ममता ने सोनिया, स्टालिन समेत विपक्षी नेताओं को लिखी चिट्ठी, कहा- लोकतंत्र और संविधान बचाने के लिए बीजेपी के खिलाफ एकजुट हों

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने सभी गैर-बीजेपी विपक्षी दलों को चिट्ठी लिखकर लोकतंत्र और संविधान पर बीजेपी द्वारा किए जा रहे हमलो के खिलाफ एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि समय आ गया है कि एकजुट होकर लोगों के सामने एक भरोसेमंद विकल्प रखा जाए।

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नवजीवन डेस्क

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने गैर-बीजेपी विपक्षी दलों को चिट्ठी लिखकर बीजेपी और इसकी सरकार द्वारा लोकतंत्र और संविधान पर किए जा रहे हमलों के खिलाफ एकजुट होने की अपील की है। ममता ने यह चिट्ठी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, डीएमके नेता एम के स्टालिन और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत अन्य विपक्षी नेताओं को भेजी है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा विधानसभा चुनावों के बाद बीजेपी के अलोकतांत्रिक शासन के खिलाफ एकजुट होकर रणनीति बनाने की जरूरत है।

ममता ने चिट्ठी में लिखा है कि बीजेपी ने विपक्षी दलों के लिए संवैधानिक अधिकारों और संवैधानिक स्वतंत्रता का पालन करना दूभर कर दिया है। उन्होंने आगे लिखा है कि केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्षी दलों के बीच जैसे रिश्ते आज हैं वैसे खराब रिश्ते आजाद भारत के इतिहास में कभी नहीं रहे। उन्होंने लिखा है कि इस सबके लिए प्रधानमंत्री का तानाशाही रवैया जिम्मेदार है।

उन्होंने लिखा है कि इसके पीछे एक खास मकसद है, और वह यह है कि बीजेपी विपक्षी दलों की सरकारों के अधिकार छीनकर उन्हें म्यूनिसपैलिटी जैसी स्थिति में ला देना चाहती है। ममता ने लिखा है कि बीजेपी पूरे देश में एक पार्टी का तानाशाही शासन लाना चाहती है।

ममता ने लिखा है कि एक के बाद एक राज्य में बीजेपी लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार को परेशान कर रही है और राज्यपाल के कार्यालय का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा है कि गैर-बीजेपी शासित राज्यों में राज्यपाल एक निष्पक्ष संवैधानिक पद के बजाए बीजेपी कार्यालय की तरह काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा है कि बीजेपी सरकार सीबीआई, ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्षी दलों को निशाना बना रही है और अपनी विभाजनकारी नीतियों को अमली जामा पहना रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में मोदी सरकार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और तमिलनाडु में डीएमके नेताओं को परेशान कर रही है।

उन्होंने आगे कहा है कि केंद्र की मोदी सरकार जानबूझकर राज्यों को दिए जाने वाले फंड को रोक रही है ताकि गैर-बीजेपी सरकारें अपनी कल्याणकारी योजनाओं को लागू न कर सकें। ममता ने कहा है कि नेशनल डेवलेपमेंट काउंसिल, इंटर स्टेट काउंसिल और योजना आयोग को खत्म कर बीजेपी सरकार ने उन सभी प्लेटफॉर्म खो खत्म कर दिया है जहां राज्य सरकारें अपनी शिकायतें और मांगे रख सकती थीं।

ममता ने कहा है कि बीजेपी ने एक संदिग्ध स्त्रोतों से बेशुमार संसाधन मुहैया कर लिए हैं जिनका इस्तेमाल कर गैर-बीजेपी निर्वाचित सरकारों को गिराने और विपक्षी दलों में टूट कराने के लिए किया जा रहा है।

ममता ने सभी दलों से अपील की है कि इस गंभीर मुद्दे पर गहनता से विचार विमर्श की जरूरत है। उन्होंने लिखा है अब समय आ गया है कि सभी गैर-बीजेपी विपक्षी दल मिलकर एकजुट हों और बीजेपी द्वारा लोकतंत्र और संविधान पर किए जा रहे हमलों के खिलाफ संघर्ष करें। उन्होंने चिट्ठी में कहा है कि इस स्थिति से तभी निपटा जा सकता है जब सभी दल एकजुट होकर लोगों के सामने एक भरोसेमंद विकल्प रखें।

ममता ने इस विषय में मौजूदा विधानसभा चुनाव के बाद सभी समान विचारों वाले दलों की बैठक बुलाने का आह्वान किया है ताकि इस गंभीर विषय पर विचार-विमर्श कर एक रणनीति बनाई जा सके। उन्होंने कहा है कि मोदी सरकार द्वारा राष्ट्रीय संपत्तियों का निजीकरण एक असंवैधानिक कदम है।

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