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मुजफ्फरनगर: बीजेपी नेताओं के दबाव में 2 एसओ सस्पेंड, त्यागी-ब्राह्मणों की उपचुनाव में अंजाम भुगतने की धमकी

यूपी के मुजफ्फरनगर में दो थाना प्रभारियों को बीजेपी के बड़े नेताओं के दबाव में निलबिंत करने का आरोप लगा है। दोनों थाना प्रभारियों के निलंबन से यहां का त्यागी और ब्राह्मण समाज बेहद नाराज है।

फोटो: नवजीवन
फोटो: नवजीवन मुजफ्फरनगर के चरथावल और छपार के निलंबित थाना प्रभारी

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में सरकार पर ‘गुंडाराज’ का आरोप लगाने वाली मौजूदा बीजेपी सरकार सवालों के घेरे में है। बीजेपी के बड़े नेताओं के दबाव में मुजफ्फरनगर में चरथावल के थाना प्रभारी जीसी शर्मा और छपार के थाना प्रभारी आदेश त्यागी को निलबिंत करने का आरोप लगा है।

Published: 06 May 2018, 5:42 PM IST

दोनों थाना प्रभारियों के निलंबन से यहां का त्यागी और ब्राह्मण समाज बेहद नाराज है। त्यागी और ब्राह्मण समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर दोनों थाना प्रभारियों को बहाल करने की मांग की। साथ ही यह चेतावनी भी दी कि अगर दोनों थाना प्रभारियों को बहाल नहीं किया गया तो वे कैराना लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी उम्मीदवार का विरोध करेंगे।

Published: 06 May 2018, 5:42 PM IST

दो अलग-अलग मामलों में राजनीतिक कारणों के चलते चरथावल के थाना प्रभारी जीसी शर्मा और छपार के थाना प्रभारी आदेश त्यागी को बीजेपी नेताओं पर निलबिंत करवाने का आरोप लगा है। पहला मामला चरथावल थाने का है। जहां पिछले हफ्ते प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए ग्राम स्वराज नाम से एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। आरोप है कि कार्यक्रम में बीजेपी नेताओं और कार्यकर्तओं ने कुर्सियों पर कब्जा जमा लिया था। इस दौरान कार्यक्रम में आए भारतीय किसान यूनियन से जुड़े लोगों को कुर्सियां नहीं मिलीं। इस बात को लेकर दोनों पक्षों को बीच मारपीट हो गई। दोनों पक्षों की ओर से इसे लेकर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई। जिस दिन दोनों पक्षों को बीच मारपीट हुई थी, उसी दिन प्रदेश के मंत्री सतीश हमाना खतौली के भैंसी गांव पहुंचे थे। सतीश हमाना के साथ सांसद संजीव बलियान भी मौजूद थे। आरोप है कि चरथावल थाना प्रभारी को सस्पेंड करवाने के लिए दोनों नेताओं ने एसएसपी पर दबाव बनाया, जिसके बाद चरथावल के थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया।

दूसरा मामला छपार के थाना प्रभारी आदेश त्यागी से जुड़ा है। छपार के थाना प्रभारी आदेश त्यागी ने शनिवार सुबह को बीजेपी नेता की बिना नंबर वाली गाड़ी को रोक लिया था। जब थाना प्रभारी ने ड्राइवर से गाड़ी के कागजात मांगे तो ड्राइवर कागजात दिखाने में असमर्थ रहा। गाड़ी 2015 में ली गई थी, अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया था। इस पर कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी ने गाड़ी को सीज कर दी। इस खबर की सूचना मिलने के बाद बीजेपी विधायक ने थाना प्रभारी पर गाड़ी को छोड़ने के लिए दबाव बनाया। जब थाना प्रभारी ने गाड़ी को छोड़ने से मना कर दिया तो बीजेपी विधायक पार्टी के कई नेताओं के साथ मुजफ्फरनगर के एसएसपी से मिलकर थाना प्रभारी की शिकायत की। इसके बाद छपार के थाना प्रभारी आदेश त्यागी को निलंबित कर दिया गया।

इन दोनों मामलों के बाद उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के सरकार के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष राजू अहलावत ने कहा कि पुलिस के आलाधिकारियों ने बीजेपी के दबंग नेताओं के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।

जिला बार संघ के पूर्व अध्यक्ष और समाजवादी पार्टी के नेता प्रमोद त्यागी ने कहा, “थाना प्रभारियों के निलंबन से बड़े अफसरों की निष्पक्षता पर सवाल उठने लाजिम हैं। प्रशासन बीजेपी नेताओं के हाथ का खिलौना बन गया है।” उन्होंंने पूछा कि बीजेपी नेता अब जवाब दें कि थानों को कौन चला रहा है?

राष्ट्रीय लोक दल के प्रवक्ता अभिषेक चौधरी इन दोनों मामलों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यानथ से स्पष्टिकरण की मांग की। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं की इस हरकत से पुलिस का मनोबल गिर जाएगा।

Published: 06 May 2018, 5:42 PM IST

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Published: 06 May 2018, 5:42 PM IST