'जस्टिस उज्जल भुइयां की टिप्पणियों से ज्ञानेश कुमार बेनकाब', जयराम बोले- उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि कुमार की ‘‘जी-2 के अवैध आदेशों को लागू करने की क्षमता’’ अब उन्हें देश के लिए एक बोझ बना चुकी है। रमेश 'जी2' शब्द का इस्तेमाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के लिए करते हैं।

'जस्टिस उज्जल भुइयां की टिप्पणियों से ज्ञानेश कुमार बेनकाब', जयराम बोले- उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं
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  • कांग्रेस ने जस्टिस उज्जल भुइयां की हालिया टिप्पणियों को लेकर ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा

  • जयराम रमेश ने कहा कि जस्टिस उज्जल भुइयां के बयान ने ज्ञानेश कुमार को "बेनकाब’’ कर दिया है

  • जयराम ने कहा, "अगर ज्ञानेश कुमार में जरा भी शर्म है तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए"

कांग्रेस ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां की हालिया टिप्पणियों को लेकर निर्वाचन आयोग और उसके प्रमुख ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जस्टिस उज्जल भुइयां के बयान ने ज्ञानेश कुमार को "बेनकाब’’ कर दिया है और उन्हें अब पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में क्या लिखा?

जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक खबर साझा करते हुए दावा किया कि जस्टिस भुइयां ने मतदान के अधिकार को संविधान की मूल संरचना का हिस्सा बताते हुए जो टिप्पणी की है, उससे यह निष्कर्ष निकलता है कि संवैधानिक पद पर बैठे कुमार ने संविधान का उल्लंघन किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘जस्टिस भुइयां ने और भी बहुत कुछ कहा है और सीईसी को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। अगर ज्ञानेश कुमार में जरा भी शर्म है तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।’’

रमेश ने आरोप लगाया कि कुमार की ‘‘जी-2 के अवैध आदेशों को लागू करने की क्षमता’’ अब उन्हें देश के लिए एक बोझ बना चुकी है। रमेश 'जी2' शब्द का इस्तेमाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के लिए करते हैं।


जस्टिस उज्जल भुइयां ने क्या कहा?

जस्टिस उज्जल भुइयां ने रविवार को हैदराबाद स्थित नालसार विश्वविद्यालय में '19वीं न्यायमूर्ति बी.आर. साहनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता' के समापन समारोह में कहा था कि ऐसी कोई भी प्रक्रिया, जिसके परिणामस्वरूप लाखों भारतीय नागरिकों को मताधिकार से वंचित किया जाता है, ‘‘स्वाभाविक रूप से मनमानी’’ होगी और संविधान के तहत स्थापित संवैधानिक व्यवस्था का निषेध होगी।

उन्होंने कहा था कि संविधान नागरिकों के दो वर्ग, "मताधिकार वाले और मताधिकार से वंचित" नहीं बनाता। उनका यह भी कहना था कि बड़े पैमाने पर लोगों को मताधिकार से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 326 और 14 का उल्लंघन है।

पीटीआई के इनपुट के साथ

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