‘शुद्धीकरण’ के विरोध पर राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी मनुस्मृति मानसिकता: दीपांकर भट्टाचार्य
दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि यह बड़ी विडंबना है कि राहुल गांधी को छुआछूत के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने को लेकर अत्याचार का मामला झेलना पड़ रहा है।

सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने ‘शुद्धीकरण प्रकरण’ के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने पर सवाल उठाते हुए इस मनुस्मृति मानसिकता करार दिया। राहुल गांधी ने उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संबोधन के बाद रैली स्थल पर कुछ लोगों द्वारा किए गए शुद्धीकरण अनुष्ठान की आलोचना की थी और प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। लेकिन इसके बाद राहुल गांधी के खिलाफ ही प्राथमिकी दर्ज हो गई।
दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि यह बड़ी विडंबना है कि राहुल गांधी को छुआछूत के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने को लेकर अत्याचार का मामला झेलना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि खड़गे को ‘नफरत भरी जातिवादी सोच’ का सामना करना पड़ा था, जब उत्तराखंड के हल्द्वानी में रामलीला मैदान में उनके भाषण के बाद एक ‘शुद्धीकरण हवन’ (शुद्धि अनुष्ठान) किया गया था और राहुल गांधी ने इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ़ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।उन्होंने पूछा, ‘‘छुआछूत की प्रथा के खिलाफ न्याय की मांग करने को अत्याचार कैसे माना जा सकता है?’’
दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि मनुस्मृति की राहुल गांधी की आलोचना से मीडिया के कुछ वर्गों में ‘बेचैनी और मज़ाक’ की स्थिति भी पैदा हुई थी। उन्होंने कहा, ‘‘मनुस्मृति को गुलामी की पितृसत्तात्मक एवं जातिवादी संहिता और संस्थागत या रस्मी अन्याय की संहिता बताने को चुनिंदा ‘हिंदू-विरोधी पूर्वाग्रह’ के तौर पर पेश किया जा रहा है।
बी.आर. आंबेडकर द्वारा 1927 में मनुस्मृति जलाये जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान को अपनाना उस सामाजिक व्यवस्था को स्पष्ट रूप से नकारना था जो इस ग्रंथ से जुड़ी थी। भट्टाचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (आरएसएस) ने अतीत में संविधान का विरोध किया था और भारत के संवैधानिक आधार के तौर पर मनुस्मृति का समर्थन किया था।
यह विवाद हल्द्वानी के रामलीला मैदान में 8 अगस्त को खड़गे के भाषण के बाद शुरू हुआ। राज्यसभा में इस मामले को उठाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया था कि उनके भाषण के बाद मंच पर बीजेपी से जुड़े लोगों ने 'शुद्धीकरण' की रस्म निभाई । उन्होंने ‘अस्पृश्यता निवारण कानून’ के तहत कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने इस घटना की निंदा की और कहा कि बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती है।
करीब 20 दिन तक शुद्धीकरण करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने पर राहुल गांधी ने 29 अगस्त को प्रेसवार्ता में इस मुद्दे को उठाते हुए इस घटना को ‘अपराध’ बताया और मांग की कि इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ एससी-एसटी कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाए। उन्होंने कहा कि यह घटना बीजेपी-आरएसएस की उस सोच को दिखाती है जो नहीं चाहती कि दलित तरक्की करें, सम्मान के साथ जिएं और सफल हों।
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राहुल गांधी के प्रेस कांफ्रेंस के अगले दिन वाल्मीकि समुदाय के एक सदस्य की शिकायत पर हल्द्वानी थाने में राहुल गांधी के ख़िलाफ ही प्राथमिकी दर्ज कर दी गई। शिकायतकर्ता का आरोप था कि कांग्रेस नेता ने एक धार्मिक अनुष्ठान की व्याख्या जातिवादी नजरिए से की थी। प्राथमिकी में राहुल गांधी के खिलाफ ही भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं लगायी गयी हैं। उत्तराखंड पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ पूरे प्रदेश में कांग्रेस विरोध और प्रदर्शन कर रही है।
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