गजब की तकनीक! दक्षिण कोरिया में अनोखे टेस्ट का आविष्कार, इसे सूंघकर कोरोना मरीजों का चलेगा पता

दक्षिण कोरिया के प्रमुख शहरों में भी यह टेस्ट किया जा रहा है। स्क्रिनिंग की इस प्रक्रिया के तहत लोगों को सेब का सिरका सूंघने के लिए कहा जाता है। यदि लोग इसकी खुशबू ले लेते हैं तो ठीक वरना इसे कोरोना का शुरुआती लक्षण माना जाता है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

दुनियाभर में कहर बरपा रहे कोरोना वायरस से हर घंटे में कई लोग चपेट में आ रहे हैं। ये वायरस काफी तेजी से फैल रहा है। इसके तेजी से फैलने के पीछ का एक कारण इसके संक्रमण का देर से पता चलना है। कोविड-19 को रोकने के लिए वैज्ञानिक दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। इस बीच दक्षिण कोरिया स्थित अमेरिकी सैन्य बेस ने कोरोना के शुरुआती लक्षणों का पता लगाने का एक अनोखा समाधान निकाला है। उन्होंने यहां लोगों का स्मेल टेस्ट करना शुरू किया है। इससे यह पता चल जाता है कि व्यक्ति कोविड-19 से संक्रमित है या नहीं। पूरे सैन्य बेस में इस स्मेल टेस्ट को अंजाम दिया जा रहा है।

लोगों को सेब सूंघने के लिए कहा जाता है

सैन्य बेस के गेट और करीबी इलाकों में अमेरिकी सेना के अधिकारी कैरोल और हेनरी यह टेस्ट कर रहे हैं। इसके अलावा दक्षिण कोरिया के प्रमुख शहरों में भी यह टेस्ट किया जा रहा है। स्क्रिनिंग की इस प्रक्रिया के तहत लोगों को सेब का सिरका सूंघने के लिए कहा जाता है। यदि लोग इसकी खुशबू ले लेते हैं तो ठीक वरना इसे कोरोना का शुरुआती लक्षण माना जाता है। इस टेस्ट में फेल होने के बाद संभावित लोगों की स्क्रीनिंग की जाती है। बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के अलग-अलग मेडिकल संस्थानों ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति की सूंघने और स्वाद का पता लगाने की शक्ति समाप्त हो जाती है।

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देगु के सैन्य बेस पर हुई थी स्क्रीनिंग की शुरुआत

सबसे पहले कोरोना की स्क्रीनिंग की शुरुआत दक्षिण कोरिया में देगु के सैन्य बेस पर हुई थी। यहां सभी के लिए स्मैल टेस्टिंग के अलावा तापमान चेक करना और प्रश्नावली के जवाब देना अनिवार्य कर दिया गया था। इसी वजह से बेस में अबतक एक भी मामला सामने नहीं आया है। इसके बाद देश के अन्य सैन्य बेस और बड़े शहरों में यह स्क्रिनिंग प्रक्रिया आवश्यक कर दी गई। गैरीसन सैन्य बेस के कमांडिंग अफसर एडवर्ड बैलेंकों के मुताबिक सावधानी बरतने की वजह से ही हमारे बेस पर एक भी सदस्य संक्रमित नहीं हुआ।

गैरीसन सैन्य बेस के कमांडिंग अधिकारी एडवर्ड बैलंकों के अनुसार इस तत्परता के चलते ही उनके बेस पर एक भी सदस्य कोरोना से संक्रमित नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि स्थानीय अस्पतालों में ऐसी ही स्क्रिनिंग हो रही है। जिसमें व्यक्ति को सिरके में भीगी रुई सूंघने और कुछ सवालों के जवाब पूछे जाते हैं। वहीं डब्ल्यूएचओ भी गंधहीनता और स्वादहीनता के कोरोना से संबंध के बारे में शोध कर रहा है।

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गौरतलब है कि इस समय पूरी दुनिया में कोरोना के संक्रमण बड़ी तेजी से फैल रहे हैं। विश्वभर में अबतक इसकी चपेट में 14 लाख से ज्यादा लोग आ गए हैं। जितनी तेजी से इस वायरस के संक्रमण फैल रहे है उतनी ही तेजी से लोगों की जान भी जा रही है। अब तक इस वायरस से 80 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो कोरोना के खिलाफ इस जंग को जीत गए हैं। ऐसे लोगों की संख्या 3 लाख के पार बताई जा रही है।

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