प्रचंड बहुमत से सत्ता में आने वाले दल न भूलें, आधे से ज्यादा वोटरों ने नहीं किया है उनका समर्थन: प्रणब मुखर्जी

पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने आगाह किया है कि प्रचंड बहुमत से सत्ता में आने वाले राजनीतिक दलों को हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि देश के बहुत बड़े तबके ने उसे वोट नहीं दिया था। सत्ता दल को ऐसे लोगों का खास ध्यान रखना चाहिए।

फोटो : सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

राजस्थान विधानसभा परिसर में हुए एक सम्मेलन में प्रणब मुखर्जी ने कहा कि कुछ लोकसभा चुनावों में जीतने वाले दलों को प्रचंड बहुमत मिला था, लेकिन आजतक ऐसा नहीं हुआ कि किसी राजनीतिक दल ने 50 फीसदी वोट शेयर का आंकड़ा पार किया हो।

उन्होंने कहा, “आश्चर्यजनक रूप से कई दलों को बड़ा बहुमत मिला, लेकिन इन दलों को भी देश के आधे से ज्यादा वोटरों ने वोट नहीं दिया। ऐसा न तो पहले कभी हुआ, और न ही मौजूदा दौर में हुआ। न कांग्रेस के साथ ऐसा हुआ और न ही आज के सत्ता दल बीजेपी के साथ।”

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि, “देश को वोटर सत्ता दल को एक संदेश देते रहे हैं कि हम आपको सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें दे रहे हैं, लेकिन याद रखना कि तुम्हें हमारा पूर्ण समर्थन हासिल नहीं है। इसका अर्थ यही है कि सत्ता दल को ऐसे वोटरों का खास ध्यान रखना चाहिए जिन्होंने उसे वोट नहीं दिया, क्योंकि वे भी इसी संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य के लोग हैं।”

पूर्व राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब चंद माह पहले ही केंद्र में बीजेपी की दोबारा सरकार बनी है और 2019 के चुनाव में उसे 303 सीटें और करीब 40 फीसदी वोट मिले हैं। अपने संबोधन में प्रणब मुखर्जी ने देश में संसदीय लोकतंत्र के विकास के विभिन्न चरणों का जिक्र किया। साथ ही उन्होंने सरकार और न्यायपालिका की भूमिका और कार्यप्रणाली और इसके ऐतिहासिक महत्व और संविधान की प्रस्तावना का महत्व बताया।

उन्होंने कहा, “भारत की संसदीय प्रणाली न तो दुर्घटनात्मक है और न ही अंग्रेजों से मिला कोई उपहार। यह सभी लोगों का योगदान, हमारे संघर्ष, आंदोलन और आत्म प्रयासों का नतीजा है।”


इस सम्मेलन का आयोजन राजस्थान विधानसभा के वर्तमान और पूर्व सदस्यों के लिए कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन की राजस्थान शाखा ने किया था। एसोसिएशन के राजस्थान अध्यक्ष और विधानसभा स्पीकर सी पी जोशी ने इस मौके पर कहा कि 1952 से 2009 के बीच हुए आम चुनावों में देश के 50 फीसदी वोट मुख्यता दो राजनीतिक दलों, कांग्रेस और बीजेपी के बीच बंटते रहे। लेकिन 2019 में यह आंकड़ा 50 फीसदी पार कर गया क्योंकि दोनों ही दलों ने क्षेत्रीय दलों के वोट शेयर में अच्छी पैठ की।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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Published: 01 Aug 2019, 5:55 PM