राजा रघुवंशी हत्याकांड: आरोपी सोनम रघुवंशी को जाना होगा जेल, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की जमानत याचिका

राजा रघुवंशी, जो इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी थे, की शादी के कुछ समय बाद हनीमून के दौरान हत्या कर दी गई थी। जांच के दौरान उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी समेत कई लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया गया। बाद में हाईकोर्ट से मिली जमानत को चुनौती देते हुए मेघालय सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।

फोटो: सोशल मीडिया
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इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी और उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने उनकी जमानत रद्द करते हुए तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद बहुचर्चित हनीमून मर्डर केस एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

हनीमून के दौरान हुई थी राजा रघुवंशी की हत्या

राजा रघुवंशी, जो इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी थे, की शादी के कुछ समय बाद हनीमून के दौरान हत्या कर दी गई थी। जांच के दौरान उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी समेत कई लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया गया। बाद में हाईकोर्ट से मिली जमानत को चुनौती देते हुए मेघालय सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।

मेघालय सरकार ने जमानत पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट में मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सोनम को मिली जमानत केवल एक तकनीकी त्रुटि के आधार पर दी गई थी। उन्होंने दलील दी कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज में एक कानूनी धारा का नंबर टाइप करने में गलती हुई थी, जिसे जमानत का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। राज्य सरकार ने यह भी आशंका जताई कि जमानत जारी रहने पर आरोपी के फरार होने का खतरा बना रह सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर का दिया आदेश

पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी के वकील के सामने दो विकल्प रखे थे। अदालत ने पूछा था कि क्या वह स्वेच्छा से सरेंडर करेंगी या फिर अदालत उनकी जमानत रद्द करने का फैसला सुनाएगी। अंतिम सुनवाई में अदालत ने जमानत रद्द करते हुए सोनम रघुवंशी को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।

बचाव पक्ष ने रखीं ये दलीलें

सोनम रघुवंशी के वकील ने जमानत बनाए रखने की मांग करते हुए अदालत को बताया कि मामले में कुल 94 गवाह हैं, लेकिन अब तक केवल चार गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं। उन्होंने कहा कि पूरक आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और सोनम को कड़ी शर्तों के साथ जमानत मिली थी। बचाव पक्ष का कहना था कि वह सभी शर्तों का पालन कर रही हैं और उनके फरार होने की कोई आशंका नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और उनकी जमानत रद्द कर दी।

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