
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने CAPF बिल को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि देश की किसी भी पैरामिलिट्री फोर्स का नेतृत्व आज तक ऐसे अधिकारी ने नहीं किया है, जो उसी फोर्स में नीचे से ऊपर तक पदोन्नति पाकर शीर्ष पद तक पहुंचा हो। उनके अनुसार, पैरामिलिट्री बलों पर शीर्ष नेतृत्व बाहर से थोप दिया जाता है, जो पूरी तरह गलत व्यवस्था है और इससे जवानों का मनोबल प्रभावित होता है। राहुल गांधी ने कहा कि इस व्यवस्था का कांग्रेस ने लगातार विरोध किया है और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर सवाल उठाए हैं। इसके बावजूद सरकार इस मुद्दे पर अदालत की भावना को नज़रअंदाज़ कर रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन का मनोबल तब तक मजबूत नहीं रह सकता, जब तक उसके अपने अधिकारियों को नेतृत्व का अवसर नहीं दिया जाता।
राहुल गांधी ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक जैसे अधिकारी, जिन्होंने नक्सली मुठभेड़ के दौरान IED विस्फोट में अपना एक पैर खो दिया और देश की सुरक्षा के लिए बड़ा बलिदान दिया, उन्हें 15 साल से अधिक सेवा के बावजूद प्रमोशन और अपनी ही फोर्स का नेतृत्व करने का अवसर नहीं मिला। राहुल गांधी ने इसे संस्थागत अन्याय बताते हुए कहा कि यह समस्या केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों CAPF जवान इससे प्रभावित हैं।
राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने CAPF बिल उस दिन संसद में पेश किया, जब वे असम के दौरे पर थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने सरकार से बिल पेश करने में एक-दो दिन की देरी करने का अनुरोध किया था, लेकिन सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि वे इस मुद्दे पर संसद में अपनी बात रख सकें। कांग्रेस नेता ने कहा कि वर्तमान सरकार इस व्यवस्था को कानून के जरिए स्थायी बनाने की कोशिश कर रही है, जिससे देश की पहली सुरक्षा पंक्ति माने जाने वाले पैरामिलिट्री बलों का मनोबल कमजोर होता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी सभी पैरामिलिट्री बलों के साथ खड़ी है और उनकी सरकार बनने पर इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था को समाप्त कर जवानों को न्याय दिलाया जाएगा।
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