
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आंगमो की याचिका पर सुनवाई करेगा। आंगमो ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत वांगचुक की हिरासत के खिलाफ याचिका दायर की है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ के इस मामले की सुनवाई करने की संभावना है।
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जोधपुर केंद्रीय कारागार में हिरासत में रखे गए वांगचुक ने 29 जनवरी को उन आरोपों का खंडन किया कि उन्होंने ‘अरब स्प्रिंग’ की तरह सरकार को उखाड़ फेंकने का बयान दिया था, और इस बात पर जोर दिया कि उन्हें आलोचना तथा विरोध करने का लोकतांत्रिक अधिकार है।
वांगचुक की पत्नी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि पुलिस ने हिरासत में लेने वाले अधिकारियों को गुमराह करने के लिए चुनिंदा वीडियो फुटेज का इस्तेमाल किया है।
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जलवायु कार्यकर्ता के दूषित पानी के कारण पेट की समस्याओं की शिकायत करने के बाद सरकार ने एक विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा उनकी चिकित्सा जांच कराने का भी निर्देश दिया था।
आंगमो का दावा है कि हिरासत अवैध है और एक मनमाना कृत्य है, जो उनके (वांगचुक के) मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
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केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की ओर से 24 नवंबर को पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा आंगमो द्वारा दायर प्रत्युत्तर का जवाब देने के लिए समय मांगे जाने के बाद, शीर्ष अदालत ने मामले में सुनवाई स्थगित कर दी थी।
अदालत ने 29 अक्टूबर को आंगमो की संशोधित याचिका पर केंद्र और लद्दाख प्रशासन से जवाब मांगा।
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लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद, 26 सितंबर को वांगचुक को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया। इन प्रदर्शनों में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हो गए थे। सरकार ने उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था।
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