विचार

इतने यू-टर्न के बाद आकाश आनंद पर ही ठहरी मायावती, यूपी, यूके, पंजाब में सभाओं के साथ खेला Gen-Z दांव

बीेसपी के पुराने नेता मानते हैं कि ‘बहनजी की बहुजन समाज की पुरानी पीढ़ी में अब भी पैठ कायम है, लेकिन युवा अपने मुद्दों को लेकर अलग-अलग खेमे में बंट सकते हैं, और यही पार्टी की बेचैनी का कारण है। इससे निजात के लिए आकाश सबसे मज़बूत कड़ी साबित हो सकते हैं।'

मायावती के पैर छूते आकाश आनंद (फाइल फोटो - Getty Images)
मायावती के पैर छूते आकाश आनंद (फाइल फोटो - Getty Images) 

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पिछले कुछ दिनों से कोई भी चौराहा खुला हुआ नहीं दिखता। सबसे बड़े और प्रमुख हज़रतगंज से लेकर हर चौराहे पर डायवर्जन है और आपको थोड़ा चक्कर लगाकर यू-टर्न लेना ही होगा, तभी अगली राह पकड़ सकते हैं। रोज़-रोज़ के इस यू-टर्न से लोग परेशान हैं और यह उनकी आदत में शुमार नहीं हो पा रहा। लोग पूछते हैं .. ‘अब और कितने यू-टर्न’। 

लेकिन लगता है कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती राजधानी लखनऊ के सिखाए इस यू-टर्न को पूरी तरह आत्मसात कर चुकी हैं। वैसे भी पहला यू-टर्न उन्हें अपने मॉल एवेन्यू वाले आवास से निकलते ही लेना पड़ता है। लेकिन लोग अब मायावती को लेकर भी यही सवाल करने लगे हैं कि … ‘बहन जी, आख़िर और कितने यू-टर्न…’। 

हाल के कुछ महीनों में उनके इसी यू-टर्न से परशान उनकी ही पार्टी के एक पुराने लेकिन अब तक समर्पित नेता कहते हैं ‘बहन जी यू-टर्न ले रही हैं या भतीजे को इसकी आदत डलवा रही हैं, समझना  मुश्किल है।’ लेकिन उनका कहना है कि ‘अच्छी बात यह है कि बहनजी लगता है अब ठहरेंगी और जल्द ही किसी मुक़ाम पर पहुंचेंगी।’ उनका इशारा यूपी के जल्द होने वाले चुनाव और उसकी रणनीति के लिए ज़रूरी ठहराव की तरफ है। 

मायावती ने कई झटके देने (या खाने) के बाद पिछले दिनों भतीजे आकाश आंनद को जब फिर से पार्टी में शामिल किया तो पार्टी के बड़े धड़े से ज्यादा उनके समर्थकों और आकाश में ही बहुजन समाज का भविष्य देखने वालों ने राहत की सांस ली।  मायावती ने आख़िर एक बार फिर बड़ा दांव लगाते हुए आकाश को न सिर्फ मैदान में उतारा है, यूपी से लेकर पंजाब और उत्तराखंड तक के लिए उनकी आगामी जनसभाओं की सूची तक जारी कर दी है। जाहिर है उनके इस कदम और इसके निहितार्थ पर चर्चाएं हो रही हैं। 

मायावती ने रविवार को एक्स अकाउंट पर फिर एक पोस्ट डाली। भतीजे आकाश आनंद को न सिर्फ ‘अब परिपक्व’ बताया, यूपी से लेकर पंजाब तक उनकी आगामी सभाओं की तारीखें भी साझा कीं। मायावती ने लिखा- ‘अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के बाद आकाश आनंद बसपा के राष्ट्रीय संयोजक के रूप में काफी सूझबूझ व परिपक्वता दिखा रहे हैं। पार्टी मूवमेंट के काम में काफी मेहनत कर रहे हैं’। 

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) अपना वजूद और परंपरागत वोट बैंक बचाए रखने के लिए जिस संकट से जूझ रही है, उसमें उनके पास और कोई विकल्प भी नहीं था। आकाश की रफ़्तार बार-बार रोकने पर पार्टी से ज्यादा बहन जी के अनुशासन से बंधे कार्यकर्ता खुलकर भले न बोले हों, उनकी नाराज़गी से ज्यादा निराशा का अहसास सबको हो रहा था। 

