नौकरियां नहीं, नौकरी करने वालों के लिए नारे तैयार करने में जुटी मोदी सरकार, अब कर रही ‘वन नेशन, वन पे डे’ की बात

आर्थिक मंदी के बीच देश में नौकरियां नहीं है औरजिनके पास नौकरियां है उनकी नौकरियां जा रही है। ऐसे में रोजगार मुहैया कराने केबजाए मोदी सरकार ने एक नया शिगुफा छोड़ दिया है। मोदी सरकार ‘वननेशन, वन पे डे’ की बात कर रही है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

मोदी सरकार में देश में बेरोजगारी दर रिकॉर्ड छू रही है। अब हालत यह है कि कई सेक्टरों में लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोने के लिए मजबूर होना पड़ा रहा है। कई ऐसे सेक्टर है कि नौकरियों पर संकट बनी हुई है। लेकिन मोदी सरकार बेरोजगारी और नौकरियां पैदा करने पर चिंता के बजाए नया शिगुफा छोड़ दिया है। मोदी सरकार अब वन नेशन, वन पे डे’ की बात कर रही है, लेकिन दिक्कत यह है कि मोदी सरकार देश में नौकरी की नहीं नौकरी करने वालों की बात कर रही है।

मोदी सरकार में केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने जानकारी देते कहा कि देश में सैलरी को लेकर एक जैसी व्यवस्था लागू होनी चाहिए। इससे हर सेक्टर में काम कर रहे कर्मचारियों और मजदूरों को एक दिन ही सैलरी मिलेगी। श्रम मंत्री ने बताया कि सरकार व्यावसायिक सुरक्षा, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड, कोड ऑन वेजेज आदि को लागू करने की दिशा में काम कर रही है। इसके अलावा सरकार यूनिफॉर्म मिनिमम वेज प्रोग्राम को भी लागू करने की दिशा में काम कर रही है। इससे मजदूरों की जिंदगी में बदलाव आएगा।

ऐसे में सवाल उठता है कि देश में नौकरियां बची कहा हैं। रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि आने वाले 4 सालों में देश में नौकरियों पर संकट गहरा सकता है और इसमें 33 फीसदी गिरावट हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में नई नौकरियों कम पैदा होंगी और इसकी वजह मशीनीकरण (ऑटोमेशन) को बताया जा रहा है। बीते दिनों मीडिया में टीमलीज सेवा के हवाले से एक खबर प्रकाशित हुई थी, जिसमें बताया गया था कि ई-कॉमर्स, बैंकिंग, फाइनेशियल सर्विस, इंश्योरेंस और बीपीओ-आईटी सेक्टर की नौकरियों में साल 2019-23 के बीच 37% की गिरावट आ सकती है। यह गिरावट 2018-22 की अनुमानित आंकड़ों से भी नीचे है।

रिपोर्ट के मुताबिक बताया गया था कि मार्केटिंग, एडवरटाइजिंग, कृषि, एग्रोकेमिकल, टेलीकम्यूनिकेशंस, बीपीओ, आईटी, मीडिया, एंटरटेनमेंट, हेल्थकेयर और फार्मास्यूटिकल जैसे अहम क्षेत्रों में भी नौकरियों की कमी हो सकती है। बीते दिनों में ऑटो सेक्टर, मोबाइल सेक्टर समेत कई सेक्टरों को लेकर बुरी खबर आई थी। हालात यह है कि ऑटो सेक्टरो में 10 लाख नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। ऑटो सेक्टर की कई बड़ी कंपनियों ने बीते दिनों काम बंद करने की घोषणा की थी। जिसमें मारुति सुजुकी, अशोक लेलैंड जैसी बड़ी कंपनियां थी।

अगर मोबाइल सेक्टर की बात करे तो बीते दो सालों में इस सेक्टर में काम करने वाले 2,50,000 से अधिक लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। बता दें कि पिछले 45 दिनों में बेरोजगारी चरम पर है। यह आकंड़ा नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस के पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे से सामने आया था। रिपोर्ट के मुबाबिक बताया गया था कि कि देश में बेरोजगारी का आंकड़ा 1972-73 के बाद के अधिकतम स्तर पर पहुंच चुका है।

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