''रेड अलर्ट' पर अर्थव्यवस्था के सारे बुनियादी संकेतक', जयराम बोले- स्थिति संभालने के बजाय ध्यान भटकाने में लगी है मोदी सरकार

जयराम रमेश ने बुधवार को मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि जब देश की अर्थव्यवस्था के सारे बुनियादी संकेतक 'रेड अलर्ट' पर हैं, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार स्थिति को संभालने की बजाय जनता का ध्यान भटकाने में लगी हुई है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश
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महंगाई को लेकर ताजा रिपोर्ट चिंता पैदा करने वाले हैं। पहले खुदरा महंगाई दर और फिर थोक महंगाई दर दोनों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। खाने पीने की चीजें लगातार महंगी होती जा रही है। थोक महंगाई दर तो 44 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। कांग्रेस ने इसे देश की अर्थव्यवस्था लिए ‘रेड अलर्ट’ माना है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने बुधवार को मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि जब देश की अर्थव्यवस्था के सारे बुनियादी संकेतक 'रेड अलर्ट' पर हैं, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार स्थिति को संभालने की बजाय जनता का ध्यान भटकाने में लगी हुई है।

'लगातार आर्थिक संकट की तरफ जा रहा देश'

जयराम रमेश ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस "आर्थिक नाकामी" पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि मोदी सरकार की ‘‘जनविरोधी नीतियों’’ की वजह से देश लगातार आर्थिक संकट की तरफ जा रहा है।

उन्होंने कहा, "कांग्रेस पिछले कुछ महीनों से सरकार को इस स्थिति के प्रति बार-बार आगाह करती रही है। 44 महीने में सबसे भीषण थोक महंगाई (9.87 प्रतिशत), ईंधन-बिजली में 27.4 प्रतिशत की आग के बीच इस बार तीन साल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर खेती की बुवाई हुई है।"

उन्होंने कहा कि आम जनता बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से पस्त है और ‘‘देश का अन्नदाता सरकार की गलत नीतियों एवं मौसम की दोहरी मार से त्रस्त है।’’

उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ने से उद्योगों की लागत भी बढ़ चुकी है।


'मोदी सरकार ‘हेडलाइन’ चमकाने में व्यस्त'

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जब देश की अर्थव्यवस्था के सारे बुनियादी संकेतक ‘‘रेड अलर्ट' पर हैं’’, तब मोदी सरकार स्थिति को संभालने की बजाय जनता का ध्यान भटकाने के लिए केवल ‘हेडलाइन’ चमकाने में व्यस्त है।

रमेश के अनुसार, सरकार महंगाई को नियंत्रित करने के बजाय उसके भयावह आंकड़ों को केवल छिपाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि थोक महंगाई के नवीनतम आंकड़े मोदी सरकार की बुरी आर्थिक नीतियों और विफलता का जीता-जागता दस्तावेज़ हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जब देश का हर वर्ग त्राहि-त्राहि कर रहा है, तब सरकार की प्राथमिकताएं आखिर कहां खोई हुई हैं।’’

44 महीने के उच्चतम स्तर पर थोक महंगाई दर

 जून 2026 के महीने में भारत की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 9.87 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह 44 महीने का सबसे उच्चतम स्तर है। मई में यह आंकड़ा 9.68 प्रतिशत पर था। कमोडिटी की बढ़ती कीमतों और खाद्य पदार्थों में आए भारी उछाल ने इस बढ़ोतरी को हवा दी है। खास बात यह है कि यह आंकड़े संशोधित आधार वर्ष 2022-23 पर आधारित हैं। इस उछाल ने न केवल विनिर्माण क्षेत्र की लागत बढ़ा दी है, बल्कि आगामी दिनों में खुदरा बाजार में भी कीमतों के बढ़ने का गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।


खुदरा महंगाई 17 महीने के उच्चतम स्तर

थोक महंगाई का सीधा असर खुदरा महंगाई (सीपीआई) पर पड़ता है। जून में खुदरा महंगाई दर भी 17 महीने के उच्चतम स्तर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई है (जो मई में 3.93 प्रतिशत थी)। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को खुदरा महंगाई दर 4 प्रतिशत (2% के उतार-चढ़ाव के दायरे के साथ) पर बनाए रखने का लक्ष्य मिला हुआ है। इन परिस्थितियों को देखते हुए, आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने महंगाई अनुमान को 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है।

पीटीआई के इनपुट के साथ

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