सच यही है कि राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा रखने के बावजूद यूपी में विधानसभा से लेकर लोकसभा तक पार्टी का प्रतिनिधित्व खत्म हो चुका है, आज वह सदन में शून्य की स्थिति में हैं। ऐसे हालात में जब आकाश आंनद मुखर हो रहे थे और बहुजन युवाओं के चहेते बनकर उभर रहे थे, उन्हें कई बार पार्टी से बाहर निकाला और फिर वापस लिया।

अब उन्हें एक बार फिर से राष्ट्रीय संयोजक बनाकर न सिर्फ यूपी से पंजाब और उत्तराखंड तक में उनकी जनसभाओं की तारीख़ें तय कर देना बल्कि उन्हें ‘फ्री हैंड’ मिलने का अहसास कराना बताता है कि उन्हें देश में तेज़ी से उभरे ‘जेन-जी’ की ताकत का अहसास हो गया है और उनका ताजा  कदम इसी ‘बहुजन जेन-जी’ को बसपा के साथ बांधे रखने की रणनीति माना जा रहा है।

बहुजन चिंतक  राकेश आंनद कहते हैं ‘आकाश को आगे करने का सीधा मतलब यही है कि बहनजी पार्टी कोर वोटर जमात से युवी पीढ़ी को छिटकने नहीं देना चाहती, जिसकी आशंका आकाश आनंद को लेकर उठाए गये उनके पिछले कदम के बाद लगने लगा था।’

पार्टी सूत्रों और शुभचिंतकों की मानें तो ‘कान भरने में सिद्धहस्त और अपनी ज़मीन दरकने के ख़तरे से डरी एक लॉबी’ को छोड़ दें तो संगठन का बड़ा तबका आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने के पक्ष में कभी नहीं नहीं रहा। कई वरिष्ठ नेता तो समय-समय पर आकाश को मौका दिए जाने की पैरवी भी करते रहे। 

पार्टी ने अब जिस तरह आकाश आनंद की सभाओं के कार्यक्रम घोषित किए हैं, संकेत साफ है कि आनंद आने वाले चुनावों में अहम भूमिका निभाने वाले हैं। पार्टी ने युवा पीढ़ी को अपने साथ बांधे रखने के लिए ही आकाश के चेहरे को आगे करने की निर्णय किया है।

चंद्रशेखर आजाद का खतरा 

लोगों का मानना है कि आजाद समाज पार्टी के युवा चेहरे चंद्रशेखर आजाद जिस तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं और अपनी जमात खासकर युवाओं में लोकप्रिय हो रहे हैं, उससे बीएसपी संगठन में खासी बेचैनी है। पार्टी में ज़िम्मेदार ओहदे वालों का भी मानना है कि ‘बहनजी की बहुजन समाज की पुरानी पीढ़ी में अब भी पुरानी पैठ कायम है, लेकिन युवा अपने मुद्दों को लेकर अलग-अलग खेमे में बंट सकते हैं, और यही पार्टी की बेचैनी का कारण है। इससे निजात के लिए आकाश सबसे मज़बूत कड़ी साबित हो सकते हैं।

एक नेता बताते हैं कि विधानसभा चुनाव तैयारियों की पिछली कई बैठकों में बीएसपी संगठन में इस पर गम्भीर चर्चाएं हुईं हैं और ताजा फेरबदल उसी का नतीजा है।

सभाएं कब-कहां 

मायावती ने अपने एक्स पोस्ट में बताया है कि आकाश आंनद 28 अक्तूबर को यूपी के बुलंदशहर, दो नवंबर को सहारनपुर, 20 नवंबर को अयोध्या, 22 नवंबर को आगरा और 29 नवंबर कानपुर में जनसभाओं को संबोधित करेंगे। इसके बाद 26 नवंबर को संविधान दिवस के मौके पर पंजाब में आयोजित समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करेंगे। डा.भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि पर वह छह दिसंबर को हरिद्वार (उत्तराखंड) में आयोजित जनसभा को भी संबोधित करेंगे। मायावती ने यह भी कहा कि बीते दिनों जो अप्रिय घटनाक्रम हुए, उसके लिए उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ ही जिम्मेदार थे।

आकाश के ससुर का रास्ता बंद 

मायावती यह भी स्पष्ट करने से नहीं चूकीं कि अब अशोक सिद्धार्थ की वापसी पार्टी में कभी नहीं होगी और उनकी वापसी के सारे कयास बेबुनियाद हैं। मायावती ने कहा कि उनके छोटे भतीजे ईशान आनंद लंदन में वकालत की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। ईशान उनके दिशा-निर्देशन में दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय में चुनाव व संगठन से जुड़े कार्यों में सहयोग करेंगे।