या कपड़ों की अनुमति नहीं है, जिनसे सिर और कान पूरी तरह ढके हों। छात्रा हिजाब में थी। उसे नियम समझाने की कोशिश की गई, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं हुई और बिना परीक्षा दिए वापस चली गई।”
उन्होंने बताया कि उन्हें शाम के समय इस घटना की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने परीक्षा केंद्र के सुपरिंटेंडेंट से बात की।
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इस मामले में यह भी सामने आया है कि छात्रा और केंद्र अधीक्षक के बीच करीब एक घंटे तक बहस चलती रही। इस दौरान छात्रा के परिवार के लोगों ने भी काफी कोशिश की, लेकिन केंद्र अधीक्षक ने गाइडलाइन का हवाला देकर उसे परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी।
इस बीच अन्य महिला परीक्षार्थियों ने भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि अगर उनके दुपट्टे और चुन्नियां उतरवाई गई हैं, तो सभी पर नियम एक समान लागू होने चाहिए।
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