
सुप्रीम कोर्ट ने किसानों को आंदोलन के कारण शंभू बॉर्डर बंद करने को लेकर आज हरियाणा सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि कोई सरकार हाईवे को कैसे ब्लॉक कर सकती है। सरकार का काम यातायात को रेगुलेट करना होता है। उसका काम हाईवे बंद करना नहीं होता है। इससे पहले बुधवार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को शंभू बॉर्डर खोलने का आदेश दिया था।
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दरअसल बीते छह महीने से किसान दिल्ली कूच करने को लेकर शंभू बॉर्डर पर डटे हुए हैं। स्थानीय व्यापारियों ने बॉर्डर के बंद होने से हो रही परेशानियों को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने शंभू बॉर्डर को खोलने की मांग की थी। उस याचिका पर शंभू बॉर्डर खोलने के पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ी टिप्पणी की और हरियाणा सरकार से सवाल भी पूछा।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार हाईवे के यातायात को कैसे रोक सकती है। सरकार का काम है कि वह यातायात को नियंत्रित करे। हमारा कहना है कि बॉर्डर को खुला रखा जाए, लेकिन उसको नियंत्रित भी करें। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आखिर राज्य सरकार हाईकोर्ट के बॉर्डर को खोलने के आदेश को चुनौती क्यों देना चाहती है। किसान नागरिक हैं, उन्हें भोजन और अच्छी चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाए। वे आएंगे, नारे लगाएंगे और वापस चले जाएंगे।
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दरअसल, किसान आंदोलन के दौरान प्रदर्शन कर रहे 22 वर्षीय युवक की मौत की न्यायिक जांच के हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ हरियाणा सरकार की दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की गई है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 10 जुलाई को शंभू बॉर्डर खोलने का आदेश दिया था। हरियाणा हाई कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कहा था कि एक हफ्ते के अंदर बैरिकेडिंग हटा कर शंभू बॉर्डर को खोला जाए। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि किसानों की मांग केंद्र सरकार से है, इसलिए उन्हें दिल्ली जाने देना चाहिए।
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