दिल्ली में प्रदर्शन पर संकट, रामलीला मैदान इस साल सिर्फ 3 दिन ही खाली, बुकिंग करते समय 1.21 लाख रुपये देने होंगे

ब्रिटिश राज में यह मैदान अजमेरी गेट से आगे तक फैला हुआ था और वर्तमान कमला मार्केट इसी क्षेत्र का हिस्सा हुआ करता था। अधिकारियों के अनुसार, 1930 तक यह मैदान एक तालाब हुआ करता था, जिसे भरकर समतल कर दिया गया ताकि वहां रामलीला का मंचन किया जा सके।

2023 में दिल्ली के रामलीला मैदान में किसानों का प्रदर्शन
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दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पर रोक लगाई

दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के लिए तीन नये स्थान तय किये

रामलीला मैदान में विरोध-प्रदर्शन करना दूर की कौड़ी

रामलीला मैदान में बुकिंग चार्ज एक लाख रुपये से ज्यादा

दिल्ली में जंतर-मंतर पर इजाजत बंद किए जाने के बाद विरोध-प्रदर्शन के लिए तय किये गए तीन नये स्थानों में से एक, रामलीला मैदान में प्रदर्शन करना दूर की कौड़ी और खर्चीला साबित हो सकता है, क्योंकि अगले ढाई महीने तक यह जगह उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा बुकिंग के लिए एक लाख रुपये से ज्यादा अदा करना पड़ सकता है।

रामलीला मैदान इस साल केवल तीन दिन उपलब्ध

अधिकारियों ने बताया कि 12 एकड़ में फैले रामलीला मैदान को, जिसमें 50,000 लोग एकत्र हो सकते हैं, अब इस साल सिर्फ 29, 30 और 31 दिसंबर के लिए ही बुक किया जा सकता है। एक अधिकारी ने बताया, ‘‘मैदान की बुकिंग की दर 50,000 रुपये प्रति दिन है, साथ ही 55,000 रुपये की जमानत राशि भी देनी होती है जो बाद में वापस मिल जाती है। कर सहित एक दिन की बुकिंग का शुरुआती खर्च 1.21 लाख रुपये आता है।’’

मैदान का एक छोटा हिस्सा विरोध-प्रदर्शन के लिए निशुल्क

नगर निकाय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मैदान का एक छोटा सा हिस्सा विरोध-प्रदर्शन और सभाओं के लिए निशुल्क उपलब्ध है, लेकिन वहां सिर्फ 150 लोग ही एकत्र हो सकते हैं।इस मैदान को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के बागवानी विभाग के जरिए बुक किया जाता है, जो इसकी मंजूरी देता है। नगर निकाय द्वारा आवेदन को मंजूरी देने से पहले दिल्ली पुलिस से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना जरूरी है।

दिल्ली में वोट चोरी और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी प्रदर्शनों के बीच दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को स्थायी आदेश जारी किया जिसमें कहा गया है कि जंतर-मंतर पर अब प्रदर्शन नहीं किया जा सकेगा। साथ ही कहा गया कि अब रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी (सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट) मैदान विरोध-प्रदर्शन के लिए नये स्थान होंगे।

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रामलीला मैदान का शुल्क प्रतिदिन 50,000 रुपये

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, किसी संगठन या निवासियों के समूह को प्रदर्शन करने के लिए रामलीला मैदान में बहुत अधिक प्रवेश शुल्क देना पड़ता है। जंतर-मंतर पर ऐसा कोई शुल्क नहीं देना पड़ता था। ऐसे में रामलीला मैदान में प्रदर्शन करना किसी भी संगठन के लिए काफी मंहगा पड़ सकता है।

एक अधिकारी ने कहा, ‘‘अगर बिना किसी शुल्क के वहां प्रदर्शन करने दिया जाता है, तो नगर निकाय को हर दिन कम से कम 50,000 रुपये या उससे अधिक का नुकसान होगा।’’ एमसीडी के अधिकारियों ने यह भी बताया कि आगामी कुछ हफ़्तों में दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं, इसलिए रामलीला मैदान को कई तरह के कार्यक्रमों और उत्सवों के लिए पहले ही बुक किया जा चुका है।

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1930 तक यह मैदान एक तालाब हुआ करता था

अधिकारियों के अनुसार, यह मैदान एक व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित है, जिसके आस-पास तीन अस्पताल और नगर निकायों के मुख्यालय हैं। ब्रिटिश शासन काल में, यह अजमेरी गेट से आगे तक फैला हुआ था, और वर्तमान कमला मार्केट इसी क्षेत्र का हिस्सा हुआ करता था।

अधिकारियों के अनुसार, 1930 तक यह मैदान एक तालाब हुआ करता था, जिसे भरकर समतल कर दिया गया ताकि वहां रामलीला का मंचन किया जा सके। यह परंपरा 1932 में शुरू हुई और आज भी जारी है, जिससे इस मैदान को इसका यह नाम मिला। आजादी के बाद, 1951 में, पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को आजीविका उपलब्ध कराने के लिए इस इलाके का विकास किया गया।

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दशकों की अपनी यात्रा में मैदान राजनीति का मंच बना

इसके बाद दिल्ली का यह ऐतिहासिक मैदान दशकों की अपनी यात्रा में, देश की राजनीति का मंच बन गया। 1952 में, भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू कश्मीर के भारत में एकीकरण की मांग को लेकर अपना सत्याग्रह शुरू किया था। प्रधानमंत्री के तौर पर जवाहरलाल नेहरू ने 1956 और 1957 में रामलीला मैदान में विशाल जनसभाओं को संबोधित किया।

वहीं, 1962 में भारत की यात्रा पर आईं महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के सम्मान में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए वहां एक स्थायी मंच बनाया गया था। वर्ष 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर मिली जीत के बाद इंदिरा गांधी ने यहां एक रैली को संबोधित किया था और 26 नवंबर 1974 को तत्कालीन सोवियत संघ के नेता लियोनिद ब्रेझनेव के सम्मान में एक जनसभा आयोजित की गई थी।

इसके कुछ साल बाद, 25 जून 1975 को, जिस दिन आपातकाल की घोषणा की गई थी, जयप्रकाश नारायण और अटल बिहारी वाजपेयी ने इसी मैदान में एक रैली को संबोधित किया था। इसके बाद हाल के इतिहास के एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अरविंद केजरीवाल ने 2013 में इसी जगह दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

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