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डिजिटल शिक्षा में तमिलनाडु नंबर-1, सबसे ज्यादा ICT लैब और स्मार्ट क्लासरूम की मंजूरी

समग्र शिक्षा अभियान के तहत तमिलनाडु को सबसे ज्यादा ICT लैब और स्मार्ट क्लासरूम की मंजूरी मिली है, वहीं, राज्य ने केंद्र पर फंड जारी करने में देरी का आरोप लगाया है।

फोटो: IANS
फोटो: IANS 

केंद्र प्रायोजित समग्र शिक्षा अभियान (SSA) के तहत डिजिटल लर्निंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में तमिलनाडु ने दक्षिण भारत के सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। पिछले पांच वर्षों में राज्य को सबसे अधिक आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लासरूम की मंजूरी मिली है।

हालांकि, इस योजना के तहत सबसे ज्यादा वित्तीय मंजूरी मिलने के बीच राज्य का आरोप है कि केंद्र से फंड मिलने में देरी के कारण उसकी शिक्षा व्यवस्था पर भारी वित्तीय बोझ पड़ा है।

सरकारी स्कूलों में सबसे ज्यादा ICT लैब और स्मार्ट क्लासरूम की मंजूरी

संसद में पेश की गई जानकारी के आधार पर तमिलनाडु सरकार द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों के अनुसार, सरकारी स्कूलों के लिए मंजूर की गई आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लासरूम के मामले में राज्य केंद्र प्रायोजित समग्र शिक्षा अभियान का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है।

आंकड़े बताते हैं कि 2021-22 और 2025-26 शैक्षणिक वर्षों के बीच तमिलनाडु को 9,432 आईसीटी लैब की मंजूरी मिली, जो सभी दक्षिणी राज्यों में सबसे ज्यादा है।

यह संख्या तेलंगाना की तुलना में लगभग चार गुना ज्यादा है, जो दक्षिणी राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा। अकेले 2025-26 शैक्षणिक वर्ष के लिए तमिलनाडु को 2,166 आईसीटी लैब की मंजूरी मिली, जबकि तेलंगाना को 1,242 लैब की मंजूरी मिली।

स्मार्ट क्लासरूम शुरू करने में भी राज्य सबसे आगे रहा है। जब से तमिलनाडु के लिए 2024-25 में यह योजना शुरू की गई, तब से राज्य को 8,967 स्मार्ट क्लासरूम की मंजूरी मिली है, जो कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लिए मंजूर की गई संख्या से लगभग दोगुनी है।

इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में डिजिटल लर्निंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और टेक्नोलॉजी आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना है। तमिलनाडु ने इस कार्यक्रम के तहत सबसे ज्यादा वित्तीय मंजूरी भी हासिल की है।

सबसे ज्यादा मंजूरी, लेकिन फंड जारी होने में देरी का आरोप

केंद्र ने 2025-26 वित्तीय वर्ष के लिए राज्य को 167 करोड़ रुपए की मंजूरी दी, जबकि 2021-22 से 2025-26 के बीच कुल मंजूरी 655.25 करोड़ रुपए रही। हालांकि, राज्य के अधिकारियों का कहना है कि मंजूर की गई राशि जारी नहीं की गई है, जिससे तमिलनाडु को अपने संसाधनों का इस्तेमाल करके ये सुविधाएं चलानी पड़ रही हैं।

अधिकारियों ने बताया कि राज्य आईसीटी इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव और लैब इंस्ट्रक्टर की सैलरी का खर्च खुद उठा रहा है, जिस पर हर साल कई करोड़ रुपए खर्च होते हैं।

3 साल से फंड नहीं मिलने का दावा, NEP को बताया वजह

तमिलनाडु में समग्र शिक्षा की प्रोजेक्ट डायरेक्टर एम. आरती ने कहा कि राज्य अपने बजट से ही इस कार्यक्रम के लिए फंड दे रहा है, क्योंकि पिछले तीन वर्षों से केंद्र से सहायता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि इस देरी से कामकाज प्रभावित हो रहा है, खासकर लैब इंस्ट्रक्टर की सैलरी जैसे नियमित खर्चों को पूरा करने में दिक्कत आ रही है।

राज्य के अधिकारियों के मुताबिक, केंद्र ने तमिलनाडु द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू नहीं करने का हवाला देते हुए फंड जारी करने पर रोक लगा दी है।

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