बंगाल चुनाव का पहला दौर: हिंसा, ईवीएम की खराबी और आरोप-प्रत्यारोप के बीच 92 फीसदी मतदान

पश्चिम बंगाल में पहले दौर के मतदान में रिकॉर्ड 92 फीसदी वोटरों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। कई जगहों पर ईवीएम की खराबी और हिंसक झड़पों से माहौल बिगड़ा, लेकिन मोटे तौर पर मतदान शांतिपूर्ण रहा। किसी भी बूथ पर दोबारा मतदान के आदेश अभी नहीं दिए गए हैं।

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कुणाल चटर्जी

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों का पहले चरण के मतदान में वोटरों ने ज़ोर-शोर से हिस्सा लिया और पहले दौर की 152 सीटों पर करीब 92 फीसदी वोट पड़े। यह चरण राज्य के अलग-अलग इलाकों में फैला था—उत्तर बंगाल की धुंध भरी पहाड़ियों से लेकर दक्षिण के तपते मैदानों तक। मतदान में लोगों की इस रिकॉर्ड भागीदारी ने—जो 2021 के चुनावों के 82 फीसदी से भी ज़्यादा थी—एक ऐसे चुनावी रणक्षेत्र में मतदाताओं के उत्साह को दिखाया, जहां राजनीति सत्ता के साथ-साथ पहचान और जन-कल्याण के मुद्दों पर भी टिकी है।

अडिग ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) लगातार चौथी बार ऐतिहासिक जीत हासिल करने की कोशिश में है। इसके लिए वह अपने ज़मीनी संगठन, 'लक्ष्मी भंडार' जैसी महिला-केंद्रित योजनाओं और केंद्र सरकार पर उपेक्षा के आरोपों पर भरोसा कर रही है। वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) , 2021 में जीती गई 77 सीटों पर अपनी पकड़ और मज़बूत करने की कोशिश में है। इसके लिए उसने सत्ता-विरोधी लहर, चुनाव के बाद हुई हिंसा की घटनाओं और सीमावर्ती ज़िलों में हिंदुत्व के मुद्दों को भुनाने की रणनीति पर भरोसा कर रही है। वाम मोर्चा और कांग्रेस का गठबंधन, भले ही अब कमज़ोर पड़ गया हो, लेकिन फिर भी यह इस बहु-कोणीय मुकाबले को और भी दिलचस्प बना रहा है—खासकर मुस्लिम-बहुल इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में।

फिर भी, 23 अप्रैल को मतदान का दिन 40 डिग्री की झुलसा देने वाली गर्मी में अव्यवस्था का एक तमाशा ही नजर आया। ईवीएम में खराबी, हिंसक झड़पें और एक-दूसरे पर आरोपों की बौछार ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा ली। चुनाव आयोग को 700 से ज़्यादा शिकायतें मिलीं—जिनमें से 360 सीधे और 340 सी-विजिल ऐप के ज़रिए थीं। इनमें तकनीकी गड़बड़ियों, बूथ पर कब्ज़े और मतदाताओं को डराने-धमकाने की घटनाओं जैसे मुद्दे शामिल थे।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने ऐसी उथल-पुथल की आशंका पहले ही जता दी थी, और मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल को मुर्शिदाबाद, बीरभूम और कूच बिहार जैसे संवेदनशील इलाकों में केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ाने का निर्देश दिया था। इस भारी अफरा-तफरी के बावजूद, ज़्यादातर इलाकों में व्यवस्था बहाल ही रही, जिससे 29 अप्रैल को 142 सीटों पर दूसरे चरण के मतदान का रास्ता साफ हो गया। नतीजे 4 मई को आने हैं।

कई बूथों पर तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से चुनाव में धांधली होने की आशंकाएं मजबूत हुई हैं।  कांग्रेस का गढ़ माने जाते रहे बहरामपुर के बूथ नंबर 141 में ईवीएम बार-बार खराब होती रहीं; उन्हें चार बार बदला गया, लेकिन वे फिर भी ठीक से काम नहीं कर पाईं। कांग्रेस के उम्मीदवार और लोकसभा सांसद, स्थानीय दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी ने चुनाव अधिकारियों की नाकामी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि उनकी वजह से सैकड़ों लोग वोट डालने से वंचित रह गए। यहां बुज़ुर्ग महिलाएं और दिहाड़ी मज़दूर चिलचिलाती धूप में घंटों लाइन में खड़े रहे, और कई लोग तो निराश होकर लाइन छोड़कर चले गए। 68 साल की सुनीता देवी, जो वोटर लिस्ट में बदलाव के बाद पहली बार वोट डाल रही थीं, उन्होंने दुख जताते हुए कहा, "हम सुबह से ही इस तेज़ धूप में खड़े हैं, लेकिन मशीनें काम ही नहीं कर रहीं।"


मुर्शिदाबाद के बेलडांगा, शमशेरगंज और कांडी; नंदीग्राम; कूच बिहार; मालदा के हबीबपुर; और दार्जिलिंग के सिलीगुड़ी में भी इसी तरह की देरी हुई। चुनाव अधिकारियों ने इन दिक्कतों की वजह मशीनों का ज़्यादा गर्म होना बताया, लेकिन दूसरे चरण के लिए जल्द ही मॉक पोल करवाने का वादा किया। जानकारों का कहना है कि इन रुकावटों से तृणमूल कांग्रेस के उस दावे को और बल मिलता है कि यह सब बीजेपी की साज़िश के तहत किया गया है। यह बात 2021 के उन विवादों की याद दिलाती है जिनके चलते कुछ बूथों पर दोबारा चुनाव करवाने पड़े थे।

तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी की आपसी रंजिश में झड़पों ने माहौल को और भी ज़्यादा भड़काऊ बना दिया, और अक्सर ये झड़पें पार्टियों की विचारधारा के आधार पर होती थीं। कुमारगंज में, बीजेपी उम्मीदवार सुवेंदु सरकार ने आरोप लगाया कि उनके पोल एजेंट को बूथ से बाहर निकाल दिया गया, जबकि तृणमूल का एजेंट अंदर ही मौजूद रहा। उन्होंने स्थानीय पुलिस अधीक्षक पर तृणमूल कांग्रेस का पक्ष लेने का आरोप लगाया और उन्हें "पार्टी का आदमी" करार दिया; साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि "जिहादियों" ने उन पर हमला किया था, जिसके बाद "सनातनियों" ने बीच-बचाव किया।

चुनाव आयोग ने इस मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है। पास के ही मुरारई में, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और TMC समर्थकों के बीच हाथापाई हुई, जिसमें कांग्रेस के दो कार्यकर्ताओं के सिर पर चोटें आईं; पार्टी ने आरोप लगाया कि मतदाताओं को वोट डालने से रोका जा रहा है। बीरभूम के लबपुर में, बीजेपी के एक एजेंट की बेरहमी से पिटाई की गई, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए सूरी सदर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

दुबराजपुर में उस समय तनाव पैदा हो गया, जब तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी पर ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए दोपहर करीब 1:30 बजे मतदान रुकवा दिया। विरोध प्रदर्शनों ने केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ झड़प का रूप ले लिया, जिसके बाद लाठीचार्ज किया गया। इस घटना में तृणमूल के कई कार्यकर्ता और दो सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। बीजेपी ने इसे मतदान प्रतिशत कम करने के लिए रचा गया एक "ड्रामा" करार दिया, जिसके बाद भारी सुरक्षा के बीच मतदान फिर से शुरू हो गया।

नंदीग्राम से तृणमूल कांग्रेस मंत्री शशि पांजा ने दो अधिकारियों अजय मिश्रा और कुदरत-ए-खुदा को पद से हटाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि ये अधिकारी बीजेपी का पक्ष ले रहे हैं, बीजेपी  के बाहुबलियों के खिलाफ जारी वारंटों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहे हैं।

जो और निर्वाचन क्षेत्र फोकस में रहे उनमें आसनसोल शामिल था, जहां बीजेपी की अग्निमित्रा पॉल की गाड़ी पर कथित तौर पर पथराव किया गया, जिसमें उनका दावा है कि वे बाल-बाल बचीं लेकिन गाड़ी को नुकसान पहुंचा। इस घटना के लिए उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के ‘गुंडों’ पर आरोप लगाया। नौदा में, टीएमसी और हुमायूं कबीर के समर्थकों के बीच हुई झड़पों के बाद गाड़ियों में तोड़फोड़ हुई; केंद्रीय बलों द्वारा लाठीचार्ज के बीच हुमायूँ कबीर ने इसमें अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया।


मतदान शुरु होने से पहले भी रात में कई जगहों से हिंसा की खबरें मिलीं। नौदा में देसी बम फटने से एक महिला घायल हो गई, डोमकल के रायपुर गांव में टीएमसी और सीपीएण के बीच झड़पें हुईं (मुर्शिदाबाद के डोमकल में धमकियों की भी खबरें आईं), और झारग्राम के पास एक आवारा हाथी ने मतदाताओं को डरा दिया।

भारी मतदान प्रतिशत के बाद सभी नेता जीत का दावा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक चुनावी रैली में इसे बीजेपी की जीत के संकेत से जोड़ा। भवानीपुर से ममता बनर्जी ने मतदाताओं के धैर्य को "बीजेपी के अत्याचारों" का जवाब बताया, और इसका श्रेय तृणमूल के कल्याणकारी कार्यक्रमों को दिया।  राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी अग्रवाल ने "भय-मुक्त" माहौल की तारीफ़ की और दोबारा मतदान की बातों को खारिज किया, जबकि बीजेपी के दिलीप घोष ने इसे "काफ़ी हद तक शांतिपूर्ण" बताया, और कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों को हिरासत में लिया गया है।

बहरामपुर से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया कि इस बार तृणमूल कांग्रेस की धमकियां मुर्शिदाबाद के मतदाताओं को डराने में नाकाम रहीं। उन्होंने कहा, "मैं लोगों को बिना किसी डर के कतारों में खड़े देखकर हैरान रह गया—जो पहले कभी नहीं देखा गया था।" अधीर रंजन चौधरी ने हा कि, "लोगों को डर है कि अगर वे वोट नहीं देंगे, तो उनके नाम भी लिस्ट से काटे जा सकते हैं।"

बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि उनकी पार्टी आज जिन 152 सीटों पर वोटिंग हुई, उनमें से 125 सीटें जीतेगी। उधर तृणमूल कांग्रेस की टीम अपने वॉर-रूम में पहले चरण में 105 से ज़्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है। दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा और नतीजे 4 मई को आएंगे।

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