
रामविलास पासवान बिहार की राजनीति के दिग्गज नेता थे। उनके नाम 6 प्रधानमंत्रियों की सरकार में केंद्रीय मंत्री रहने का अनूठा रिकॉर्ड है। केंद्र में सरकार किसी भी पार्टी या गठबंधन की हो, लेकिन पासवान उस सरकार के साथ सांठगांठ कर लेते थे। यही कारण है कि उन्हें राजनीति का मौसम वैज्ञानिक कहा जाता था। आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने उन्हें यह उपाधि दी थी।
आज रामविलास पासवान की पुण्यतिथि है। आइए इस मौके पर उनके राजनीतिक जीवन के बारे में जानते हैं। बिहार के खगड़िया में रामविलास पासवान का जन्म 5 जुलाई 1946 को हुआ था। दलित परिवार में जन्मे रामविलास ने खगड़िया के कोसी कॉलेज से कानून की पढ़ाई की थी। इसके बाद उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया और कला में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की। उन्होंने 8 अक्टूबर 2020 को दुनिया को अलविदा कहा।
Published: 07 Oct 2025, 8:33 PM IST
राजनीति में आने से पहले रामविलास पासवान बिहार पुलिस में डीएसपी बने थे। वे साल 1969 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य के रूप में एक आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से बिहार विधानसभा के लिए चुने गए थे। साल 1974 में उन्होंने लोकदल के महासचिव पद की जिम्मेदारी संभाली। एक साल के बाद साल 1975 में 21 महीने के इमरजेंसी के दौरान रामविलास पासवान को गिरफ्तार कर लिया गया था और वे इमरजेंसी हटने तक जेल में रहे थे।
साल 1977 में जेल से रिहाई के बाद रामविलास पासवान ने जनता पार्टी के टिकट पर हाजीपुर से चुनाव लड़ा और जीत प्राप्त की। उस वक्त उन्होंने सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया था। साल 1980 और 1984 में उन्होंने फिर हाजीपुर निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की थी। रामविलास पासवान ने साल 1983 में 'दलित सेना' नामक संगठन बनाया था। इस संगठन का मकसद दलित समुदाय का कल्याण करना है। बाद में इस संगठन का नाम बदलकर अनुसूचित जाति सेना कर दिया गया।
Published: 07 Oct 2025, 8:33 PM IST
जनता दल से अलग होकर रामविलास ने लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) की स्थापना की थी। लोजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान की सिर्फ बिहार में ही नहीं, बल्कि केंद्र की राजनीति में अच्छी पकड़ थी। वे ऐसे राजनेता थे, जिन्होंने देश के 6 प्रधानमंत्रियों के साथ केंद्रीय मंत्री के रूप में काम किया। साल 2005 में राबड़ी देवी बिहार की सीएम थीं। फरवरी-मार्च में हुए विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन फिर भी सत्ता से दूर रह गई। इस चुनाव में एलजेपी किंग मेकर बनकर उभरी थी। बिहार में ऐसी स्थिति थी कि एलजेपी जिसे सपोर्ट करेगी, सरकार उसी की ही बनेगी।
लेकिन रामविलास पासवान ने लालू प्रसाद के सामने एक शर्त रख दी। उन्होंने कहा था कि अगर वे मुस्लिमों के सच्चे हितैषी हैं तो किसी मुस्लिम को राज्य की कमान सौंप दें। ऐसी स्थिति में एलजेपी सरकार को समर्थन देगी, लेकिन लालू यादव सत्ता के लिए कोई शर्त मानने के लिए तैयार नहीं हुए। ये राजनीतिक गतिविधि उस वक्त हो रही थी, जब लालू प्रसाद और रामविलास पासवान दोनों ही यूपीए सरकार में मंत्री थे। अंत में न तो लालू प्रसाद को सत्ता मिली और न ही रामविलास पासवान को। पार्टी को टूटता देखकर रामविलास पासवान ने राज्यपाल से राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की और केंद्र ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया।
Published: 07 Oct 2025, 8:33 PM IST
इस तरह रामविलास पासवान के एक हठ के कारण फरवरी 2025 में जनता द्वारा चुने गए विधायक शपथ भी नहीं ले सके। हालांकि, इस घटना से लालू यादव और रामविलास पासवान के संबंधों में हमेशा के लिए खटास आ गई हो, ऐसी बात नहीं है। बाद के चुनाव में जब रामविलास पासवान की पार्टी से कई विधायक नहीं जीता और वह भी लोकसभा चुनाव हार गए थे तो लालू यादव ने ही अपने पुराने दोस्त को आरजेडी के समर्थन से राज्यसभा भेजा था।
हालांकि, रामविलास पासवान ने एक बार फिर पलटी मारी और नरेंद्र मोदी के उभार के दौर में हवा को भांपते हुए बीजेपी के साथ हो गए और एनडीए के खेमे में पहुंच गए। रामविलास ने न सिर्फ खुद अपनी सीटी जीती, बल्कि बेटे चिराग पासवान समेत 6 लोकसभा सीटों पर पार्टी के उम्मीदवारों को जीत दिलवाई। इसके बाद रामविलास केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री बन गए। बाद में उनके निधन के बाद उनके बेटे चिराग केंद्र में मंत्री तो बन गए, लेकिन पार्टी पर कब्जे के लिए उन्हें चाचा पशुपति कुमार पारस से लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। आज चिराग न सिर्फ केंद्र में मंत्री हैं, बल्कि बिहार के भी एक बड़े नेता बनकर उभर रहे हैं।
Published: 07 Oct 2025, 8:33 PM IST
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Published: 07 Oct 2025, 8:33 PM IST