पीएम केयर्स फंड में चीनी कंपनियों के करोड़ों रुपये के दान पर कांग्रेस बोली- सरकार समझाए 9678 करोड़ का गणित

पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर मोदी सरकार को घेरा है। कांग्रेस का कहना है कि पिछले दिनों में सरकार की तरफ से आरोप-प्रत्यारोप आए हैं, लेकिन तथ्यों के आधार पर कोई जवाब नहीं आया है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, लेकिन असल में इस हिंसक झड़प का क्या कारण था? आखिर ऐसा क्या हुआ था जिससे 20 भारतीय जवान शहीद हो गए? इन सवालों का जवाब ना तो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास है और ना ही बीजेपी के नुमाइंदों ने इसपर कुछ कहा है। बस ये कहकर बात टाल दी गई है कि अब LAC पर स्थिति सामान्य है। लेकिन विपक्ष भी लगातार इसका जवाब सरकार से मांगने में लगा हुआ है।

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कांग्रेस के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने रविवार को एक बार फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार से इन्हीं सवालों का जवाब मांगते हुए निशाना साधा है। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि मोदी सरकार के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा महत्वपूर्ण नहीं है। इसके लिए वही महत्वपूर्ण है- जो ये बोल दे। उस एक व्यक्ति के बारे में हम सब जानते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के इतने बड़े मुद्दे के बीच इस सरकार का ध्यान RGF पर है। पिछले दिनों में सरकार की तरफ से आरोप-प्रत्यारोप आए हैं, लेकिन तथ्यों के आधार पर कोई जवाब नहीं आया है। अतीत की बातें हुई है, मगर राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई ठोस जवाब नहीं आया।

अभिषेक मनु सिंघवी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 10-12 साल में चीन से जितना संपर्क भाजपा के अध्यक्षों का रहा है, उतना देश की किसी भी पार्टी का नहीं रहा। अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि साल 2007 और 2008 में राजनाथ सिंह की CPC से भेंट हुई, 2009 में RSS की मुलाकात, 2011 में गडकरी जी की अध्यक्ष की हैसियत से चीन यात्रा, 2014 में अमित शाह द्वारा सांसदों का दल चीन भेजना। इतनी यात्राएं किसी पार्टी ने नहीं की। सिंघवी ने आगे कहा कि चीन से मोदी जी जितने संपर्क शायद किसी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नहीं रहे। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री रहते चीन दौरा या आदान-प्रदान सब जानते हैं। मगर इन सालों में मोदी ने चीन से 18 बैठकें की है। अगर 2013 की बात करें तो डेपसांग और वाई जंक्शन में चीन ने यही प्रयत्न किया था। लेकिन उन्हें वहां से हटा दिया गया। जब झूला झुला रहे थे, तब चुमार हुआ और 2017 में डोकलाम हुआ।

अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में PM cares fund में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए कहा कि इन दिनों कोविड के नाम पर एक नया फण्ड बना- PM cares fund। ये कैग में नहीं है, RTI में नहीं है, कोई पारदर्शिता नहीं है, कोई जवाबदेही नहीं। इसमें 9678 करोड़ रुपये का फण्ड चीन से आया है। इस फण्ड में 7 करोड़ Huwai द्वारा दिया गया है। यह कम्पनी चीनी आर्मी PLA से सम्बंधित है। टिक-टॉक ने 30 करोड़, Paytm ने 100 करोड़ दिए हैं। जिओमी से 15 करोड़ और ओप्पो से 1 करोड़ की सूचना है। ये पैसा कैसे आ रहा है? कहाँ जा रहा है? ये बहुत अचरज की बात है। क्योंकि इसकी कोई जवाबदेही तो है नहीं।

अभिषेक मनु सिंघवी ने पूछा कि अगर प्रधानमंत्री इस तरह से राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करेंगे, जवाबदेही को नजरअंदाज करेंगे और फिर कहेंगे कि कांग्रेस सवाल करने की हिम्मत कैसे कर रही है? हम सवाल पूछते रहेंगे। आखिर में सिंघवी ने पूछा प्रधानमंत्री आखिर चीन के मामले में स्पष्टता क्यों नहीं बरत रहे?

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