पूर्व राष्ट्रपति मुखर्जी ने सरकार को दिखाया आईना, बोले- सड़कों पर आए युवाओं की संविधान में आस्था दिल छूने वाली

प्रथम सुकुमार सेन व्याख्यान में बोलते हुए पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र को बार-बार परखा गया है। पिछले कुछ महीनों में अपने विचार रखने के लिए युवाओं समेत बड़ी संख्या में सड़कों पर निकले लोगों की संविधान में आस्था दिल को छू लेने वाली है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार को देश के मौजूदा हालात पर इशारों-इशारों में केंद्र की मोदी सरकार को बड़ी नसीहत दे दी। उन्होंने साफतौर पर बीते कई दिनों से देश भर में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र को बार-बार परखा गया है। लेकिन पिछले महिनों के दौरान विभिन्न मुद्दो को लेकर देश भर में सड़कों पर उतरे लोगों की संविधान में आस्था दिल को छू लेने वाली है।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने व्याख्यान में संशोधित नागरिकता कानून पर देश में जारी विरोध प्रदर्शनों की तरफ इशारा करते हुए सरकार को एक तरह से बहस और चर्चा की नसीहत देते हुए कहा कि आम सहमति लोकतंत्र की जीवनदायिनी है। लोकतंत्र सुनने, विचार-विमर्श करने, चर्चा करने, बहस करने और यहां तक कि असहमति से पनपता है और निखरता है। उन्होंने कहा कि उनका साफ मानना है कि देश में जारी शांतिपूर्ण आंदोलनों की मौजूदा लहर एक बार फिर से हमारे लोकतंत्र की जड़ों को और गहराई और मजबूती देगी।

पूर्व राष्ट्रपति ने भारत के निर्वाचन आयोग की तरफ से आयोजित पहले सुकुमार सेन स्मृति व्याख्यान को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि सहमति और असहमति लोकतंत्र के दो मूल तत्व हैं। जाति और समुदाय के आधार पर मतदाताओं का बंटवारा ध्रुवीकृत बहुमत तैयार करता है, जो सही नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा भारतीय लोकतंत्र में निहित आत्मसात करने की शक्ति ने सफलतापूर्वक कई अलगाववादी आंदोलनों को नाकाम किया है और सफल चुनावों ने विभिन्न समूहों को चुनावी मुख्यधारा में सफलतापूर्वक शामिल किया है।

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