लोकतंत्र की रक्षा के लिए राजनीतिक दलों से डेमोक्रेसी कन्वेंशन की अपील, पूजा स्थल अधिनियम को कमजोर होने से बचाएं

कन्वेंशन में पारित घोषणा पत्र में कहा गया है कि “आज देश हमारी आंखों के सामने विभाजित किया जा रहा है। इन हालात में हम लोकतांत्रिक विपक्ष से अपील करते हैं कि वे संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए सामूहिक तौर पर काम करें....।”

फाइल फोटो
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नवजीवन डेस्क

देश के ‘लोकतांत्रिक’ राजनीतिक दलों से अपील की गई है कि वे डेमोक्रेसी कन्वेंशन 2024 में पारित कम से कम कुछ प्रस्तावों को स्वीकार करें। हाल ही में दिल्ली में हुए इस कन्वेंशन में लेखकरों, शिक्षाविदों, एक्टिविस्ट, वकील, पूर्व नौकरशाह, संसद सदस्य, मानवाधिकार कार्यकर्ता, सिविल सोसायटी समूह, छात्र और पत्रकारों ने हिस्सा लिया। इस कन्वेंशन में देश में लगातार हो रहे लोकतंत्र के क्षरण पर गहरी चिंता जताई गई और राजनीतिक दलों से अपील की गई कि वे संवैधानिक अधिकारों को रक्षा, समानता और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए सामने आएं।

कन्वेंशन में पारित घोषणा पत्र में कहा गया है कि “आज देश हमारी आंखों के सामने विभाजित किया जा रहा है। इन हालात में हम लोकतांत्रिक विपक्ष से अपील करते हैं कि वे संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए सामूहिक तौर पर काम करें....।” कन्वेंशन की तरफ से जारी एक संक्षिप्त बयान में संयोजक राधा कुमार ने कहा कि, महिलाओं और बच्चों के यौन शोषण की लगातार अनदेखी, संस्थाओं का दुरुपयोग, अल्पसंख्यकों पर भयावह हमले और असहमति की आवाजों को दबाने का लगातार प्रयास हो रहा है। उन्होंने इन परिस्थितियों पर गहरी चिंता जताई। 

कन्वेंशन में राजनीतिक दलों से उनके अपने ही संकल्पों को पूरा करने का आग्रह भी किया गया। जिन बातों पर जोर दिया गया, उनमें:

  • 1992 के पूजा स्थल अधिनियम का 1947 की कटऑफ तारीख के साथ सख्ती से पालन किया जाए

  • एक ऐसा व्यापक भेदभाव-विरोधी कानून बनाने पर सहमति हो, जो नागरिकों को रोजगार, शिक्षा, आवास और स्वास्थ्य सेवा में लिंग, जाति, धर्म, जातीयता, पसंद, विकलांगता या इन पहचानों के अंतरविरोधों के आधार पर भेदभाव से बचाता हो

  • एक विविधता आयोग स्थापित किया जाए

  • 2023 का मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा स्थ्ति और कार्यकाल) कानून  को खत्म किया जाए और चयन समिति में सरकार द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि को बदला जाए

  • चुनाव आयोग इलेक्टोरल बॉन्ड के अपने विरोध के रुख पर वापस आए

  • राज्यपालों की नियुक्ति सिर्फ मुख्यमंत्रियों से सलाह-मशविरे के बाद हो और उन्हें राज्य विधानसभा से पारित प्रस्ताव (1988 का सरकारिया आयोग और 2010 का एम एम पंछी केस) के आधार पर ही हटाया जाए

  • राज्य सरकारों द्वारा कर्ज लेने के लिए केंद्र की अनुमति की अनिवार्यता करने वाले संविधान के अनुच्छेद 293(3) को संशोधित किया जाए

  • भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य बिल को बदला जाए जो अन्य प्रावधानों के साथ सिर्फ संदेह के आधार पर गिरफ्तारी की अनुमति देता है

  • 2019 का सीएए, यूएपीए, जम्मू-कश्मीर पीएसए और अन्य परिगामी कानूनों को खत्म किया जाए और पीएमएल को बदला जाए


कन्वेंशन में शामिल होने वाले लोगों ने देश में बढ़ती बेरोजगारी, खासतौर से युवाओं और महिलाओं के बीच बेरोजगारी की समस्या पर चिंता जताते हुए उनके लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। इसमें शामिल बुद्धिजीवियों ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के नाम पर व्यक्तिगत अधिकारों को खत्म करने और सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों के दुरुपयोग पर भी गहरी चिंता व्यक्त की।

कन्वेंशन में रेखांकित किया गया कि चंडीगढ़ के मेयर चुनाव में खुलेआम मतपत्रों से छेड़छाड़, संसदीय बहसों में विपक्ष को बोलने का मौका न देना, विपक्ष शासित राज्यों को फंड मुहैया न कराना, सरकार के कामकाज पर स्वतंत्र रूप से निगाह रखने वाले मीडिया, विश्वविद्यालयों, एनजीओ और थिंक टैंक को आंखें मूंदकर सरकार का गुणगान करने के लिए मजबूर करना इस बात के उदाहरण हैं कि किस तरह देश में लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है।

कन्वेंशन में कांग्रेस की भारत जोड़ो न्याय यात्रा द्वारा देश में संवैधानिक लोकतंत्र को बहाली और विविधता स्थापित करने की कोशिशों का स्वागत किया गया। साथ ही तमिलनाडु की डीएमके सरकार द्वारा फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर को पुरस्कृत और सम्मानित करने और संघीय व्यवस्था के लिए संघर्ष करने, तृणमूल कांग्रेस के अंतर-धार्मिक संवाद, आम आदमी पार्टी द्वारा स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में बेहतर कार्यक्रमों, सीपीआई-सीपीएम द्वारा बुनियादी अधिकारों की रक्षा का अभियान और जेएमएम, आरजेडी, समाजवादी पार्टी. नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी समेत अन्य क्षेत्रीय दलों द्वारा किए जा रहे संविधान की रक्षा के अभियानों का स्वागत किया गया।

कन्वेंशन को जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्लाह, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद और मनीष तिवारी, सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी, सांसद कपिल सिब्ब, सीपीएम कश्मीर के नेता यूसुफ तारिगामी और पीडीपी के प्रवक्ता सुहेल बुखारी आदि ने संबोधित किया। इस में तमाम विशिष्ट लोगों ने हिस्सा लिया जिनमें जी एन देवी, जयति घोषम, निखिल डे, जोया हसन, रोमिला थापर, गीता हरिहरन, वजाहत हबीबुल्लाह, अपूर्वानंद, करन थापर और निलांजन मुखोपाध्या आदि प्रमुख हैं।

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