ममता कालिया को साहित्य अकादमी पुरस्कार, ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए सम्मान
ममता कालिया को आधुनिक पीढ़ी की उन महिला कथाकारों में शामिल किया जाता है जिन्होंने मध्यम वर्गीय परिवारों, शहरों में कामकाजी और घरेलू महिलाओं के जीवन के तमाम सतरंगी अनुभवों को अपनी गहरा प्रभाव छोड़ने वाली शैली में कथाओं और उपन्यासों में पेश किया।

हिंदी की वरिष्ठ साहित्यकार ममता कालिया के संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ को साल 2025 के साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया है। साहित्य अकादमी ने सोमवार को यह घोषणा की। इसके साथ ही अंग्रेजी में ‘क्रिमसन स्प्रिंग’ (उपन्यास) के लिए नवतेज सरना को और उर्दू में ‘सफ़र जारी है’ (कविता) के लिए प्रितपाल सिंह बेताब को अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया है।
दो नवम्बर, 1940 को वृन्दावन में जन्मीं ममता कालिया हिन्दी कथा साहित्य के परिदृश्य पर सातवें दशक से निरन्तर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘‘दुक्खम सुक्खम’, ‘सपनों की होम डिलिवरी’, ‘कल्चर-वल्चर’ (उपन्यास); ‘छुटकारा’, ‘उसका यौवन’, ‘मुखौटा’, ‘खाँटी घरेलू औरत’, ‘कितने प्रश्न करूँ’, (कविता-संग्रह); ‘आप न बदलेंगे’ (एकांकी-संग्रह); ‘कल परसों के बरसों’, ‘कितने शहरों में कितनी बार’, ‘अन्दाज़-ए-बयाँ उर्फ़ रवि कथा’ आदि शामिल हैं।
इससे पूर्व उन्हें ‘व्यास सम्मान’, ‘यशपाल स्मृति सम्मान’, ‘महादेवी स्मृति पुरस्कार’ सहित विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। ममता कालिया को आधुनिक पीढ़ी की उन महिला कथाकारों में शामिल किया जाता है जिन्होंने मध्यम वर्गीय परिवारों, शहरों में कामकाजी और घरेलू महिलाओं के जीवन के तमाम सतरंगी अनुभवों को अपनी गहरा प्रभाव छोड़ने वाली शैली में कथाओं और उपन्यासों में पेश किया। उनकी कहानियों की भाषा अत्यंत सरल होने के बावजूद अपने पाठकों के साथ संवाद करती है।
ममता कालिया के साथ ही 24 भारतीय भाषाओं के लिए इन पुरस्कारों की घोषणा की गई। इन पुरस्कारों में आठ कविता संग्रह, चार उपन्यास, छह कहानी संग्रह, दो निबंध, एक साहित्यिक आलोचना, एक आत्मकथा और दो संस्मरण की पुस्तकें शामिल हैं। साहित्य अकादमी द्वारा इस संबंध में जारी विज्ञप्ति के अनुसार, पुरस्कार स्वरूप एक उत्कीर्ण ताम्रफलक, शॉल और एक लाख रूपये की राशि पुरस्कृत लेखकों को 31 मार्च 2026 को नयी दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान की जाएगी।
अकादमी द्वारा जिन लेखकों को पुरस्कारों के लिए चुना गया है उनमें असमिया भाषा के उपन्यास ‘कड़ि खेलर साधु’ के लिए देवब्रत दास, बांग्ला में ‘श्रेष्ठ कबिता’ (कविता) के लिए प्रसून बंद्योपाध्याय, ‘दोंनै लामाः मोनसे गाथोन’ (बोडो भाषा में उपन्यास) के लिए सहायसुलि ब्रह्म को और डोगरी में ‘ठाकुर सतसई’ (कविता, दोहे) के लिए खजूर सिंह ‘ठाकुर’ को यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
गुजराती में ‘भट्टखडकी’ (कविता) के लिए योगेश वैद्यको, कन्नड में दडा सेरिसु तंदे (कहानी) के लिए अमरेश नुगडोणी को, कश्मीरी में ‘नजदावनेकी पॉट अलाव’ (कविता) के लिए अली शैदा, कोंकणी में ‘कोंकणी काव्यें: रुपां आनी रूपकां (आलोचनात्मक निबंध) के लिए हेनरी मेंडोनका (एच्चेम पेरनाळ) को यह पुरस्कार दिया जाएगा।
इसी प्रकार मैथिली में ‘धात्री पात सन गाम’ (संस्मरण) के लिए महेन्द्र को, मलयालम में मायामानुष्यर (उपन्यास) के लिए एन. प्रभाकरन को, मणिपुरी में ‘कंगलमद्रीब इफुत’ (कहानी) के लिए हाओबम नलिनि को, मराठी में ‘कालयानियया रेषा’ (आत्मकथा) के लिए राजू बाविस्कर, नेपाली में ‘नेपाली पारम्परिक संस्कृति र सभ्यताको ढुकुटी’ (निबंध) के लिए प्रकाश भट्टराई, ओड़िआ में ‘पदपुराण’ (कविता)के लिए गिरिजाकुमार बलियारसिंह को यह पुरस्कार दिया जाएगा।
वहीं, पंजाबी में ‘सेफ्टी किट’ (कहानी) के लिए जिंदर, राजस्थानी में ‘भरखमा’ (कहानी) के लिए जितेंद्र कुमार सोनी, संस्कृत में ‘प्रस्थानचतुष्टये ब्रह्मघोषः’ (कविता) के लिए महामहोपाध्याय साधु भद्रेशदास, संथाली में ‘मिड बिर्ना चेनने साओन इनाग सागई’ (कहानी) के लिए सुमित्रा सोरेन, सिंधी में ‘वाघू’ (कहानी) के लिए भगवान अटलानी, तमिल में ‘तमिळ सिरुकथैयिन थडंगल’ (साहित्यिक आलोचना) के लिए सा. तमिलसेलवन, तेलुगु में ‘अनिमेष’ (कविता) के लिए नंदिनी सिद्धरेड्डी को साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।