
कांग्रेस ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) प्रणाली में कथित अनियमितताओं से जुड़े मुद्दे को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और दावा किया कि बड़े छात्र आंदोलन के बावजूद शिक्षा मंत्रालय में कुछ नहीं बदला तथा नए मंत्री प्रह्लाद जोशी भी पूरे प्रकरण से संबंधित कंपनी को संरक्षण दे रहे हैं। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि ‘‘वोट चोर, पेपर चोर सरकार’’ को जाना होगा।
कांग्रेस नेता ने ‘एक्स’ पर एक खबर का हवाला देते हुए दावा किया कि सीबीएसई की ओएसएम प्रणाली में ‘‘बड़ी अनियमितताएं’’ सामने आने के पांच महीने बाद भी इसके लिए जिम्मेदार कंपनी ‘कोएम्प्ट’ के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है या जुर्माना नहीं लगाया गया है।
उन्होंने कहा कि सीबीएसई ने एक जून, 2026 को कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही थी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं किया गया।
जयराम रमेश ने आरोप लगाया, ‘‘शायद इसकी वजह यह है कि शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई में जिन लोगों ने संदिग्ध प्रक्रिया के जरिये यह ठेका दिया था, उन्हीं लोगों को कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।’’
कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि कंपनी के खिलाफ अब तक न तो कोई दंडात्मक आदेश जारी किया गया है और न ही कोई जुर्माना लगाया गया है।
उन्होंने दावा किया कि इससे पहले की खबरों में सामने आया था कि ओएसएम से संबंधित निविदा में उस प्रावधान को हटा दिया गया था जिसके तहत काम पूरा करने में नाकाम रहने वाले विक्रेताओं को काली सूची में डालने का प्रावधान था।
जयराम रमेश के अनुसार, निविदा में यह बदलाव ‘कोएम्प्ट’ को ठेका मिलने से कुछ महीने पहले किया गया था और इस ठेके का कुल मूल्य 38 करोड़ रुपये से अधिक था।
उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर हुए छात्र आंदोलन के बावजूद शिक्षा मंत्रालय के कामकाज में कोई बदलाव नहीं आया है और नए शिक्षा मंत्री भी उन्हें विरासत में मिले ‘वेंडर्स’ को संरक्षण देना जारी रखे हुए हैं।
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