Sadhvi Prem Baisa Death: जुकाम में इंजेक्शन लगते ही हुई साध्वी प्रेम बाईसा की मौत, आखिर उस 30 सेकंड में क्या हुआ?
साध्वी प्रेम बाईसा के परिजनों के अनुसार, 28 जनवरी को साध्वी को हल्का जुकाम और गले में खराश की शिकायत हुई थी। डॉक्टर को घर बुलाया गया था और शुरुआती जांच के बाद इंजेक्शन दिया गया। परंतु इंजेक्शन के महज 30 सेकंड बाद ही उनकी हालत बिगड़ने लगी।

जोधपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में साध्वी और कथावाचक प्रेम बाईसा की मौत ने उनके अनुयायियों को गहरे शोक में डुबो दिया है। खबरों के अनुसार, इंजेक्शन लगाने के कुछ ही पलों बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई, और अस्पताल पहुंचते ही उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने कई सवाल उठाए हैं, जो अब तक अनसुलझे हैं।
इंजेक्शन के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत?
साध्वी प्रेम बाईसा के परिजनों के अनुसार, 28 जनवरी को साध्वी को हल्का जुकाम और गले में खराश की शिकायत हुई थी। उनके पिता वीरम नाथ ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि डॉक्टर को घर बुलाया गया था और शुरुआती जांच के बाद इंजेक्शन दिया गया। परंतु इंजेक्शन के महज 30 सेकंड बाद ही उनकी हालत बिगड़ने लगी, सांस लेने में दिक्कत, बेचैनी और अचानक कमजोरी। यह सब इतनी तेजी से हुआ कि परिजनों को संभलने का मौका भी नहीं मिला।
परिवार ने बताया कि फिर उन्हें जोधपुर के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटनाक्रम ने कई सवालों को जन्म दिया है। क्या यह एलर्जिक रिएक्शन था? क्या बिना आवश्यक जांच के दवा दी गई? या फिर यह एक मेडिकल लापरवाही का मामला है? परिवार अब इन सवालों के जवाब चाहता है।
परिवार की न्याय की मांग
साध्वी प्रेम बाईसा के पिता वीरम नाथ ने नम आंखों के साथ बताया कि उनकी बेटी ने कहा था, "मुझे जीते जी तो न्याय नहीं मिला, लेकिन मरने के बाद मुझे न्याय जरूर मिलना चाहिए।" यह शब्द अब इस मामले को और भी संवेदनशील बना रहे हैं। परिवार का कहना है कि वे किसी पर बेबुनियाद आरोप नहीं लगाना चाहते, लेकिन निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।
उधर, महामंडलेश्वर ने पुलिस से मांग की कि न केवल साध्वी की मौत की निष्पक्ष जांच हो, बल्कि सोशल मीडिया पर अनर्गल टिप्पणियां करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए।
संत समाज की आवाज: सच्चाई सामने लाने की मांग
संत समाज भी इस पूरे मामले में एकजुट होकर सच्चाई का खुलासा करने की मांग कर रहा है। कई संतों का कहना है कि बिना प्रमाण के सोशल मीडिया पर की जा रही टिप्पणियां न केवल दिवंगत साध्वी का अपमान कर रही हैं, बल्कि समाज में भ्रम और नफरत भी फैला रही हैं। उन्होंने इस पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उधर, साध्वी प्रेम बाईसा के समर्थक प्रेमराज चौधरी ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि हाल ही में आश्रम से सीसीटीवी कैमरे हटा दिए गए थे, जिससे संदेह पैदा होता है। उन्होंने सवाल किया कि कैमरे क्यों हटाए गए, और यह जांच का हिस्सा बनना चाहिए।
साध्वी की मौत के बाद डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम करवाने की सलाह दी थी, लेकिन परिवार ने इससे मना कर दिया। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या यह सही कदम था?
साध्वी का वीडियो हुआ था वायरल
गौरतलब है कि जुलाई में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें साध्वी अपने पिता वीरम नाथ के गले मिल रही थीं। इसके बाद साध्वी ने बोरानाडा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, और पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। तब साध्वी ने खुद की अग्नि परीक्षा करवाने की बात भी की थी। लेकिन बताया जा रहा है कि वीडियो को लेकर उनके ऊपर दबाव था, जिसका असर उनकी मानसिक स्थिति पर भी पड़ा हो सकता है।
Google न्यूज़, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia