बदहाल अर्थव्यवस्था पर सोनिया गांधी ने जताई चिंता, कहा- दिशाहीन सरकार में निवेशकों का विश्वास डगमगाया

कांग्रेसने अर्थव्यवस्था के मुश्किल हालात पर चिंता जताते हुए फैसला किया कि आर्थिक मंदी के खिलाफ अगले महीने पूरे देश में प्रदर्शन किया जाएगा। सोनिया गांधी ने कहा कि निवेशकों का विश्वास डगमगा गया है और सरकार अधिक से अधिक दिशाहीन और असंवेदनशील बन गई है।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया

नवजीवन डेस्क

एआईसीसी में कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी जी की अध्यक्षता में कांग्रेस महासचिवों, प्रभारियों, प्रदेश अध्यक्षों और सीएलपी नेताओं की बैठक हुई। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने देश में व्याप्त बेरोजगारी और गंभीर आर्थिक संकट पर चिंता व्यक्त की। ये जानकारी कांग्रेस नेता आरपीएन सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस करके दी।

आरपीएन सिंह ने आगे कहा, “कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सभी प्रदेश कांग्रेस समितियों को आर्थिक संकट, बेरोजगारी, किसानों की समस्या को लेकर व्यापक स्तर पर आंदोलन खड़ा करने के निर्देश दिए। इसी संदर्भ में 15 से 25 अक्टूबर तक कांग्रेस पार्टी देशव्यापी आंदोलन खड़ा करेगी।”

उन्होंने आगे कहा, “सोनिया गांधी ने आंदोलनात्मक कार्यक्रमों की जरूरत पर जोर देते हुए कांग्रेस के नेताओं को अनिवार्य रूप से गांव-गरीब के बीच जाने और उनकी दिक्कतों को उठाने की बात कही। एक बात पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं को सिर्फ सोशल मीडिय तक सीमित नहीं रहना होगा। बल्कि, देश के गांव-गरीब और जनता के बीच पहुँचने की जरूरत है।”

आरपीएन सिंह ने बताया कि बैठक में सोनिया गांधी ने कहा कि निवेशकों का विश्वास डगमगा गया है और सरकार अधिक से अधिक दिशाहीन और असंवेदनशील बन गई है। सोनिया गांधी ने प्रतिशोध की राजनीति पर भी चिंता व्यक्त की। जो लोग सरकार की गलतियों पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है।”

आरपीएन सिंह ने बताया कि मनमोहन सिंह ने दो बातों पर विशेष जोर दिया। पहला रियल एस्टेट के क्षेत्र में देश के आठ बड़े शहरों में 4.50 लाख मकान बनकर बेकार पड़े हैं, उनको खरीदने वाला कोई नहीं है। इससे बेरोजगारी बढ़ रही है। दूसरा ये कि डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत रोज गिर रही है। जब रुपया गिरता है, तो इसका एक फायदा निर्यात में मिलता है। लेकिन, बीजेपी सरकार में रुपए के साथ-साथ निर्यात भी गिर रहा है। यह चिंता का विषय है।”

उन्होंने बताया कि बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार सबसे पहले अर्थव्यवस्था में गड़बड़ी को स्वीकार करे। जब तक सरकार गड़बड़ी को नहीं मानेगी, तब तक सुधार नहीं होगा। जब तक आदमी अर्थव्यवस्था में जो दिक्कतें हैं, उसको नहीं मानेगा, तो सरकार कैसे उसके लिए ठीक काम कर सकती है?”

उन्होंने बताया कि डॉ मनमोहन सिंह जी ने रियल एस्टेट की बात की कि सिर्फ 8 मेट्रोपोलिटन शहरों में, जो 8 बड़े शहर हैं, उनमें साढ़े चार लाख आवास बनकर तैयार हैं, पर ना उनको लेने वाला कोई है, ना उनको कोई खरीदने वाला है, तो जिस तरह के हालात रियल एस्टेट में है, उसकी वजह से कितनी दिक्कतें हैं और कितनी नौकरियां लोगों को खोनी पड़ रही हैं।

बैठक में सोनिया गांधी के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, पार्टी के वरिष्ठ नेता एके एंटनी, अहमद पटेल, गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा पार्टी के कई महासचिव-प्रदेश प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता शामिल रहे।

लोकप्रिय