लोकतंत्र के पन्ने: कांग्रेस के इस गढ़ को भेदना बीजेपी के लिए नामुमकिन, 9 बार यहां से सांसद रह चुके हैं कमलनाथ 

मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रही है। इस लोकसभा क्षेत्र में चौथे चरण में 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। इस बार छिंदवाडा से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ चुनावी मैदान में हैं।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र में चौथे चरण में 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। यह लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रहा है। एक बार को छोड़कर अभी तक हुए सभी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी को यहां से जीत मिली है। इस सीट पर सिर्फ एक बार 1997 के लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। इस बार छिंदवाडा से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ चुनावी मैदान में हैं।

छिंदवाड़ा एक समय मध्य प्रदेश का सबसे पिछड़ा इलाका माना जाता था। लेकिन वर्तमान में देश की कई नामी कंपनियों की फैक्ट्री इस शहर में है। इसका श्रेय भी लोग कमलनाथ को देते हैं। 1957 से छिंदवाड़ा सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा है। 1977 में जनता पार्टी की लहर के बावजूद भी कांग्रेस ने यहां से चुनाव जीता और गार्गी शंकर मिश्रा सांसद बनी। कमलनाथ 1980 में पहली बार इस सीट से सांसद बने थे।

कांग्रेस की पकड़ इस सीट पर कितनी मजबूत है इस बात का अंदाजा इस बात से लागाय जा सकता है कि 2014 में मोदी लहर के बाद भी बीजेपी यहां से जीत हासिल करने में नाकाम रही थी। 1952 में पहले लोकसभा चुनाव कराए गए। चुनाव में कांग्रेस के रायचंद भाई शाह यहां से पहले सांसद बने। वहीं 1957 और 1962 में कांग्रेस के ही बीकूलाल लखचिचंद चुनाव जीतने में कामयाब रहे। इसके बाद 1967, 1971 और 1977 के अगले तीन चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर गार्गीशंकर मिश्रा लोकसभा पहुंचे। 1980 में पहली बार कमलनाथ यहां से चुनावी मैदान में उतरे। पहली बार में ही उन्हें छिंदवाड़ा के मतदाताओं ने भारी मतों से विजयी बनाकर संसद भेजा। कमलनाथ 1980 से लेकर 1991 तक हुए 3 चुनावों में जीत हासिल किए। 1996 के चुनाव में इस सीट पर कमलनाथ की पत्नी अलकानाथ लड़ीं। यहां की जनता ने उन्हें भी निराश नहीं किया और उन्होंने बीजेपी के चौधरी चंद्रभान सिंह को मात दी।

कांग्रेस को एक मात्र बार 1997 में छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर हार का सामना करना पड़ा। बीजेपी के दिग्गज नेत सुंदर लाल पटवा कमलनाथ को हराने में कामयाब हुए। लेकिन अगले ही चुनाव में कमलनाथ ने पिछली बार का बदला लिया। 1998 से लेकर 2014 तक इस सीट पर हुए 5 चुनावों में सिर्फ और सिर्फ कमलनाथ का ही जादू चला है। बीजेपी का कोई उम्मीदवार कमलनाथ को हराने में कामयाब नहीं हुआ।

2014 लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद कमलनाथ ने बीजेपी के चौधरी चंद्रभान सिंह को हराया। कमलनाथ ने चंद्रभान सिंह को 1,16,537 मतों से हराया। कमलनाथ को 5,59,755 वोट मिले थे तो वहीं चंद्रभान सिंह को 4,43,218 वोट मिले थे। 2009 के लोकसभा चुनाव में भी कमलनाथ को ही जीत मिली थी। उन्होंने बीजेपी के मारोत रॉव को हराया था।

2011 की जनगणना के मुताबिक छिंदवाड़ा की जनसंख्या 2090922 है। यहां की 75.84 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 24.16 फीसदी शहरी क्षेत्र में रहती है। छिंदवाड़ा में 11.11 फीसदी जनसंख्या अनुसूचित जाति और 36.82 फीसदी जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की है। चुनाव आयोग के आंकड़े के मुताबिक 2014 के चुनाव में यहां पर 14,01,277 मतदाता थे। इनमें से 6,79,795 महिला मतदाता और 7,21,482 पुरुष मतदाता थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 79.03 फीसदी मतदान हुआ था।

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